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भगवान श्रीकृष्ण की लीला सबसे न्यारी: शास्त्री
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केशवपुरी में श्रीमद भागवत कथा सुनाते कथा व्यास डॉ सत्यकृष्ण शास्त्री।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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भगवान श्रीकृष्ण की लीला सबसे न्यारी : शास्त्री
मुजफ्फरनगर। केशवपुरी में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक डॉ सत्यकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण की लीलाएं सबसे न्यारी है। जन्म के छठे दिन वह शकटासुर का वध कर देते हैं।
श्री केशव सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में डाक्टर सत्यकृष्ण शास्त्री ने कहा कि कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक होता है, तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया है। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। यजमान संदीप सिंघल रहे। जसवीर बालियान, सतीश अग्रवाल, अंकुर गोयल, विनय मित्तल, ओपी चौहान, सुभाष मित्तल, डॉक्टर अमित मित्तल, अरुण गर्ग, नरेश गुप्ता, डॉ कैलाश अरोरा, सुरेश वार्ष्णेय, शिशुकांत गर्ग, राकेश कुमार, डॉ अशोक मित्तल, सुरेश भगत, बिजेंद्र गुप्ता उपस्थित रहे।
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मुजफ्फरनगर। केशवपुरी में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक डॉ सत्यकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण की लीलाएं सबसे न्यारी है। जन्म के छठे दिन वह शकटासुर का वध कर देते हैं।
श्री केशव सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में डाक्टर सत्यकृष्ण शास्त्री ने कहा कि कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक होता है, तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया है। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। यजमान संदीप सिंघल रहे। जसवीर बालियान, सतीश अग्रवाल, अंकुर गोयल, विनय मित्तल, ओपी चौहान, सुभाष मित्तल, डॉक्टर अमित मित्तल, अरुण गर्ग, नरेश गुप्ता, डॉ कैलाश अरोरा, सुरेश वार्ष्णेय, शिशुकांत गर्ग, राकेश कुमार, डॉ अशोक मित्तल, सुरेश भगत, बिजेंद्र गुप्ता उपस्थित रहे।
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