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नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बारू सिंह को दिया था शेर-ए- हिंद का खिताब, पढ़िए क्या है पूरी कहानी

Sat, 23 Jan 2021 03:02 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 23 Jan 2021 03:02 PM IST
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Muzaffarnagar News: Baru Singh got the title of Shere Hind
शेर-ए-हिंद बारू सिंह की पत्नी धनवती अपने बेटों के साथ। - फोटो : अमर उजाला

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बिटावदा गांव के बारू सिंह को शेर-ए- हिंद का खिताब दिया था। आजाद हिंद फौज में वे कैप्टन के पद पर थे। 11 वर्षों तक परिजनों को उनकी कोई खैर खबर नहीं मिली थी।

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मुजफ्फरनगर में बिटावदा गांव के बारू सिंह 1934 में अंग्रेजों की सेना में अंबाला से भर्ती हुए थे। उनके बेटे सेवानिवृत्त अध्यापक देवेंद्र सिंह बताते हैं कि सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के गठन की घोषणा की। इसके गठन की घोषणा होते ही वो आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। वर्ष 1940 में सिंगापुर से लड़ाई लड़ते हुए आजाद हिंद फौज नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में सिंगापुर से जावा, सुुमात्रा, बोरनियो को जाते हुए म्यांमार में पहुंच गए। 16 मार्च 1945 को आजाद हिंद फौज के जनरल ढ़िल्लन के आदेश पर कैप्टन बारू सिंह 50 जवानों की टुकड़ी के साथ अंग्रेजी सेना के 175 जवानों से भिड़ गए। उसकी टुकड़ी ने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए।
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कैप्टन बारू सिंह दो गोली लगने से घायल हो गए थे। उन्हें दिल्ली लाल किले की जेल में लाकर बंद कर दिया। उन्हें फांसी की सजा भी सुनाई गई। शिमला कांफ्रेंस के बाद उनकी फांसी टल गई थी। बारू सिंह की पत्नी धनवती गांव में रहती हैं। उनका पांच पुत्री व दो पुत्रों के साथ भरा पूरा परिवार है। उनके दो पौत्र सचिन कुमार व कपिल कुमार भी आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा में जुटे हैं।

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शेरे हिंद का दर्जा मिलने पर गर्व
पति को शेर-ए -हिंद का खिताब मिलने से स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी धनवती को अपने आप पर गर्व है। उनका कहना है कि उनके पति ने उनके परिवार व गांव को ही नहीं पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उनके बच्चे अपने पिता के पदचिह्न पर चल रहे हैं।

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