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एक्सक्लूसिव: यूपी सरकार के नाम दर्ज होगी पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री के परिवार की जमीन

Sat, 23 Jan 2021 12:14 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 23 Jan 2021 12:14 PM IST
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Amar Ujala Exclusive Report: Land of family of first prime minister of Pakistan will be registered in the name of UP government in Muzaffarnagar
पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खां - फोटो : गूगल

पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री और मुजफ्फरनगर के जमींदार रहे लियाकत अली खां के परिवार की निष्क्रांत संपत्ति श्रेणी की करीब सौ बीघा बेशकीमती जमीन को लेकर एसडीएम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने जमीन को राज्य सरकार के नाम पर दर्ज करने और तहसीलदार को जमीन पर कब्जा लेने को भी कहा है।

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यह फैसला भोपा रोड की शहर के अंदर की ग्राम यूसुफपुर महाल में लियाकत अली खां के चाचा रुस्तम अली खां की जमीन के लिए है। अपने निर्णय में कोर्ट ने कहा है कि महाल रुस्तम अली खां के खेवट नंबर 4/1 में लाला रघुराज स्वरूप के नाम की प्रविष्टि शिकमी काश्तकार के रूप में दर्ज थी। कुछ भूमि पर 1360 फसली से पूर्व ही लाला रघुराज स्वरूप ने अवैध तरीके से संक्रमणीय अधिकार अर्जित कर लिए थे और शेष भूमि पर अधिवासी/आसामी अधिकार जमींदारी खात्मा के दौरान वर्ष 1961 में लाला रघुराज स्वरूप को प्राप्त होने थे। भूमि नियमानुसार उसी समय ही नियत अवधि के पश्चात राज्य सरकार में निहित होनी चाहिए थी, परंतु लाला रघुराज स्वरूप ने राज्य सरकार में निहित नहीं होने दी। उन्होंने मूल्यवान भूमियों को हड़पकर राज्य सरकार को क्षति पहुंचाई।
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कागजों में हेराफेरी कर कब्जाई थी जमीन: एसडीएम कोर्ट

एसडीएम (उपजिलाधिकारी) कोर्ट ने आदेश में कहा है कि जालसाजी, कूटरचना या कपट से प्राप्त की गई भूमि में लाला रघुराज स्वरूप एवं उनके उत्तराधिकारियों अलोक स्वरूप एवं अनिल स्वरूप निवासी राजभवन, भोपा रोड और ललिता कुमार गुप्ता, कुसुम कुमारी, ओमप्रकाश गुप्ता, अतुल गुप्ता, अपर्णा वारिसान लाला दीपचंद को कोई अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं। एसडीएम ने अपने आदेश में यह भी लिखा है कि प्रविष्टियों में कूट रचना करने वाले व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाना उचित नहीं है। इसके बाद भी प्रतिवादीगणों को नोटिस भेजकर जवाब व साक्ष्य के लिए अवसर दिया गया। लेकिन कोई जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। हालांकि अनिल स्वरूप का कहना है कि उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
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कोर्ट ने कहा है कि रघुराज स्वरूप के नाम की प्रविष्टि शिकमी काश्तकार के रूप में दर्ज थी। कुछ भूमि पर 1360 फसली से पूर्व ही लाला रघुराज स्वरूप ने अवैध तरीके से संक्रमणीय अधिकार अर्जित कर लिए थे। शेष भूमि खसरा नंबर 365, 366, 371, 372, 373, 377, 379, 382, 383, 384 पर अधिवासी/ आसामी अधिकार जमींदारी खात्मा के दौरान वर्ष 1961 में लाला रघुराज स्वरूप को प्राप्त होने थे और भूमि नियमानुसार नियत अवधि के पश्चात राज्य सरकार में निहित होनी चाहिए थी, परंतु लाला रघुराज स्वरूप ने जमीन राज्य सरकार में निहित नहीं होने दी। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी लिखा है कि मौरूसी काश्तकार के अधिकार अर्जित कर लेने के उपरांत लाला रघुराज स्वरूप की परिपाटी पर चलते हुए आलोक स्वरूप आदि ने खतौनी में मौरूसी काश्तकार के साथ-साथ खेवट चौसाला में भी जमींदार के रूप में एंट्री करा ली और जमींदार के रूप में ट्रांसफेरेबल अधिकार अर्जित कर लिए। कोर्ट ने कहा कि 21 मार्च 2020 की तत्कालीन तहसीलदार रणजीत सिंह की रिपोर्ट के आधार पर कूट रचित प्रविष्टियों को राजस्व अभिलेखों में निरस्त किया जाता है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अंतर्गत निरस्त कर भूमि को राज्य सरकार में दर्ज किया जाता है। भूमि को कब्जे में लेने के लिए तहसीलदार सदर को आदेश जारी किए गए है। 

सरकारी रिकॉर्ड में कूटरचना कर जमीनों को हड़पा गया था। न्यायालय में लगातार चली सुनवाई और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर यूसुफपुर गांव की महाल रूस्तमअली खां की यह जमीन राज्य सरकार में निहित करने के आदेश गत 31 दिसंबर को जारी किए गए है। तहसीलदार सदर को जमीनों पर कब्जा लेने के लिए आदेश दिया गया है। - दीपक कुमार, उप जिलाधिकारी, सदर

शासन की प्राथमिकता में है सरकारी जमीन मुक्त कराना
डीएम सेल्वा कुमारी जे का कहना है कि शासन की प्राथमिकता सरकारी जमीनों को खाली कराने की है। भोपा रोड की राज्य सरकार की जमीनों पर कुछ लोगों ने रिकॉर्ड में हेराफेरी कर कब्जा कर रखा था। इन लोगों के खिलाफ कानून अपना काम कर रहा है। एसडीएम के न्यायालय से 31 दिसंबर 2020 को जो आदेश हुआ है उसका पालन हो रहा है। 

हमारा पक्ष नहीं सुना, रिकॉल करेंगे
गत वर्ष मार्च माह में एसडीएम कोर्ट की ओर से मुझे नोटिस दिया गया था। लेकिन कोर्ट ने हमें अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया। कोर्ट ने क्या आदेश दिया है, इसकी जानकारी नहीं है। कोर्ट का ऑर्डर मिलने पर हम कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए रिकॉल करेंगे। अनिल स्वरुप

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