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Muzaffarngr : गंगा मेले में भैंसा-बोगी पर रोक को नरेश टिकैत ने बताया गलत, कहा-यह प्राचीन संस्कृति से छेड़छाड़

Thu, 27 Oct 2022 06:17 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 27 Oct 2022 06:17 PM IST
सार

गंगा मेले में इस बार श्रद्धालु  भैंसा-बोगी से नहीं जा पाएंगे। पशुओं में लंपी बीमारी के कारण यह निर्णय लिया गया है। मेले में भैंसा-बोगी ले जाने पर रोक के फैसले को भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने गलत करार दिया है। 

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Ban on buffalo-bogi in Ganga fair tampering with ancient culture says Naresh Tikait
नरेश टिकैत - फोटो : amr ujala

विस्तार

मेरठ और हापुड़ जिला प्रशासन की ओर से गंगा स्नान मेले में भैंसा-बोगी ले जाने पर रोक के फैसले को भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने गलत करार दिया है। टिकैत ने कहा कि  दोनों जिलों का प्रशासन प्राचीन संस्कृति के साथ छेड़छाड़ का प्रयास कर रहा है। किसान भी अपना नफा-नुकसान जानते हैं।
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बृहस्पतिवार को टिकैत ने प्रतिक्रिया व्यक्ति करते हुए कहा कि पहले हादसा होने पर किसान के ट्रैक्टर पर प्रतिबंध लगाया गया। अब लंपी बीमारी की बात कर दोनों जिलों का प्रशासन भैसा-बोगी पर रोक लगा रहा है। यह बेहद निंदनीय है। मेले भारतीय संस्कृति की पहचान है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग सदियों से मेलों में अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर जाते हैं। सिर्फ यूपी के ही नहीं, बल्कि हरियाणा के किसान भी भैसा-बोगी पर गंगा स्नान में आते रहे हैं। किसान अपने वाहन पर शान से चलता रहा है। उन्होंने सवाल  उठाया कि क्या दोनों जिलों का प्रशासन गांव-गांव से किसानों को नि:शुल्क मेलों में आवागमन की व्यवस्था कर सकेगा। किसान खुद अपना नफा नुकसान जानता है।
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मुजफ्फरनगर में रोक नहींं, करेंगे पार्किंग की व्यवस्था
मुजफ्फरनगर। जिले में पांच से नौ नवंबर तक गंगा स्नान मेले का आयोजन किया जाएगा। आठ नवंबर को मुख्य स्नान होगा। जिला प्रशासन ने फिलहाल भैसा-बोगी से आवागमन पर रोक नहीं लगाई है। मेला क्षेत्र में भैसा बोगी की अलग से पार्किंग की व्यवस्था कराई जाएगी। किसानों से इसमें सहयोग मांगा जाएगा। 
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यह भी पढ़ें : Muzaffarnagar : बुलेट पर सवार होकर निकले टिकैत, कार्यकर्ताओं को पढ़ाया अनुशासन का पाठ

गा मेले में इस बार श्रद्धालु भैंसा-बोगी से नहीं जा पाएंगे। पशुओं में लंपी बीमारी के कारण यह निर्णय लिया गया है। मेरठ के गढमुक्तेश्वर में कार्तिक पूर्णिमा मेले मे जिलाधिकारी हापुड़ द्वारा भेजे गए पत्र के संबंध में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि हापुड़ सहित अन्य सभी जनपदो में गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं में घातक वायरल बीमारी लम्पी स्किन डिजीज का प्रकोप फैला हुआ है।

इस बीमारी में पशुओं की त्वचा पर गांठनुमा फफोले व घांव हो जाते हैं। पशु को तेज बुखार बना रहता है एवं पशु चारा खाना बंद कर देता है। गामिन पशुओं में गर्भपात हो जाता है तथा पशु बांझपन के शिकार हो जाते हैं। बीमारी 3 से 6 सप्ताह तक बनी रहती है तथा ईलाज के बाद पूर्ण स्वस्थ होने में 3 से 4 माह का समय लगता है।

यह बीमारी गाय-भैंसो के साथ-साथ घोडे, गधे, खच्चर, ऊंट एवं हिरन प्रजाति के पशुओं को सर्वाधिक प्रभावित करती है। मेले प्रदर्शनी में पशुओं के एक स्थान पर एकत्र होने से लक्षणविहीन किन्तु रोग के वाहक पशुओं के द्वारा यह बीमारी अन्य सभी संपर्क में आने वाले पशुओं में घातक रूप से प्रबल संभावना है। 

29 अक्तूबर से किया जाना है मेले का आयोजन
29 अक्तूबर से गढमुक्तेश्वर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा के किनारे राजकीय स्नान मेले का आयोजन किया जाना है। पर्व में उक्त गंगा स्नान मेले के साथ-साथ मेले में अश्व प्रदर्शनी-अश्व विपणन का कार्य भी होता रहा है।

ऐसे में मेले में अश्व प्रदर्शनी-विपणन मेले के आयोजन पर रोक लगायी गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं से अपील कि है कि वे गंगा स्नान मेले में किसी भी घोड़े, गधे, खच्चर, गाय, बैल व भैंस को न ले जाएं एवं किसी भी प्रकार की पशु प्रदर्शनी का आयोजन न कराएं।

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