{"_id":"6ac3062ceb609d4b1a0b1b58","slug":"brazil-heads-to-runoff-election-after-bolsonaro-lula-fail-to-garner-majority-vote-2026-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्राजील: राष्ट्रपति चुनाव का मुकाबला दूसरे दौर में, अब किसके हाथ आएगी सत्ता? 25 अक्टूबर को होगा फैसला","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
ब्राजील: राष्ट्रपति चुनाव का मुकाबला दूसरे दौर में, अब किसके हाथ आएगी सत्ता? 25 अक्टूबर को होगा फैसला
Mon, 05 Oct 2026 07:37 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रासीलिया।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रासीलिया।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 05 Oct 2026 07:37 AM IST
सार
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला और फ्लावियो बोल्सोनारो बहुमत के आंकड़े से दूर रह गए। अब 25 अक्टूबर को दोनों के बीच सीधा मुकाबला होगा। ट्रंप के करीबी माने जाने वाले बोल्सोनारो के सामने लूला चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश करेंगे। क्या ब्राजील में लूला की वापसी होगी या बोल्सोनारो दक्षिणपंथ की नई लहर के साथ बाजी पलट देंगे? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
विज्ञापन
ब्राजील चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव अब दूसरे दौर में पहुंच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो और ब्राजील के अनुभवी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा 25 अक्तूबर को आमने-सामने होंगे। दोनों में से कोई भी पहले दौर में बहुमत हासिल नहीं कर सका।
ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में चुनावी अदालत ने बताया कि 80 वर्षीय मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के 45 वर्षीय बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो में से कोई भी पहले दौर में जीत के लिए जरूरी 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल नहीं कर पाया। दूसरे दौर का चुनाव 25 अक्तूबर को होगा। नए राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
ब्राजील के लोगों ने रविवार को बेहद अहम राष्ट्रपति चुनाव में मतदान किया। इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो आमने-सामने थे। यह चुनाव ऐसे समय हुआ, जब ट्रंप प्रशासन की नीतियों के साथ लैटिन अमेरिका का राजनीतिक रुख भी दक्षिणपंथ की ओर बढ़ रहा है।
विज्ञापन
45 वर्षीय फ्लावियो बोल्सोनारो दक्षिणपंथी पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे हैं। जेर बोल्सोनारो तख्तापलट की कोशिश के मामले में 27 साल की सजा काट रहे हैं। फ्लावियो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।
लूला दुनिया के सबसे उम्रदराज राष्ट्राध्यक्षों में शामिल हैं। वह सातवीं बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने चीन के साथ ब्राजील के संबंधों को और मजबूत किया है। लैटिन अमेरिका के कई देशों में हाल के चुनावों में ट्रंप के सहयोगियों को अच्छा प्रदर्शन करते देखा गया है। इनमें अर्जेंटीना, कोलंबिया, होंडुरास और पेरू शामिल हैं।
अगर 12 राष्ट्रपति उम्मीदवारों में से कोई भी 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल नहीं करता है, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवार 25 अक्तूबर को दूसरे दौर के चुनाव में जाएंगे। ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
रविवार के चुनाव में ब्राजील के करीब 15.9 करोड़ योग्य मतदाताओं ने मतदान किया। उन्होंने 27 राज्यों के गवर्नर भी चुने। इसके अलावा राज्य विधानसभाओं के सदस्य, कांग्रेस के निचले सदन के सभी 513 सदस्य और देश की 81 सदस्यीय सीनेट में से 54 सदस्यों के लिए भी मतदान हुआ।
रविवार शाम पांच बजे मतदान केंद्र बंद हो गए। हालांकि, जो लोग उस समय कतार में थे, उन्हें वोट डालने की अनुमति दी गई। कुछ ही घंटों में वोटों की गिनती पूरी होने की उम्मीद थी।
ट्रंप के सामने खड़े होने का लूला को फायदा?
कभी बेहद लोकप्रिय रहे लूला के तीसरे कार्यकाल में उनकी लोकप्रियता और समर्थन में काफी गिरावट आई है। लेकिन अमेरिका के सामने मजबूती से खड़े होने से उन्हें फायदा मिला है। उनके पास अब भी समर्थकों का एक मजबूत आधार है। ये समर्थक मानते हैं कि उनकी सामाजिक नीतियों से लाखों ब्राजीलियाई लोगों की जिंदगी बेहतर हुई है।
मौजूदा राष्ट्रपति लूला ने ब्राजील के चुनाव में अमेरिकी दखल के खतरे की बात कई बार कही है। ट्रंप प्रशासन ने ब्राजील से होने वाले सामान के निर्यात पर भारी टैरिफ लगाया है। उसने ब्राजील के राजदूत का वीजा भी रद्द किया है।
अमेरिकी प्रशासन ने ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के एक जज पर भी प्रतिबंध लगाया है। यही जज जेर बोल्सोनारो की जांच की अध्यक्षता कर रहे थे। इसी जांच के बाद बोल्सोनारो को सजा सुनाई गई।
रविवार को मतदान करने के बाद लूला ने पत्रकारों से कहा कि दोबारा चुने जाने पर उन्हें 'हमने जो किया है, उसका दोगुना करना होगा'। उन्होंने पहले दौर में ही जीत हासिल करने का भरोसा भी जताया।
लेकिन लूला के सामने कड़ी चुनौती है। देश में लोगों के लिए चीजें खरीदना महंगा हो रहा है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार का एक मामला भी सामने आया है। इसमें वही जज घिरे हैं, जिन्होंने जेर बोल्सोनारो के खिलाफ जांच का नेतृत्व किया था।
साओ पाउलो की इंस्पर यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कार्लोस मेलो ने कहा, कुछ हफ्ते पहले लूला के अभियान से जुड़े कई लोगों को इतनी मुश्किल चुनावी स्थिति की उम्मीद नहीं थी। अब उनके लिए साफ है कि मौजूदा चुनाव एक कठिन लड़ाई है। लूला के बिना होने वाले अगले चुनाव इससे भी ज्यादा मुश्किल हो सकते हैं।
बोल्सोनारो ने ट्रंप से दोस्ती को बनाया मुद्दा
फ्लावियो बोल्सोनारो ने व्हाइट हाउस से अपनी नजदीकी को चुनाव में जोर-शोर से पेश किया है। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि उनके चुनाव अभियान को अमेरिकी सरकार से कोई मदद मिली है।
उन्होंने ब्राजील के आपराधिक गिरोहों पर सख्त कार्रवाई करने का वादा किया है। उनका कहना है कि ब्राजील को ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर समझौते करने की जरूरत है। इसमें दुर्लभ खनिजों का कारोबार भी शामिल है। इस क्षेत्र में चीन के बाद ब्राजील दूसरे स्थान पर है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका ने आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से हटाए सभी बमवर्षक: क्यों उठाया यह कदम; ट्रंप ने ईरान पर अब क्या कहा?
बोल्सोनारो ने अपने पिता को जेल से रिहा कराने और उन्हें फिर से राजनीति में लाने का भी चुनावी वादा किया है। रविवार को रियो डी जेनेरियो के मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, ब्राजील को बदलाव की जरूरत है। ब्राजील इतना ज्यादा दुख नहीं झेल सकता।
हालांकि, सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के सामने अपनी भी मुश्किलें हैं। भ्रष्टाचार के कई आरोपों के कारण उनका राजनीतिक करियर प्रभावित हुआ है। इनमें एक बदनाम बैंकर से कथित तौर पर लाखों डॉलर लेने का आरोप भी शामिल है। आरोप है कि ये पैसे उनके पिता की जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए लिए गए थे।
मतदाताओं के सामने लूला या दक्षिणपंथ की वापसी?
67 वर्षीय रोजाने विंक रिटायर्ड इंजीनियर हैं। वह लंबे समय से रूढ़िवादी विचारों वाली मतदाता रही हैं। वह बोल्सोनारो का समर्थन करती हैं। वह आपराधिक गिरोहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने के उनके वादे के समर्थन में हैं।
रियो डी जेनेरियो में वोट डालते समय विंक ने कहा, वे हमारे साथ जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, वह एक तरह का आतंकवाद है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने एक अपराधी ने उनके पेट पर बंदूक तान दी थी। उसने उनका हाथ काटा और उनकी शादी की अंगूठी उतार ली थी।
ब्रासीलिया की 50 वर्षीय मोबाइल फोन विक्रेता मारिया रिबेरो ने कहा कि उन्होंने बोल्सोनारो के लिए वोट दिया है। वह अपनी ईसाई धर्म की धार्मिक मान्यताओं को खुलकर व्यक्त करने की आजादी चाहती हैं। उन्हें उम्मीद है कि फ्लावियो अपने पिता के रास्ते पर चलेंगे। उन्होंने कहा, मैंने उनके पिता को वोट दिया था और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है।
विज्ञापन
ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में चुनावी अदालत ने बताया कि 80 वर्षीय मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के 45 वर्षीय बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो में से कोई भी पहले दौर में जीत के लिए जरूरी 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल नहीं कर पाया। दूसरे दौर का चुनाव 25 अक्तूबर को होगा। नए राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
विज्ञापन
ब्राजील के लोगों ने रविवार को बेहद अहम राष्ट्रपति चुनाव में मतदान किया। इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो आमने-सामने थे। यह चुनाव ऐसे समय हुआ, जब ट्रंप प्रशासन की नीतियों के साथ लैटिन अमेरिका का राजनीतिक रुख भी दक्षिणपंथ की ओर बढ़ रहा है।
विज्ञापन
45 वर्षीय फ्लावियो बोल्सोनारो दक्षिणपंथी पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे हैं। जेर बोल्सोनारो तख्तापलट की कोशिश के मामले में 27 साल की सजा काट रहे हैं। फ्लावियो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।
लूला दुनिया के सबसे उम्रदराज राष्ट्राध्यक्षों में शामिल हैं। वह सातवीं बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने चीन के साथ ब्राजील के संबंधों को और मजबूत किया है। लैटिन अमेरिका के कई देशों में हाल के चुनावों में ट्रंप के सहयोगियों को अच्छा प्रदर्शन करते देखा गया है। इनमें अर्जेंटीना, कोलंबिया, होंडुरास और पेरू शामिल हैं।
अगर 12 राष्ट्रपति उम्मीदवारों में से कोई भी 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल नहीं करता है, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवार 25 अक्तूबर को दूसरे दौर के चुनाव में जाएंगे। ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
रविवार के चुनाव में ब्राजील के करीब 15.9 करोड़ योग्य मतदाताओं ने मतदान किया। उन्होंने 27 राज्यों के गवर्नर भी चुने। इसके अलावा राज्य विधानसभाओं के सदस्य, कांग्रेस के निचले सदन के सभी 513 सदस्य और देश की 81 सदस्यीय सीनेट में से 54 सदस्यों के लिए भी मतदान हुआ।
रविवार शाम पांच बजे मतदान केंद्र बंद हो गए। हालांकि, जो लोग उस समय कतार में थे, उन्हें वोट डालने की अनुमति दी गई। कुछ ही घंटों में वोटों की गिनती पूरी होने की उम्मीद थी।
ट्रंप के सामने खड़े होने का लूला को फायदा?
कभी बेहद लोकप्रिय रहे लूला के तीसरे कार्यकाल में उनकी लोकप्रियता और समर्थन में काफी गिरावट आई है। लेकिन अमेरिका के सामने मजबूती से खड़े होने से उन्हें फायदा मिला है। उनके पास अब भी समर्थकों का एक मजबूत आधार है। ये समर्थक मानते हैं कि उनकी सामाजिक नीतियों से लाखों ब्राजीलियाई लोगों की जिंदगी बेहतर हुई है।
मौजूदा राष्ट्रपति लूला ने ब्राजील के चुनाव में अमेरिकी दखल के खतरे की बात कई बार कही है। ट्रंप प्रशासन ने ब्राजील से होने वाले सामान के निर्यात पर भारी टैरिफ लगाया है। उसने ब्राजील के राजदूत का वीजा भी रद्द किया है।
अमेरिकी प्रशासन ने ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के एक जज पर भी प्रतिबंध लगाया है। यही जज जेर बोल्सोनारो की जांच की अध्यक्षता कर रहे थे। इसी जांच के बाद बोल्सोनारो को सजा सुनाई गई।
रविवार को मतदान करने के बाद लूला ने पत्रकारों से कहा कि दोबारा चुने जाने पर उन्हें 'हमने जो किया है, उसका दोगुना करना होगा'। उन्होंने पहले दौर में ही जीत हासिल करने का भरोसा भी जताया।
लेकिन लूला के सामने कड़ी चुनौती है। देश में लोगों के लिए चीजें खरीदना महंगा हो रहा है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार का एक मामला भी सामने आया है। इसमें वही जज घिरे हैं, जिन्होंने जेर बोल्सोनारो के खिलाफ जांच का नेतृत्व किया था।
साओ पाउलो की इंस्पर यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कार्लोस मेलो ने कहा, कुछ हफ्ते पहले लूला के अभियान से जुड़े कई लोगों को इतनी मुश्किल चुनावी स्थिति की उम्मीद नहीं थी। अब उनके लिए साफ है कि मौजूदा चुनाव एक कठिन लड़ाई है। लूला के बिना होने वाले अगले चुनाव इससे भी ज्यादा मुश्किल हो सकते हैं।
बोल्सोनारो ने ट्रंप से दोस्ती को बनाया मुद्दा
फ्लावियो बोल्सोनारो ने व्हाइट हाउस से अपनी नजदीकी को चुनाव में जोर-शोर से पेश किया है। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि उनके चुनाव अभियान को अमेरिकी सरकार से कोई मदद मिली है।
उन्होंने ब्राजील के आपराधिक गिरोहों पर सख्त कार्रवाई करने का वादा किया है। उनका कहना है कि ब्राजील को ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर समझौते करने की जरूरत है। इसमें दुर्लभ खनिजों का कारोबार भी शामिल है। इस क्षेत्र में चीन के बाद ब्राजील दूसरे स्थान पर है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका ने आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से हटाए सभी बमवर्षक: क्यों उठाया यह कदम; ट्रंप ने ईरान पर अब क्या कहा?
बोल्सोनारो ने अपने पिता को जेल से रिहा कराने और उन्हें फिर से राजनीति में लाने का भी चुनावी वादा किया है। रविवार को रियो डी जेनेरियो के मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, ब्राजील को बदलाव की जरूरत है। ब्राजील इतना ज्यादा दुख नहीं झेल सकता।
हालांकि, सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के सामने अपनी भी मुश्किलें हैं। भ्रष्टाचार के कई आरोपों के कारण उनका राजनीतिक करियर प्रभावित हुआ है। इनमें एक बदनाम बैंकर से कथित तौर पर लाखों डॉलर लेने का आरोप भी शामिल है। आरोप है कि ये पैसे उनके पिता की जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए लिए गए थे।
मतदाताओं के सामने लूला या दक्षिणपंथ की वापसी?
67 वर्षीय रोजाने विंक रिटायर्ड इंजीनियर हैं। वह लंबे समय से रूढ़िवादी विचारों वाली मतदाता रही हैं। वह बोल्सोनारो का समर्थन करती हैं। वह आपराधिक गिरोहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने के उनके वादे के समर्थन में हैं।
रियो डी जेनेरियो में वोट डालते समय विंक ने कहा, वे हमारे साथ जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, वह एक तरह का आतंकवाद है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने एक अपराधी ने उनके पेट पर बंदूक तान दी थी। उसने उनका हाथ काटा और उनकी शादी की अंगूठी उतार ली थी।
ब्रासीलिया की 50 वर्षीय मोबाइल फोन विक्रेता मारिया रिबेरो ने कहा कि उन्होंने बोल्सोनारो के लिए वोट दिया है। वह अपनी ईसाई धर्म की धार्मिक मान्यताओं को खुलकर व्यक्त करने की आजादी चाहती हैं। उन्हें उम्मीद है कि फ्लावियो अपने पिता के रास्ते पर चलेंगे। उन्होंने कहा, मैंने उनके पिता को वोट दिया था और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है।