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विज्ञानमति माता जी ससंघ की पिच्छी परिवर्तन समारोह
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वर्षा योग हमारे जीवन में लाती है नई चेतना
खतौली। होली चौक स्थित उत्सव पांडाल में श्रद्धालुओं ने धर्म के जयघोष के साथ विज्ञानमति माता जी का पिच्छी परिवर्तन समारोह मांगलिक क्रियाओं के साथ अमित भैया व धीरज शास्त्री के मार्गदर्शन में कराया गया। इस पावन अवसर पर सिद्धचक्र महामंडल विधान की आठवें दिन की विशेष पूजा अर्चना की गई।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में विज्ञानमति माताजी ससंघ ने बताया कि संयम का पाठ सिखाने वाला पिच्छि परिवर्तन समारोह है। दिगंबर साधु वर्षा ऋतु के समय एक स्थान पर रहकर जहां आत्म साधना करते हैं। वहीं पर श्रावकों को भी आत्म साधना करने की प्रेरणा देते हैं। वर्षा योग हमारे जीवन में नई चेतना लाती है। दिगंबर साधु की पहचान पिच्छी कमंडल से होती है। पिच्छी के पंख बहुत मुलायम होते हैं। आप सभी अपने जीवन को मृदुतायुक्त बनाएं। संयम व दया का यह उपकरण उन्हीं को लेने व देने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो अपने जीवन में कुछ संकल्प व नियम लेते हैं। देव, शास्त्र, गुरु एवं संस्कृति के प्रति समर्पित होकर अपनी श्रद्धा और आस्था मजबूत बनाए रखें। विधान सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य सुशील अपार जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मनोज आढ़ती, मुनेश, हरिश्चंद्र, संजय, कल्पेंद्र, अकलंक, सुनील, विवेक प्रवक्ता, डीके जैन प्रवक्ता, आलोक, हितेश, संदीप, प्रिंस, राजेंद्र, डा. आशा, सुनीता, रजनी, ममता, रीमा, माया, पिंकी, रीता, अनीता, अन्नू, सोनिया, वंदना, रुचि, निधि, ममता, मीनू, सुधा, सुषमा, शैली, बबीता, शोभा, नीरज जैन प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे।
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खतौली। होली चौक स्थित उत्सव पांडाल में श्रद्धालुओं ने धर्म के जयघोष के साथ विज्ञानमति माता जी का पिच्छी परिवर्तन समारोह मांगलिक क्रियाओं के साथ अमित भैया व धीरज शास्त्री के मार्गदर्शन में कराया गया। इस पावन अवसर पर सिद्धचक्र महामंडल विधान की आठवें दिन की विशेष पूजा अर्चना की गई।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में विज्ञानमति माताजी ससंघ ने बताया कि संयम का पाठ सिखाने वाला पिच्छि परिवर्तन समारोह है। दिगंबर साधु वर्षा ऋतु के समय एक स्थान पर रहकर जहां आत्म साधना करते हैं। वहीं पर श्रावकों को भी आत्म साधना करने की प्रेरणा देते हैं। वर्षा योग हमारे जीवन में नई चेतना लाती है। दिगंबर साधु की पहचान पिच्छी कमंडल से होती है। पिच्छी के पंख बहुत मुलायम होते हैं। आप सभी अपने जीवन को मृदुतायुक्त बनाएं। संयम व दया का यह उपकरण उन्हीं को लेने व देने का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो अपने जीवन में कुछ संकल्प व नियम लेते हैं। देव, शास्त्र, गुरु एवं संस्कृति के प्रति समर्पित होकर अपनी श्रद्धा और आस्था मजबूत बनाए रखें। विधान सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य सुशील अपार जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मनोज आढ़ती, मुनेश, हरिश्चंद्र, संजय, कल्पेंद्र, अकलंक, सुनील, विवेक प्रवक्ता, डीके जैन प्रवक्ता, आलोक, हितेश, संदीप, प्रिंस, राजेंद्र, डा. आशा, सुनीता, रजनी, ममता, रीमा, माया, पिंकी, रीता, अनीता, अन्नू, सोनिया, वंदना, रुचि, निधि, ममता, मीनू, सुधा, सुषमा, शैली, बबीता, शोभा, नीरज जैन प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे।
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