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‘जब नारी में शक्ति सारी, फिर क्यों कहें उसे बेचारी’
Sat, 23 Feb 2019 12:17 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Sat, 23 Feb 2019 12:17 AM IST
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अपराजिता कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यक्रम प्रस्तुत करते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला की अनूठी मुहिम अपराजिता के तहत शारदेन स्कूल में नारी सशक्तिकरण की अलख जगाई गई। छात्राओं ने नाटिका के माध्यम से बेटियों की शिक्षा पर जोर दिया। शिक्षिकाओं ने देश और दुनिया में नाम रोशन करने वाली महिलाओं का उदाहरण देकर छात्राओं को आगे बढ़ने प्रेरणा दी। कविता पाठ, भाषण, पोस्टर के जरिए अशिक्षा, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या आदि कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई।
शुभारंभ स्कूल के डायरेक्टर विश्व रत्न तथा प्रधानाचार्या धारा रत्न ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्रा वर्णिका सिंह एवं खुशी राघव ने जयशंकर प्रसाद रचित कामायनी की पंक्ति ‘नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास-रजत-नग पगतल में। पीयूष स्रोत-सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।’ से की। शिक्षिका अल्पना सेठ के पूछने पर छात्रा आराध्या, जैनब खान, आस्था जैन, नाजिया रानी, साईना बागा, जोया, ऋतिका मलिक, प्रियांशी बंसल, हरप्रीत कौर, अनुष्का जैन, जिया जयश्री ने साइना नेहवाल, बछेंद्री पाल, कल्पना चावला, मैरी कॉम, इंदिरा गांधी, सानिया मिर्जा आदि को अपना आइडियल बताया।
अनमता, रमनप्रीत, इकरा, ऋद्धि, आरव, अब्दुल्ला, स्नेहा, अनुष्का, अंशिका, निकिता, तमन्ना, मुस्कान, वंश, आरव और अब्दुल्ला ने पढ़े बेटियां, बढ़े बेटियां नाटक प्रस्तुत किया। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जो अपनी बेटी निक्की को पढ़ाने के बजाए घरेलू कार्यों में लगाए रखता था। बाद में निक्की पढ़-लिखकर प्रशासनिक अधिकारी बनती है और उसका परिवार और समाज अपनी सोच पर पछतावा करता है।
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छात्राओं ने पोस्टर से दिया आगे बढ़ने का संदेश
छात्राओं ने नारी सशक्तिकरण पर अनेक पोस्टर एवं स्लोगन प्रदर्शित किए। नारी सशक्तिकरण: देश के विकास का रास्ता, बेटियों को पढ़ाओ वे दुनिया बदल देंगी, महिलाओं के प्रति हिंसा रोको आदि स्लोगनों से बेटियों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। कन्या भ्रूण हत्या रोको, दहेज प्रथा बंद करने तथा अशिक्षा खत्म करने का आह्वान किया।
इशिता त्यागी ने अपने भाषण में ऐसे अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए जिनमें बेटियों ने समाज का सिर गर्व से ऊंचा किया। अंबिका कुच्छल ने ‘तोड़ के पिंजरा उड़ जाऊंगी मैं, लाख लगा दो बंदिशें फिर भी आगे बढ़ जाऊंगी मैं’ कविता का पाठ कर नारी को दुर्गा स्वरूप बताया। शिक्षिका किंशुक गर्ग, प्रियंका जैन, कल्पना कौशिक, अर्निका अग्रवाल, रूबी वर्मा, ऋतु देशवाल, आस्था सिंघल, नीलू सिंह ने भी नारी सशक्तिकरण पर विचार रखे।
नारी गरिमा के लिए भरे शपथ पत्र
शिक्षिकाओं एवं छात्राओं ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने को शपथ पत्र भरे। नारी गरिमा के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से काम करने का संकल्प लिया।
- छात्राएं अपने माता-पिता को धन्यवाद दें कि वे बेटों की तरह बेटियों को भी शिक्षा दिला रहे हैं। पड़ोसियों को भी समझाएं कि बेटियों की शिक्षा में भेदभाव न करें। उन्हें भी वह सब दें जो बेटों को देते हैं। - विश्व रत्न, डायरेक्टर, शारदेन पब्लिक स्कूल।
बेटियों की असीमित आकांक्षाएं हैं तो अनंत आकाश भी है। खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ लक्ष्यों को पाएं। इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा है, जिनमें महिलाओं ने कल्पनाओं को साकार किया है। - धारा रत्न, प्रधानाचार्या, शारदेन पब्लिक स्कूल।
अपराजिता के तहत हुआ कार्यक्रम प्रेरणाप्रद है। शिक्षा से ही बेटियां आगे बढ़ सकती हैं। इसलिए हर माता-पिता अपनी बेटियों को शिक्षा जरूर दिलाएं। - वर्तिका सारस्वत, छात्रा।
बेटियां कमजोर नहीं होती, बल्कि समाज में उन्हें कमजोर आंका जाता है। जब मौका मिलता है तो वे सफलता के परचम लहराती हैं। - स्नेहा शर्मा, छात्रा।
परिवार और समाज को बेटी और बेटों में अंतर नहीं करना चाहिए। भेदभाव बेटियों की राह की सबसे बड़ी अड़चन होता है। - जिया, छात्रा।
आगे बढ़ने के लिए आत्म विश्वास की बेहद आवश्यकता होती है। इसलिए हर लड़की को स्वयं को सर्वोपरि मानकर आगे बढ़ना चाहिए। - दृष्टि भल्ला, छात्रा।
धैर्य, बलिदान की भावना और आत्मविश्वास हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कितनी भी परेशानी हो खुद पर भरोसा रखकर आगे बढ़ना चाहिए। - श्रेया शर्मा, छात्रा।
अमर उजाला का प्रयास सराहनीय है। इस तरह के कार्यक्रमों से ऊर्जा का संचार होता है। आत्मविश्वास की भावना बढ़ती है। - खुशी राघव, छात्रा।
एक पुरुष को शिक्षा दी जाती है तो केवल वही शिक्षित होता है, लेकिन एक बेटी को शिक्षा दी जाए तो पूरी एक पीढ़ी शिक्षित होगी। - वर्णिका सिंह, छात्रा।
भय को खुद पर हावी न होने दें। दृढ़ इच्छाशक्ति और सतत प्रयास के दम पर आगे बढ़ती जाएं तो निश्चित रूप से सफलता हासिल होगी। - गुनीत, छात्रा।
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शुभारंभ स्कूल के डायरेक्टर विश्व रत्न तथा प्रधानाचार्या धारा रत्न ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्रा वर्णिका सिंह एवं खुशी राघव ने जयशंकर प्रसाद रचित कामायनी की पंक्ति ‘नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास-रजत-नग पगतल में। पीयूष स्रोत-सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।’ से की। शिक्षिका अल्पना सेठ के पूछने पर छात्रा आराध्या, जैनब खान, आस्था जैन, नाजिया रानी, साईना बागा, जोया, ऋतिका मलिक, प्रियांशी बंसल, हरप्रीत कौर, अनुष्का जैन, जिया जयश्री ने साइना नेहवाल, बछेंद्री पाल, कल्पना चावला, मैरी कॉम, इंदिरा गांधी, सानिया मिर्जा आदि को अपना आइडियल बताया।
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अनमता, रमनप्रीत, इकरा, ऋद्धि, आरव, अब्दुल्ला, स्नेहा, अनुष्का, अंशिका, निकिता, तमन्ना, मुस्कान, वंश, आरव और अब्दुल्ला ने पढ़े बेटियां, बढ़े बेटियां नाटक प्रस्तुत किया। यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जो अपनी बेटी निक्की को पढ़ाने के बजाए घरेलू कार्यों में लगाए रखता था। बाद में निक्की पढ़-लिखकर प्रशासनिक अधिकारी बनती है और उसका परिवार और समाज अपनी सोच पर पछतावा करता है।
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छात्राओं ने पोस्टर से दिया आगे बढ़ने का संदेश
छात्राओं ने नारी सशक्तिकरण पर अनेक पोस्टर एवं स्लोगन प्रदर्शित किए। नारी सशक्तिकरण: देश के विकास का रास्ता, बेटियों को पढ़ाओ वे दुनिया बदल देंगी, महिलाओं के प्रति हिंसा रोको आदि स्लोगनों से बेटियों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। कन्या भ्रूण हत्या रोको, दहेज प्रथा बंद करने तथा अशिक्षा खत्म करने का आह्वान किया।
इशिता त्यागी ने अपने भाषण में ऐसे अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए जिनमें बेटियों ने समाज का सिर गर्व से ऊंचा किया। अंबिका कुच्छल ने ‘तोड़ के पिंजरा उड़ जाऊंगी मैं, लाख लगा दो बंदिशें फिर भी आगे बढ़ जाऊंगी मैं’ कविता का पाठ कर नारी को दुर्गा स्वरूप बताया। शिक्षिका किंशुक गर्ग, प्रियंका जैन, कल्पना कौशिक, अर्निका अग्रवाल, रूबी वर्मा, ऋतु देशवाल, आस्था सिंघल, नीलू सिंह ने भी नारी सशक्तिकरण पर विचार रखे।
नारी गरिमा के लिए भरे शपथ पत्र
शिक्षिकाओं एवं छात्राओं ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने को शपथ पत्र भरे। नारी गरिमा के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से काम करने का संकल्प लिया।
- छात्राएं अपने माता-पिता को धन्यवाद दें कि वे बेटों की तरह बेटियों को भी शिक्षा दिला रहे हैं। पड़ोसियों को भी समझाएं कि बेटियों की शिक्षा में भेदभाव न करें। उन्हें भी वह सब दें जो बेटों को देते हैं। - विश्व रत्न, डायरेक्टर, शारदेन पब्लिक स्कूल।
बेटियों की असीमित आकांक्षाएं हैं तो अनंत आकाश भी है। खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ लक्ष्यों को पाएं। इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा है, जिनमें महिलाओं ने कल्पनाओं को साकार किया है। - धारा रत्न, प्रधानाचार्या, शारदेन पब्लिक स्कूल।
अपराजिता के तहत हुआ कार्यक्रम प्रेरणाप्रद है। शिक्षा से ही बेटियां आगे बढ़ सकती हैं। इसलिए हर माता-पिता अपनी बेटियों को शिक्षा जरूर दिलाएं। - वर्तिका सारस्वत, छात्रा।
बेटियां कमजोर नहीं होती, बल्कि समाज में उन्हें कमजोर आंका जाता है। जब मौका मिलता है तो वे सफलता के परचम लहराती हैं। - स्नेहा शर्मा, छात्रा।
परिवार और समाज को बेटी और बेटों में अंतर नहीं करना चाहिए। भेदभाव बेटियों की राह की सबसे बड़ी अड़चन होता है। - जिया, छात्रा।
आगे बढ़ने के लिए आत्म विश्वास की बेहद आवश्यकता होती है। इसलिए हर लड़की को स्वयं को सर्वोपरि मानकर आगे बढ़ना चाहिए। - दृष्टि भल्ला, छात्रा।
धैर्य, बलिदान की भावना और आत्मविश्वास हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कितनी भी परेशानी हो खुद पर भरोसा रखकर आगे बढ़ना चाहिए। - श्रेया शर्मा, छात्रा।
अमर उजाला का प्रयास सराहनीय है। इस तरह के कार्यक्रमों से ऊर्जा का संचार होता है। आत्मविश्वास की भावना बढ़ती है। - खुशी राघव, छात्रा।
एक पुरुष को शिक्षा दी जाती है तो केवल वही शिक्षित होता है, लेकिन एक बेटी को शिक्षा दी जाए तो पूरी एक पीढ़ी शिक्षित होगी। - वर्णिका सिंह, छात्रा।
भय को खुद पर हावी न होने दें। दृढ़ इच्छाशक्ति और सतत प्रयास के दम पर आगे बढ़ती जाएं तो निश्चित रूप से सफलता हासिल होगी। - गुनीत, छात्रा।