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पशु-पक्षियों की सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले अनिल नहीं रहे

Fri, 18 Nov 2022 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2022 11:51 PM IST
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Anil, who devoted his life to the service of animals and birds, is no more
पप्पू कंसल (अनिल) फाइल फोटो - फोटो : MUZAFFARNAGAR
सुबह की पहली किरण के साथ साइकिल पर निकल पड़ते थे पशु-पक्षियों की सेवा के लिए
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कुत्ते, बंदर, गाय, सांड़ और कौवे आदि को ब्रेड, गुड़, चना, केले, फल और रोटी खिलाते थे रोजाना
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। इंसान कपड़े और वेशभूषा से संत हो यह जरूरी नहीं, व्यक्ति का समर्पण, स्वभाव और आचरण उसे संतत्व की ओर लेकर जाता है। समाज में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो चकाचौंध लोक दिखावे से दूर अपने सद्कर्मों में लगे रहते है। चरथावल कस्बे में दवा व्यवसायी पप्पू कंसल (अनिल) अब हमारे बीच नहीं रहे हो, पर उनकी खूबियां सदैव दिलों में रहेंगी।
12 नवंबर को इस दुनिया को अलविदा कहने वाले पप्पू कंसल अपना जीवन निराश्रित पशु और पक्षियों को समर्पित कर दिया था। सुबह की पहली किरण के साथ ही वे अपनी पुरानी साइकिल के साथ निकल पड़ते थे। साइकिल पर दोनों तरफ लटके बड़े थैले लटके होते थे। उनमें ब्रेड, गुड़, चना, केले, फल और रोटी आदि सामान भरा होता था। वो घर से निकलते तो मानो कस्बे के गली-मोहल्लों के कुत्ते, बंदर, गाय, सांड़ और कौवे आदि उनकी प्रतीक्षा में रहते थे। पक्षी उनके हाथ से खाना खाते तो बंदर जैसी उद्दंड प्रजाति मानो उनके सामने अनुशासित हो जाती। सबको उनके आने का समय पता रहता। प्रतिदिन नित्य शिवालय जाना उनका नित्य कर्म था।
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रोज पशुओं को नाम से बुलाकर डांटना और दुलारना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहती। कुछ लोग तो पशुओं से उनके प्रेम को पागलपन समझते थे। आज बेजुबान पशु और पक्षी बेशक मसीहा, समाजसेवी जैसे शब्द नहीं बोल सकते पर वो जानते थे कि वह उनके लिए क्या थे। उन्होंने नियमित साधना को कभी प्रचारित नहीं किया, न ही कभी चाहा।
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कहां चला गया पप्पू, बंदर हो गए व्याकुल
पप्पू कंसल की विदाई से कस्बे के अग्रवाल धर्मशाला के ऊपर बंदरों का झुंड परेशान है। उनकी समझ नहीं आ रहा आखिर रोजाना सुबह गुड़, चना और केले देने वाला कहां चला गया? लगता है उनके भाग्य में सिर्फ प्रतीक्षा बची है।
समाज के लिए प्रेरक रहेगी पप्पू की सादगी
पूर्व चेयरमैन सुधीर सिंघल कहते है कि पप्पू की धर्म परायणता और पशुओं के प्रति अगाथ प्रेम की कोई सानी नहीं है। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरक है। एक बार अपने कार्यकाल में कस्बे से बंदरों की पकड़वाने का प्रयास किया तो पप्पू ने विरोध किया था।

प्रयास करेंगे, पर पिता तुल्य नहीं कर पाएंगे सेवा
मृतक के पुत्र निखिल ने बताया पिता की मृत्यु के बाद बंदरों को सुबह नित प्रति केले आदि खाद्य सामग्री दे रहे है। मगर, पिता की तरह हर गली मोहल्लों में जाकर पिता की भांति सेवा कार्य शायद ही हो पाए। उनके परिवार में मयंक, दर्पण आदि कहते है ताऊ जी पद्चिह्ननों पर चलकर पशु पक्षियों का ख्याल रखने का प्रयास करेंगे।
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