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संभलिए, जहरीली हुई शहर की आबोहवा, तैर रहे प्रदूषण के सूक्ष्म पार्टिकुलेट मैटर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 09 Nov 2017 12:15 AM IST
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मंगलवार रात भीषण कोहरे के बीच शहर का शिव चौक।
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार से बिगड़ी मौसम की चाल बुधवार तक भी संभल नहीं सकी है। दिनभर धुंध छाए रहने से ठंड बढ़ गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में भी आबोहवा में जहरीले सूक्ष्म पार्टिकुलेट मैटर सामने आए हैं। जो सांस के रास्ते शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। डस्ट (धूल) के सूक्ष्म कण हवा में तैर रहे हैं, जो तापमान गिरने के कारण जमीन पर नहीं बैठ पा रहे हैं। कोहरे और धुंध बढ़ने के पीछे का कारण हरियाणा-पंजाब में पराली जलाया जाना माना गया है, जिसके प्रभाव से कोहरा छटने का नाम नहीं ले रहा है।
सोमवार, मंगलवार की सुबह और शाम को धुंध (स्मॉग) और कोहरा छाए रहने से रेल-सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम की बिगड़ी चाल से बुधवार को भी परेशानियां रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रेलवे रोड पर कार्यालय पर एंबाइंड मशीन लगाई है। इस मशीन के माध्यम से शहर की आबोहवा की शुद्धता की जांच की जा रही है। तीन दिनों में मशीन के माध्यम से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अचानक बढ़े कोहरे के पीछे हरियाणा, पंजाब क्षेत्रों में जलाई की पराली को माना है। तापमान गिरने से प्रदूषण के कण नष्ट होने के बजाए जमीन पर बैठ गए हैं। जिससे स्मॉग का खतरा अधिक बढ़ गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के परीक्षण में शहर की आबोहवा में प्रदूषण के सूक्ष्म कण मिले हैं, जो सांस रोगियों के साथ आम नागरिकों के लिए भी खतरे से खाली नहीं है।
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पार्टिकुलेट मैटर-10 माइक्रोन (पीएम-10) तथा 2.5 माइक्रोन का टेस्ट किया गया है। शहर में एक मीटर क्यूब पर पीएम-10 माइक्रोन की स्थिति 148 से 160 माइक्रोन ग्राम निकला है, जबकि 2.5 माइक्रोन की स्थिति प्रति मीटर क्यूब मिला है। जबकि यह पीएम-10 में 100 माइक्रोन ग्राम तथा 2.5 माइक्रोन में 60 तक सही माना गया है। हालांकि एनसीआर के मुकाबले शहर की हवा में जहरीलापन नहीं है। यह पार्टिकुलेट मैटर मोर्डेट पुअर श्रेणी में शामिल है।
अवर अभियंता विपुल कुमार ने बताया कि मौसम में अचानक से बदलाव के पीछे हरियाणा और पंजाब राज्य में जलाई गई पराली भी एक कारण है। तापमान गिरने के कारण ऊपर नहीं उठ रहा है, जिसके चलते यह स्मॉग के रूप में बढ़ रहा है।
सांस रोगियों का खतरा
मुजफ्फरनगर। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि सांस के रोगियों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक है। सांस लेने में तकलीफ तो होगी ही साथ में हवा में घूम रहे पार्टिकुलेट मैटर के सूक्ष्म कणों से दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। इससे बचने के लिए एंटी पॉल्युशन मास्क लगाने के साथ सांस के रोगियों को घर से कमतर ही बाहर निकलना लाभदायक रहेगा। वहीं, धुंध छाए रहने से एक ओर रेल और सड़क यातायात को खतरा है। कोहरा-धुंध छाने से हाईवे का सफर जानलेवा हो गया है, जबकि ट्रेनें भी घंटों की देरी से चल रही है।
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सोमवार, मंगलवार की सुबह और शाम को धुंध (स्मॉग) और कोहरा छाए रहने से रेल-सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम की बिगड़ी चाल से बुधवार को भी परेशानियां रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रेलवे रोड पर कार्यालय पर एंबाइंड मशीन लगाई है। इस मशीन के माध्यम से शहर की आबोहवा की शुद्धता की जांच की जा रही है। तीन दिनों में मशीन के माध्यम से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अचानक बढ़े कोहरे के पीछे हरियाणा, पंजाब क्षेत्रों में जलाई की पराली को माना है। तापमान गिरने से प्रदूषण के कण नष्ट होने के बजाए जमीन पर बैठ गए हैं। जिससे स्मॉग का खतरा अधिक बढ़ गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के परीक्षण में शहर की आबोहवा में प्रदूषण के सूक्ष्म कण मिले हैं, जो सांस रोगियों के साथ आम नागरिकों के लिए भी खतरे से खाली नहीं है।
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पार्टिकुलेट मैटर-10 माइक्रोन (पीएम-10) तथा 2.5 माइक्रोन का टेस्ट किया गया है। शहर में एक मीटर क्यूब पर पीएम-10 माइक्रोन की स्थिति 148 से 160 माइक्रोन ग्राम निकला है, जबकि 2.5 माइक्रोन की स्थिति प्रति मीटर क्यूब मिला है। जबकि यह पीएम-10 में 100 माइक्रोन ग्राम तथा 2.5 माइक्रोन में 60 तक सही माना गया है। हालांकि एनसीआर के मुकाबले शहर की हवा में जहरीलापन नहीं है। यह पार्टिकुलेट मैटर मोर्डेट पुअर श्रेणी में शामिल है।
अवर अभियंता विपुल कुमार ने बताया कि मौसम में अचानक से बदलाव के पीछे हरियाणा और पंजाब राज्य में जलाई गई पराली भी एक कारण है। तापमान गिरने के कारण ऊपर नहीं उठ रहा है, जिसके चलते यह स्मॉग के रूप में बढ़ रहा है।
सांस रोगियों का खतरा
मुजफ्फरनगर। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि सांस के रोगियों के लिए यह स्थिति अधिक खतरनाक है। सांस लेने में तकलीफ तो होगी ही साथ में हवा में घूम रहे पार्टिकुलेट मैटर के सूक्ष्म कणों से दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। इससे बचने के लिए एंटी पॉल्युशन मास्क लगाने के साथ सांस के रोगियों को घर से कमतर ही बाहर निकलना लाभदायक रहेगा। वहीं, धुंध छाए रहने से एक ओर रेल और सड़क यातायात को खतरा है। कोहरा-धुंध छाने से हाईवे का सफर जानलेवा हो गया है, जबकि ट्रेनें भी घंटों की देरी से चल रही है।