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सोलानी नदी की धार ने बढ़ाई बच्चों की मुश्किलें, नाव नहीं मिलने पर छोड़ा स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:21 AM IST
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बाढ़ के बीच स्कूल जाते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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पुरकाजी के खादर में अधिकांश गांव सोलानी नदी के आसपास बसे हैं। पहाड़ों पर बारिश होने के कारण गांवों में बाढ़ आ जाती है। बाढ़ के कारण लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। खादर क्षेत्र के करीब 20 गांवों के 29 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल खाली हो गए हैं। रास्तों में पानी भरने के कारण क्षेत्र के 1500 से अधिक बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
जलस्तर थोड़ा कम होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने क्षेत्र में सर्वे का कार्य प्रारंभ कराया है, ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ सके। पुरकाजी के खादर में अधिकांश गांव सोलानी नदी के आसपास बसे हैं। इन गांवों की आबादी हजारों में है। बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने दो-तीन और बड़े गांवों में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित कर रखे हैं। खादर में करीब 35 से अधिक विद्यालयों में 2000 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं।
पिछले पांच दिनों से दर्जनभर गांवों में सोनाली का कहर जारी है। मुख्य मार्गों के साथ गांवों के भीतर जलभराव है। यहां पर सोनाली की धार के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। खादर के लगभग 22 प्राथमिक और सात उच्च प्राथमिक विद्यालय बच्चों से खाली हो गए हैं। इनमें पढ़ने वाले करीब 1500 से अधिक बच्चे घरों में कैद हो गए हैं।
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नींद से जागे बेसिक शिक्षा विभाग ने सोमवार से गांवों का निरीक्षण करने के लिए टीम भेजी है, ताकि यहां प्रभावित बच्चों की संख्या जुटाई जा सके। उधर, बेसिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकेश सिंह यादव ने बताया कि खादर क्षेत्र में स्कूली बच्चे प्रभावित हो रहे हैं, ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। उसके बाद भी गांवों में टीम को भेजा गया है।
इन गांवों के बच्चे हो रहे प्रभावित
मुजफ्फरनगर। शेरपुर, बढ़ीवाला, चांकचक, चमरावाला, अलमावाला, जिंदावाला, धुमरापुरी, दाधूपुर, ददौला, ददौली, पांचली, खेड़की, आलमपुरा, रामनगर, रजगल्लापुर, शेरपुर नंगला, फरकपुर, मारकपुर, सौहेली, जबरपुरा आदि गांवों के स्कूली बच्चे प्रभावित हैं।
नाव नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
मुजफ्फरनगर। खादर क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बाद आवागमन का मुख्य साधन ग्रामीणों के लिए नाव है। गांवों में प्रशासन द्वारा नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे ग्रामीणों के साथ बच्चे भी परेशान हैं। स्कूलों में बच्चे नहीं आने से शिक्षकों ने भी फिलहाल स्कूलों में जाने से कदम पीछे खींच लिए हैं।
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जलस्तर थोड़ा कम होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने क्षेत्र में सर्वे का कार्य प्रारंभ कराया है, ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ सके। पुरकाजी के खादर में अधिकांश गांव सोलानी नदी के आसपास बसे हैं। इन गांवों की आबादी हजारों में है। बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने दो-तीन और बड़े गांवों में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित कर रखे हैं। खादर में करीब 35 से अधिक विद्यालयों में 2000 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं।
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पिछले पांच दिनों से दर्जनभर गांवों में सोनाली का कहर जारी है। मुख्य मार्गों के साथ गांवों के भीतर जलभराव है। यहां पर सोनाली की धार के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। खादर के लगभग 22 प्राथमिक और सात उच्च प्राथमिक विद्यालय बच्चों से खाली हो गए हैं। इनमें पढ़ने वाले करीब 1500 से अधिक बच्चे घरों में कैद हो गए हैं।
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नींद से जागे बेसिक शिक्षा विभाग ने सोमवार से गांवों का निरीक्षण करने के लिए टीम भेजी है, ताकि यहां प्रभावित बच्चों की संख्या जुटाई जा सके। उधर, बेसिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकेश सिंह यादव ने बताया कि खादर क्षेत्र में स्कूली बच्चे प्रभावित हो रहे हैं, ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। उसके बाद भी गांवों में टीम को भेजा गया है।
इन गांवों के बच्चे हो रहे प्रभावित
मुजफ्फरनगर। शेरपुर, बढ़ीवाला, चांकचक, चमरावाला, अलमावाला, जिंदावाला, धुमरापुरी, दाधूपुर, ददौला, ददौली, पांचली, खेड़की, आलमपुरा, रामनगर, रजगल्लापुर, शेरपुर नंगला, फरकपुर, मारकपुर, सौहेली, जबरपुरा आदि गांवों के स्कूली बच्चे प्रभावित हैं।
नाव नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
मुजफ्फरनगर। खादर क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बाद आवागमन का मुख्य साधन ग्रामीणों के लिए नाव है। गांवों में प्रशासन द्वारा नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे ग्रामीणों के साथ बच्चे भी परेशान हैं। स्कूलों में बच्चे नहीं आने से शिक्षकों ने भी फिलहाल स्कूलों में जाने से कदम पीछे खींच लिए हैं।