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Muzaffarnagar News: शपथपत्र से बदली मांडी की दास्तां... 16 साल, 10 गवाह और 330 तारीख

Tue, 07 Jul 2026 01:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:50 AM IST
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Affidavit changes the course of Mandi's story... 16 years, 10 witnesses, and 330 hearings.
मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव के राजबीर हत्याकांड में वादी प्रदीप की ओर से तत्कालीन एसएसपी को दिए गए शपथपत्र से पूरी कहानी बदल गई। पुलिस ने नए सिरे से जांच की। अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह और बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह अदालत में पेश किए गए। करीब 330 तारीखों के बाद इंसाफ की घड़ी आई और दोनों दोषियों को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई।
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मांडी में वारदात 24 अगस्त 2010 को हुई। वादी प्रदीप कुमार ने छह सितंबर 2010 को शपथ पत्र दिया कि वारदात से अगले ही दिन गांव के दो लोगों ने उसे बताया कि उन्होंने हत्या की वारदात देखी है। दोनों ने प्रमोद कुमार और सहदेव का नाम वारदात में लिया।
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यह भी कहा कि राजबीर बड़ा आदमी बनता है, इसे गांव का अगला प्रधान बना देते हैं। शपथ पत्र के बाद पुलिस ने नए सिरे से जांच की। अभियुक्त प्रमोद कुमार लंबे समय तक फरार रहा।
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एक गवाह ने यह बताई कहानी
मांडी के एक गवाह ने अदालत में बताया कि वह बघरा गया हुआ था। पांच जनवरी 2010 को उसके पास पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार आया और कहने लगा कि उनका फैसला करा दो। हमसे गलती हो गई है। अदालत ने इस बयान को भी महत्वपूर्ण माना है। यही नहीं यह भी कहा गया था कि अगर जेल जाना पड़ा तो फिर हत्याएं करूंगा।
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सहदेव के पिता की राजबीर से रही दोस्ती
अभियुक्त सहदेव से पुलिस ने 14 सितंबर 2010 को पूछताछ की। सहदेव ने बताया कि उसके पिता हरवीर सिंह और राजबीर सिंह बचपन के दोस्त रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि राजबीर के दूसरे बेटे विपिन कुमार ने सहदेव के साथ मारपीट की थी, इसे भी रंजिश की वजह माना गया।

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भाड़े के हत्यारे...बरामद हुए थे हथगोले
राजबीर हत्याकांड में आरोपी मुठभेड़ में मारे गए अमित और विपिन शर्मा उर्फ पप्पन शर्मा के खिलाफ 12-12 प्राथमिकी दर्ज थी। अमित पर हत्या की पांच और विपिन पर तीन प्राथमिकी थी। धन कमाने के लिए भाड़े पर हत्याएं करते थे। पुलिस ने दोनों के कब्जे से सेना के हैंड ग्रेनेड, तीन हथगोले और अंग्रेजी पिस्टल बरामद किए थे। दोनों को बरवाला के अलावा जोनी तितावी के गैंग का सदस्य माना जाता था।
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