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बगैर लाइसेंस ड्राइविंग करने वालों पर कार्रवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 24 Jun 2017 12:45 AM IST
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Driving
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मुजफ्फरनगर। बिना वाहन लाइसेंस के विद्यार्थी स्कूटी, बाइक नहीं चला सकेंगे। एआरटीओ ने स्कूलों से वाहनों के साथ वाहन का प्रयोग करने वाले विद्यार्थियों के बारे में भी जानकारी मांगी है। नए सत्र में यातायात के नियमों, वाहन एक्ट का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
जिले में करीब छोटे-बड़े स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए लगभग 200 वाहन लगे हैं। इनमें मिनी बसें, वैन और टाटा मैजिक अधिक शामिल हैं। एनजीटी के साफ आदेश है कि प्रदूषण की मात्रा कम करने के लिए अधिक उम्र के वाहनों का संचालन रोका जाए। इसको लेकर एआरटीओ को जिम्मेदारी दी गई है। एआरटीओ और उसकी सहयोगी टीम स्कूल में जाकर वाहनों की फिटनेस, चालक का लाइसेंस समेत कई बिंदुओं पर जानकारी लेगी। इसको लेकर पहले एआरटीओ ने स्कूलों से वाहनों का ब्यौरा तलब किया है।
हालांकि विभाग के पास जो डाटा है, उसके आधार पर भी कार्रवाई की जा रही है। वहीं, मनमाफिक रूप से वाहन चलाने वाले विद्यार्थियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट समेत डिग्री कॉलेजों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें छात्राएं स्कूटी और छात्र बाइकों पर फर्राटा भरते हैं। प्रथम जांच में जिले में 80 फीसदी छात्र-छात्राओं के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिले हैं। इस पर एआरटीओ ने नाराजगी जाहिर की है। वहीं, 75 फीसदी छात्र-छात्राओं को यातायात के निमयों की भी जानकारी नहीं है। ऐसे में अज्ञानता के कारण दुर्घटना का खतरा अधिक बढ़ गया है।
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नए सत्र में इन व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए एआरटीओ ने कमर कस ली है। वाहन चलाने वाले विद्यार्थियों की स्कूलवार संख्या मांगी गई है। लाइसेंस न मिलने पर अभिभावकों के साथ स्कूल प्रशासन भी जिम्मेदार होगा। छात्र-छात्राओं को समझाने और यातायात के नियमों की जानकारी देने के लिए विभाग स्कूलों में अभिभावकों की मौजूदगी में कार्यशाला करेगा। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि नए सत्र में स्कूलों के वाहनों की जांच-पड़ताल होगी। विद्यार्थियों के लाइसेंस बनाए जाने का अभियान चलाने के साथी ही उन्हें यातायात के नियमों की जानकारी दी जाएगी।
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जिले में करीब छोटे-बड़े स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए लगभग 200 वाहन लगे हैं। इनमें मिनी बसें, वैन और टाटा मैजिक अधिक शामिल हैं। एनजीटी के साफ आदेश है कि प्रदूषण की मात्रा कम करने के लिए अधिक उम्र के वाहनों का संचालन रोका जाए। इसको लेकर एआरटीओ को जिम्मेदारी दी गई है। एआरटीओ और उसकी सहयोगी टीम स्कूल में जाकर वाहनों की फिटनेस, चालक का लाइसेंस समेत कई बिंदुओं पर जानकारी लेगी। इसको लेकर पहले एआरटीओ ने स्कूलों से वाहनों का ब्यौरा तलब किया है।
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हालांकि विभाग के पास जो डाटा है, उसके आधार पर भी कार्रवाई की जा रही है। वहीं, मनमाफिक रूप से वाहन चलाने वाले विद्यार्थियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट समेत डिग्री कॉलेजों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें छात्राएं स्कूटी और छात्र बाइकों पर फर्राटा भरते हैं। प्रथम जांच में जिले में 80 फीसदी छात्र-छात्राओं के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिले हैं। इस पर एआरटीओ ने नाराजगी जाहिर की है। वहीं, 75 फीसदी छात्र-छात्राओं को यातायात के निमयों की भी जानकारी नहीं है। ऐसे में अज्ञानता के कारण दुर्घटना का खतरा अधिक बढ़ गया है।
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नए सत्र में इन व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए एआरटीओ ने कमर कस ली है। वाहन चलाने वाले विद्यार्थियों की स्कूलवार संख्या मांगी गई है। लाइसेंस न मिलने पर अभिभावकों के साथ स्कूल प्रशासन भी जिम्मेदार होगा। छात्र-छात्राओं को समझाने और यातायात के नियमों की जानकारी देने के लिए विभाग स्कूलों में अभिभावकों की मौजूदगी में कार्यशाला करेगा। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि नए सत्र में स्कूलों के वाहनों की जांच-पड़ताल होगी। विद्यार्थियों के लाइसेंस बनाए जाने का अभियान चलाने के साथी ही उन्हें यातायात के नियमों की जानकारी दी जाएगी।