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बिना नियुक्ति बनाया लेखाकार
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:27 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। सरकारी महकमे में अफसरों के खेल निराले हैं। दैनिक वेतन पर रखे गए एक व्यक्ति को ही लेखाकार बना दिया गया। हैरत की बात यह है कि मैट के पद पर कार्यरत भुवाल सिंह की एमडीए के अभियंत्रण कक्ष में लिपिक पद की नेम प्लेट भी लगी है और अलग से कक्ष आवंटित किया गया है। वे एमडीए से जुड़ी वित्तीय फाइलें भी देखते हैं।
एमडीए में एक नये फर्जीवाडे़ का खुलासा हुआ है। अफसरों ने अपने खेले को अंजाम देने के लिए डेलीवेजिज पर नौकरी कर रहे भुवाल सिंह को लेखा विभाग का जिम्मा सौंप दिया। 21 साल पहले चतुर्थ श्रेणी वर्ग में मेंट के पद पर उन्हें दैनिक वेतन भोगी रखा गया था।
विभागीय कृपा की बदौलत धीरे-धीरे मैट ने एमडीए में अपनी दखल बढ़ा दी। पहले लिपिक का काम देखा और फिर सहायक लेखाकार बन गए। एमडीए में अंदरूनी तौर पर यह धींगामस्ती चलती रही, मगर शासन स्तर से आज तक उनकी कोई नियुक्ति नहीं हुई है। विभाग द्वारा उनके पास कोई नियुक्ति पत्र भी नहीं है। उसकी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट और डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल है। आखिर कैसे जेई के पद की योग्यता के भुवाल को एमडीए ने पहले मैट रखा और फिर वाणिज्य से जुड़ा वित्तीय काम सौंप दिया। एकाउंट की उनके पास कोई विधिक योग्यता नहीं है।
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फिलहाल एमडीए के वीसी का जिम्मा डीएम राजीव शर्मा पर है। मेरठ रोड स्थित मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के कार्यालय में अभियंत्रण कक्ष में फर्जी लेखाकार बने भुवाल सिंह का अलग कक्ष है और उनकी नेम प्लेट भी लगी है। एमडीए से जुडे़ बैंकों के खातों का लेनदेन, निर्माण कार्यों का भुगतान, क्रय-विक्रय की पत्रावलियां और ठेका कार्यों से जुड़ी एजेंसियों का भुगतान लेखाकार भुवाल सिंह की टेबिल से गुजरता है। मामले के खुलासे पर लेखाकार भुवाल सिंह का कहना है कि वर्ष 1997 में उन्हें दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रुप में मैट के पद पर रखा गया था। फिलहाल एमडीए ने उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप उनकी जेई के पद पर नियुक्ति की फाइल शासन को भेजी है। एमडीए वीसी के अधिकार में है, वह हमसे कोई भी काम ले सकते हैं।
एमडीए ने जारी नहीं किया नियुक्ति पत्र
मैट के लेखाकार बनने का सच आरटीआई के तहत सामने आया। किसान मजदूर संगठन के विकास बालियान ने 18 मई को एमडीए के सूचना अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता से छह बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। एमडीए ने स्पष्ट किया है कि भुवाल सिंह को एमडीए द्वारा कोई नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया है। वह दैनिक वेतन कर्मचारी हैं। वर्तमान में लेखा अनुभाग में कार्यरत हैं।
वीसी के आदेश के अनुपालन में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी भुवाल सिंह को लेखा विभाग में भेजा गया था। उनके पास एमडीए का कोई नियुक्ति पत्र नहीं है, इसकी जानकारी मिली है। उन्हें उनके मूल पद पर भेजा जाएगा।
- राजवीर सिंह मावी, सचिव एमडीए।
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एमडीए में एक नये फर्जीवाडे़ का खुलासा हुआ है। अफसरों ने अपने खेले को अंजाम देने के लिए डेलीवेजिज पर नौकरी कर रहे भुवाल सिंह को लेखा विभाग का जिम्मा सौंप दिया। 21 साल पहले चतुर्थ श्रेणी वर्ग में मेंट के पद पर उन्हें दैनिक वेतन भोगी रखा गया था।
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विभागीय कृपा की बदौलत धीरे-धीरे मैट ने एमडीए में अपनी दखल बढ़ा दी। पहले लिपिक का काम देखा और फिर सहायक लेखाकार बन गए। एमडीए में अंदरूनी तौर पर यह धींगामस्ती चलती रही, मगर शासन स्तर से आज तक उनकी कोई नियुक्ति नहीं हुई है। विभाग द्वारा उनके पास कोई नियुक्ति पत्र भी नहीं है। उसकी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट और डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल है। आखिर कैसे जेई के पद की योग्यता के भुवाल को एमडीए ने पहले मैट रखा और फिर वाणिज्य से जुड़ा वित्तीय काम सौंप दिया। एकाउंट की उनके पास कोई विधिक योग्यता नहीं है।
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फिलहाल एमडीए के वीसी का जिम्मा डीएम राजीव शर्मा पर है। मेरठ रोड स्थित मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के कार्यालय में अभियंत्रण कक्ष में फर्जी लेखाकार बने भुवाल सिंह का अलग कक्ष है और उनकी नेम प्लेट भी लगी है। एमडीए से जुडे़ बैंकों के खातों का लेनदेन, निर्माण कार्यों का भुगतान, क्रय-विक्रय की पत्रावलियां और ठेका कार्यों से जुड़ी एजेंसियों का भुगतान लेखाकार भुवाल सिंह की टेबिल से गुजरता है। मामले के खुलासे पर लेखाकार भुवाल सिंह का कहना है कि वर्ष 1997 में उन्हें दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रुप में मैट के पद पर रखा गया था। फिलहाल एमडीए ने उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप उनकी जेई के पद पर नियुक्ति की फाइल शासन को भेजी है। एमडीए वीसी के अधिकार में है, वह हमसे कोई भी काम ले सकते हैं।
एमडीए ने जारी नहीं किया नियुक्ति पत्र
मैट के लेखाकार बनने का सच आरटीआई के तहत सामने आया। किसान मजदूर संगठन के विकास बालियान ने 18 मई को एमडीए के सूचना अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता से छह बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। एमडीए ने स्पष्ट किया है कि भुवाल सिंह को एमडीए द्वारा कोई नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया है। वह दैनिक वेतन कर्मचारी हैं। वर्तमान में लेखा अनुभाग में कार्यरत हैं।
वीसी के आदेश के अनुपालन में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी भुवाल सिंह को लेखा विभाग में भेजा गया था। उनके पास एमडीए का कोई नियुक्ति पत्र नहीं है, इसकी जानकारी मिली है। उन्हें उनके मूल पद पर भेजा जाएगा।
- राजवीर सिंह मावी, सचिव एमडीए।