{"_id":"49-59354","slug":"Muzaffar-nagar-59354-49","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुजफ्फरनगर में हुई थी गड़बड़! ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुजफ्फरनगर में हुई थी गड़बड़!
Muzaffar nagar
Updated Thu, 04 Jul 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर, 03 जुलाई। एनआरएचएम घोटाले के तार मुजफ्फरनगर से भी जुड़े हुए हैं। सीबीआई ने गाजियाबाद में जिन लोगों के खिलाफ मंगलवार को रिपोर्ट दर्ज कराई है, उनमें जिले के तीन पूर्व सीएमओ और एक वर्तमान एसीएमओ भी शामिल हैं। मुकदमा दर्ज होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा। जिले में भी सीबीआई दो बार आकर रिकॉर्ड खंगाल चुकी है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की टोह लेने के लिए सीबीआई की टीम ने दो बार जिले में जांच-पड़ताल की थी। मंगलवार को गाजियाबाद में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत में मुकदमा दर्ज कराया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अकेले मुजफ्फरनगर से संबंधित चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। तत्कालीन सीएमओ (परिवार कल्याण) डॉ. उमाशंकर, सीएमओ डॉ. आनंद स्वरूप, पूर्व सीएमओ डॉ. अशोक मिश्रा और एसीएमओ डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के नाम शामिल हैं। आशा किट और नसबंदी किट समेत खरीद के कई मामलों में सीबीआई ने यह कार्रवाई की है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग में सीबीआई की कार्रवाई से हलचल का माहौल रहा। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी केवल सीबीआई का जिक्र करते दिखे। लोगों की निगाह अब आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
विज्ञापन
अब कौन कहां तैनात?
मुजफ्फरनगर। सीबीआई के शिकंजे में फंसे चारों स्वास्थ्य अधिकारी वर्तमान में जिम्मेदार पदों पर कार्यरत हैं। पूर्व सीएमओ डॉ. आनंद स्वरूप अलीगढ़ में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। डॉ. अशोक मिश्रा नोएडा में सीएमएस के पद पर कार्यरत हैं, जबकि डॉ उमाशंकर लखनऊ में ज्वाइंट डायरेक्टर है। एसीएमओ डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार मुजफ्फरनगर में ही कार्यरत हैं।
विज्ञापन
कौन कब रहा तैनात?
मुजफ्फरनगर। डॉ. अशोक मिश्रा दो सितंबर 2008 से 28 अगस्त 2009 तक जिले के सीएमओ रहे। इनके बाद पहली अगस्त 2013 तक डॉ. आनंद स्वरूप सीएमओ के पद पर रहे। डॉ. उमाशंकर जिले में मई 2010 से मई 2011 तक सीएमओ (परिवार कल्याण) रहे। एसीएमओ डॉ. ज्ञानेंद्र वर्ष 2008 से जिले में विभिन्न पदों पर कार्य करते आ रहे हैं।
क्या लग रहे हैं आरोप?
मुजफ्फरनगर। सीएमओ डॉ. आनंद स्वरूप जिले में आने से पहले अलीगढ़ में एसीएमओ पद पर रहे थे। सीबीआई ने उनके द्वारा अलीगढ़ में की गई आशा किट खरीद पर उनसे पूछताछ की है। आरोपियों पर मेडिकल किट, दवा व मेडिकल उपकरण की खरीदारी में करोड़ों का गोलमाल करने का आरोप है। घोटाले के बाद सीएमओ परिवार कल्याण का पद ही समाप्त कर दिया गया था। यही नहीं प्रत्येक जिले में वित्त एवं लेखाधिकारी का पद सृजन भी किया गया।
क्या किया था सीबीआई ने?
मुजफ्फरनगर। घोटाले की परते खोलने के लिए सीबीआई की टीम दो बार जिले में पहुंची थी। स्वास्थ्य विभाग से योजनाओं का रिकॉर्ड लिया। कई रजिस्ट्रर टीम ने अपने कब्जे में लिए थे। देहात के अस्पतालों से भी रिकॉर्ड मंगाया गया था। एसीएमओ ने बताया कि उनसे सीधे कोई पूछताछ नहीं की गई।
वर्जन :
कार्रवाई की चर्चा सुनी है, अभी मुझे कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली। इस पर कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
-डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, एसीएमओ, मुजफ्फरनगर।