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‘बेसिक शिक्षा विद्यार्थियों के जीवन निर्माण का आधार’
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बुढ़ाना। पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजपुर-छाजपुर में नवागंतुक छात्र-छात्राओं और सेवानिवृत्त प्रधान अध्यापकों को सम्मानित किया गया। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य भीम सिंह ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और देशप्रेम को प्रेरित करें। बेसिक शिक्षा की नींव जितनी मजबूत होगी, वैसा ही व्यक्तित्व का निर्माण होगा।
समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। दीप प्रज्जवलन आचार्य गुरुदत्त आर्य एवं ग्राम प्रधान लोकेश कुमार शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि डायट प्राचार्य भीम सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा छात्र-छात्राओं के जीवन निर्माण का आधार है। अध्यापक विद्यार्थियों को मूल्यपरक और श्रेष्ठ शिक्षा दें। भारत के इतिहास और महापुरुषों, वैज्ञानिकों की समाज एवं राष्ट्र सेवाओं से अवगत कराए। यदि शिक्षक परिश्रमी, लगनशील, गुणवान होंगे तो उनके आचरण का बच्चों पर श्रेष्ठ प्रभाव होगा। बीडीओ सुभाषचंद ने कहा कि विद्यालयों में भावी पीढ़ी का शारीरिक, मानसिक, आत्मिक और सामाजिक विकास होता है। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि विद्यालय राष्ट्र निर्माण की इकाई और बच्चे राष्ट्र निर्माता है। राजबल और धनबल से बड़ा बल सत्य, धर्म, चरित्र का होता है। विद्यार्थियों को संस्कारों का महत्व बताए।
छात्र-छात्राओं ने शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुति दी। राष्ट्रपति शिक्षक अवार्ड से अलंकृत प्रधानाचार्य ब्रजपाल राठी ने विद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। सेवानिवृत्त एनपीआरसी ब्रजपाल शर्मा, प्रधानाध्यापक ओमपाल, शिक्षक सोमपाल, किस्मती देवी, हरवीर सिंह को शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया। प्रधान लोकेश शर्मा, शिव कुमार शर्मा, दीपक वर्मा, धीर सिंह ने विचार रखे। पीएनबी कांधला प्रबंधक सुशील कुमार, जीत सिंह, आशीष, गरिमा, पवन शर्मा आदि का सहयोग रहा। संचालन ब्रजपाल सिंह राठी ने किया।
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समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। दीप प्रज्जवलन आचार्य गुरुदत्त आर्य एवं ग्राम प्रधान लोकेश कुमार शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि डायट प्राचार्य भीम सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा छात्र-छात्राओं के जीवन निर्माण का आधार है। अध्यापक विद्यार्थियों को मूल्यपरक और श्रेष्ठ शिक्षा दें। भारत के इतिहास और महापुरुषों, वैज्ञानिकों की समाज एवं राष्ट्र सेवाओं से अवगत कराए। यदि शिक्षक परिश्रमी, लगनशील, गुणवान होंगे तो उनके आचरण का बच्चों पर श्रेष्ठ प्रभाव होगा। बीडीओ सुभाषचंद ने कहा कि विद्यालयों में भावी पीढ़ी का शारीरिक, मानसिक, आत्मिक और सामाजिक विकास होता है। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि विद्यालय राष्ट्र निर्माण की इकाई और बच्चे राष्ट्र निर्माता है। राजबल और धनबल से बड़ा बल सत्य, धर्म, चरित्र का होता है। विद्यार्थियों को संस्कारों का महत्व बताए।
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छात्र-छात्राओं ने शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुति दी। राष्ट्रपति शिक्षक अवार्ड से अलंकृत प्रधानाचार्य ब्रजपाल राठी ने विद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। सेवानिवृत्त एनपीआरसी ब्रजपाल शर्मा, प्रधानाध्यापक ओमपाल, शिक्षक सोमपाल, किस्मती देवी, हरवीर सिंह को शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया। प्रधान लोकेश शर्मा, शिव कुमार शर्मा, दीपक वर्मा, धीर सिंह ने विचार रखे। पीएनबी कांधला प्रबंधक सुशील कुमार, जीत सिंह, आशीष, गरिमा, पवन शर्मा आदि का सहयोग रहा। संचालन ब्रजपाल सिंह राठी ने किया।
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