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...लाहौर की छाती पर तिरंगा फहरा दो
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...लाहौर की छाती पर तिरंगा फहरा दो
देवबंद (सहारनपुर)। सामाजिक संस्था नजर की ओर से एक शाम वीर जवानों के नाम से मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें शायरों और कवियों ने रचनाओं से पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी।
बुधवार की रात मोहल्ला खानकाह में आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरूआत शायर सरवर देवबंदी की नात-ए-पाक से हुई। इसके बाद सलीम उस्मानी ने कुछ यूं कहा जालिम हमारी आन से वाकिफ नहीं है तू, झुकना नहीं कबूल किया सर कटा लिया। कवि महताब आजाद ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए हम अमन परस्त हैं कमजोर नहीं यह बता दो, लाहौर की छाती पर तिरंगा फहरा दो। युवा शायर वली वकास ने भारत के वीर सपूतों को लेकर कहा सकून की नींद सोते हैं, ये उनका कर्ज है हम पर, जो भारत मां के बेटे सरहदों पर जान देते हैं। सरवर देवबंदी ने पढ़ा इस कद्र तसव्वुर में उनकी खो गई आंखें, देखती रही सपने जागती रही आंखें। डा. दिवाकर गर्ग ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा वादा ये अपना निभाते रहेंगे जन्नत वतन को बनाते रहेंगे, शहीदों की यादें उनकी मुरादें लहू दे के पूरी कराते रहेंगे सुनाकर जमकर दाद बटोरी। कार्यक्रम में संस्था की ओर से लेखक व समीक्षक कमल देवबंदी को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता संरक्षक डा. शमशाद हुसैन व संचालन वली वकास ने किया। इस मौके पर अंसार मसूदी, कारी आमिर उस्मानी, दिलशाद उस्मानी, बासिर हुसैन, शाहनवाज उस्मानी, शारिक हुसैन, मो. मुजक्किर, यासिर हुसैन, मसरूर मलिक, अब्दुल्ला शहजाद आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। सामाजिक संस्था नजर की ओर से एक शाम वीर जवानों के नाम से मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें शायरों और कवियों ने रचनाओं से पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी।
बुधवार की रात मोहल्ला खानकाह में आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरूआत शायर सरवर देवबंदी की नात-ए-पाक से हुई। इसके बाद सलीम उस्मानी ने कुछ यूं कहा जालिम हमारी आन से वाकिफ नहीं है तू, झुकना नहीं कबूल किया सर कटा लिया। कवि महताब आजाद ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए हम अमन परस्त हैं कमजोर नहीं यह बता दो, लाहौर की छाती पर तिरंगा फहरा दो। युवा शायर वली वकास ने भारत के वीर सपूतों को लेकर कहा सकून की नींद सोते हैं, ये उनका कर्ज है हम पर, जो भारत मां के बेटे सरहदों पर जान देते हैं। सरवर देवबंदी ने पढ़ा इस कद्र तसव्वुर में उनकी खो गई आंखें, देखती रही सपने जागती रही आंखें। डा. दिवाकर गर्ग ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा वादा ये अपना निभाते रहेंगे जन्नत वतन को बनाते रहेंगे, शहीदों की यादें उनकी मुरादें लहू दे के पूरी कराते रहेंगे सुनाकर जमकर दाद बटोरी। कार्यक्रम में संस्था की ओर से लेखक व समीक्षक कमल देवबंदी को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता संरक्षक डा. शमशाद हुसैन व संचालन वली वकास ने किया। इस मौके पर अंसार मसूदी, कारी आमिर उस्मानी, दिलशाद उस्मानी, बासिर हुसैन, शाहनवाज उस्मानी, शारिक हुसैन, मो. मुजक्किर, यासिर हुसैन, मसरूर मलिक, अब्दुल्ला शहजाद आदि मौजूद रहे।
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