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दूध व्यापारी की हत्या में दोषी करार
Updated Sun, 18 Feb 2018 12:08 AM IST
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मुजफ्फरनगर।
एडीजे प्रथम कोर्ट ने शामली के गांव डांगरोल के अनवर हत्याकांड में एक अभियुक्त को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई 19 फरवरी को होगी। करीब नौ वर्ष पहले दूध के कारोबार की रंजिश में यह हत्या हुई थी।
शामली के कांधला थाने पर डांगरोल निवासी अजमल पुत्र शमशू ने चार अक्तूबर 2009 को गांव के ही मनेंद्र उर्फ मोनू पुत्र दिलावर के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक अजमल का भाई अनवर दूध का व्यापार करता था, जो कि डांगरोल से दूध ले जाकर कांधला में जयप्रकाश हलवाई को सप्लाई करता था। उसी दौरान गांव के ही हरेंद्र ने गांव में दूध की डेयरी खोल ली। हरेंद्र के भाई मनेंद्र ने अनवर से दूध कांधला के बजाए उसके भाई हरेंद्र की डेयरी पर देने की बात कही थी, मगर अनवर ने दूध देने से इंकार कर दिया था। इसी बात को लेकर मनेंद्र उससे रंजिश रखने लगा था। घटना के दिन चार अक्तूबर 2009 की सुबह करीब पौने पांच बजे अनवर दूध निकालने के लिए जा रहा था। जब वह जगदीश के मकान के पास पहुंचा तो उसे मनेंद्र ने रोक लिया और उसके भाई की डेयरी पर दूध नहीं देने की रंजिश में अनवर की गोली मारकर हत्या कर दी। कांधला पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर हत्यारोपी मनेंद्र को हत्या में प्रयुक्त तमंचे समेत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौरव कुमार श्रीवास्तव की अदालत संख्या (एक) में हुई। एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी ने अदालत में नौ गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए शनिवार को अभियुक्त मनेंद्र को दूध व्यापारी अनवर की हत्या में दोषी करार दिया। सजा 19 फरवरी को सुनाई जाएगी।
साढ़े आठ साल से जेल में है मनेंद्र
दूध व्यापारी अनवर की हत्या में दोषी करार दिया हत्यारा मनेंद्र उर्फ मोनू बीते साढ़े आठ साल से जेल में बंद है। हाईकोर्ट से भी उसे जमानत नहीं मिल पाई थी।
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पहले पक्षद्रोही हो गए थे गवाह
अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में अदालत में कुल नौ गवाह पेश किए गए। एडीजीसी के अनुसार जिसमें से चार गवाह वादी मुकदमा अजमल, इकबाल, नूरदीन और प्रदीप पक्षद्रोही हो गए थे। बाद में उन्होंने डीआईजी को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि आरोपी पक्ष ने उन्हें धमकी दी थी, इसलिए बयान बदले। इसके बाद चारों के फिर से कोर्ट में बयान कराए गए थे।
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एडीजे प्रथम कोर्ट ने शामली के गांव डांगरोल के अनवर हत्याकांड में एक अभियुक्त को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई 19 फरवरी को होगी। करीब नौ वर्ष पहले दूध के कारोबार की रंजिश में यह हत्या हुई थी।
शामली के कांधला थाने पर डांगरोल निवासी अजमल पुत्र शमशू ने चार अक्तूबर 2009 को गांव के ही मनेंद्र उर्फ मोनू पुत्र दिलावर के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक अजमल का भाई अनवर दूध का व्यापार करता था, जो कि डांगरोल से दूध ले जाकर कांधला में जयप्रकाश हलवाई को सप्लाई करता था। उसी दौरान गांव के ही हरेंद्र ने गांव में दूध की डेयरी खोल ली। हरेंद्र के भाई मनेंद्र ने अनवर से दूध कांधला के बजाए उसके भाई हरेंद्र की डेयरी पर देने की बात कही थी, मगर अनवर ने दूध देने से इंकार कर दिया था। इसी बात को लेकर मनेंद्र उससे रंजिश रखने लगा था। घटना के दिन चार अक्तूबर 2009 की सुबह करीब पौने पांच बजे अनवर दूध निकालने के लिए जा रहा था। जब वह जगदीश के मकान के पास पहुंचा तो उसे मनेंद्र ने रोक लिया और उसके भाई की डेयरी पर दूध नहीं देने की रंजिश में अनवर की गोली मारकर हत्या कर दी। कांधला पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर हत्यारोपी मनेंद्र को हत्या में प्रयुक्त तमंचे समेत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौरव कुमार श्रीवास्तव की अदालत संख्या (एक) में हुई। एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी ने अदालत में नौ गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए शनिवार को अभियुक्त मनेंद्र को दूध व्यापारी अनवर की हत्या में दोषी करार दिया। सजा 19 फरवरी को सुनाई जाएगी।
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साढ़े आठ साल से जेल में है मनेंद्र
दूध व्यापारी अनवर की हत्या में दोषी करार दिया हत्यारा मनेंद्र उर्फ मोनू बीते साढ़े आठ साल से जेल में बंद है। हाईकोर्ट से भी उसे जमानत नहीं मिल पाई थी।
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पहले पक्षद्रोही हो गए थे गवाह
अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में अदालत में कुल नौ गवाह पेश किए गए। एडीजीसी के अनुसार जिसमें से चार गवाह वादी मुकदमा अजमल, इकबाल, नूरदीन और प्रदीप पक्षद्रोही हो गए थे। बाद में उन्होंने डीआईजी को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि आरोपी पक्ष ने उन्हें धमकी दी थी, इसलिए बयान बदले। इसके बाद चारों के फिर से कोर्ट में बयान कराए गए थे।