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अहिंसा और सदाचार से बदलेगा समाज:आर्य
Updated Mon, 18 Sep 2017 12:43 AM IST
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बेहड़ा सादात में शांति के लिए यज्ञ
मोरना (मुजफ्फरनगर)। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति अहिंसा, सदाचार, आचरण और देश भक्ति की शिक्षा देती है। युवा भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को जीवन में उतारे, तभी समाज और देश से बुराइयों का उन्मूलन होगा।
बेहडा सादात स्थित मां सरस्वती उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित यज्ञ समारोह में मुख्य अतिथि आचार्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति संसार की सबसे प्राचीन संस्कृति है। संस्कृति राष्ट्र की आत्मा होती है। भावी पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना होगा। गांव-गांव में वेदों का प्रचार प्रसार होना चाहिए, तभी पाखंड, अंधविश्वास और बुराइयों से समाज को मुक्ति मिलेगी। परोपकार की भावना से समाज में समानता और एकता का भाव उत्पन्न होता है। यज्ञ और यज्ञोपवीत देश की संस्कृति का आधार है। परिवार में सत्संग और यज्ञ होगा। निश्चित ही बच्चे संस्कारित बनेंगे। श्रीराम, श्रीकृष्ण प्रतिदिन यज्ञ किया करते थे। इससे पूर्व, वेदमंत्रों से यज्ञ में आहुतियों अर्पित कर ग्रामीणों ने शांति, एकता और भाईचारे के लिए प्रार्थना की। कमलदीप आर्य, दिनेश आर्य और रजनीश आर्य ने वेद पाठ किया। ग्राम प्रधान मंजू देवी और उनके पति उपदेश चौधरी यज्ञमान रहे। कार्यक्रम में योगेश्वर दयाल, आनंद पाल सिंह, आरपी शर्मा, नरेंद्र आर्य, डॉ हरपाल पंवार, उदयवीर सिंह, जगमोहन, रणबीर सिंह, जयसिंह, कृपा शंकर, डॉ. शेर सिंह, मानसिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता चौधरी ब्रजपाल सिंह तथा संचालन नरेंद्र सिंह ने किया।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति अहिंसा, सदाचार, आचरण और देश भक्ति की शिक्षा देती है। युवा भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को जीवन में उतारे, तभी समाज और देश से बुराइयों का उन्मूलन होगा।
बेहडा सादात स्थित मां सरस्वती उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित यज्ञ समारोह में मुख्य अतिथि आचार्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति संसार की सबसे प्राचीन संस्कृति है। संस्कृति राष्ट्र की आत्मा होती है। भावी पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना होगा। गांव-गांव में वेदों का प्रचार प्रसार होना चाहिए, तभी पाखंड, अंधविश्वास और बुराइयों से समाज को मुक्ति मिलेगी। परोपकार की भावना से समाज में समानता और एकता का भाव उत्पन्न होता है। यज्ञ और यज्ञोपवीत देश की संस्कृति का आधार है। परिवार में सत्संग और यज्ञ होगा। निश्चित ही बच्चे संस्कारित बनेंगे। श्रीराम, श्रीकृष्ण प्रतिदिन यज्ञ किया करते थे। इससे पूर्व, वेदमंत्रों से यज्ञ में आहुतियों अर्पित कर ग्रामीणों ने शांति, एकता और भाईचारे के लिए प्रार्थना की। कमलदीप आर्य, दिनेश आर्य और रजनीश आर्य ने वेद पाठ किया। ग्राम प्रधान मंजू देवी और उनके पति उपदेश चौधरी यज्ञमान रहे। कार्यक्रम में योगेश्वर दयाल, आनंद पाल सिंह, आरपी शर्मा, नरेंद्र आर्य, डॉ हरपाल पंवार, उदयवीर सिंह, जगमोहन, रणबीर सिंह, जयसिंह, कृपा शंकर, डॉ. शेर सिंह, मानसिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता चौधरी ब्रजपाल सिंह तथा संचालन नरेंद्र सिंह ने किया।
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