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जिले के  88 परिषदीय स्कूलों में अध्यापक नहीं

Wed, 18 Jul 2018 12:49 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर Updated Wed, 18 Jul 2018 12:49 AM IST
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88 schools do not have teachers
प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते बच्चे
सूबे की भाजपा सरकार के दावों के बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। यह कड़वा सच अंतर जनपदीय तबादलों की काउंसिलिंग से पहले सामने आया है। जिले में 72 प्राइमरी स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ऐसे स्कूलों की संख्या 16 है। चार साल से समायोजन नहीं होने से विद्यालय शिक्षक विहीन हो चुके हैं। कहीं-कहीं एक अध्यापक के भरोसे ही छात्र-छात्राओं की पढ़ाई चल रही है।  
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धरातल पर बेसिक शिक्षा की दशा और दिशा चौंकाने वाली है। वर्ष 2012 के बाद प्रदेश में शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया बंद है। अंतरजनपदीय तबादले बीते चार साल में दो बार हो चुके हैं। परिषदीय स्कूलों में अध्यापकों की संख्या अजीबोगरीब स्थिति में है। कहीं बच्चों के अनुपात से ज्यादा शिक्षक तैनात हैं तो कहीं सैकड़ों विद्यार्थियों की शिक्षा एक अध्यापक के भरोसे हैं। चौंकाने की बात यह है कि जनपद में 72 प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों की कमी से बंद पड़े हैं।
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उच्च प्राथमिक 16 स्कूलों में भी टीचर नहीं है। अंतरजनपदीय स्थानांतरण के बाद जिले में आए शिक्षकों की काउंसिलिंग में बेसिक शिक्षा परिषद का यह कड़वा सच सामने आया। जानसठ ब्लाक में नौ प्राइमरी स्कूलों अहरोडा, आलमपुर, बेहडा अस्सा, गुज्जरहेडी, हंसावाला, जंधेडी नंबर एक, कासमपुर खोला, नंगली महासिंह-दो, तिलौरा-एक में कोई अध्यापक नहीं है। 
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चरथावल विकास खंड के बिना शिक्षक के 12 स्कूल चल रहे हैं। ऐसे स्कूलों में आलमगीरपुर, अलीपुरा, बलवाखेडी-दो, बधाईकलां-एक, बधाई खुर्द-दो, भमेला, इंद्रगढ, कसौली-एक औैर दो, पिलखनी, रोनी हरजीपुर, टांडा शामिल हैं। पुरकाजी ब्लाक के अलमावाला, बढीवाला, ढांसरी, भैसानी, चानचक, फरखपुर, गोधना-एक, खाईखेडी-दो, कोलाहेडी, मारकपुर, नंगला दुहेली, रजकलांपुर, रामनगर, शेरपुर, तेजलहेडा में शिक्षक मौजूद नहीं है। मोरना विकास खंड में शिक्षक विहीन स्कूलों की संख्या 12 है,

जिनमें भौकरहेडी देहात, खरपोड, खुशीपुरा, मजलिसपुर तौफीर, मीरावाला, नवादा, रुडकली, शुक्रताल, सिकंदरपुर-दो, सीकरी-दो, तेवडा, वजीराबाद के बच्चों के सामने पढ़ाई का संकट है। बुढ़ाना ब्लाक के बसीखुर्द, बवाना, फतेहपुरखेडी-दो, गढ़ी नौआबाद-एक और दो, हबीबपुर सीकरी, हुसैनपुर कलां, खरड माजरा, कुरावां-एक, लुहसाना-एक के प्राइमरी स्कूलों को शिक्षकों का इंतजार है। 

बघरा विकास खंड में अटाली, ढिंढावली-एक, गुज्जरहेडी, मौहम्मदपुर मार्डन, नंगला पिथौरा-एक और दो में कोई शिक्षक नहीं है। शाहपुर क्षेत्र के भौराखुर्द-दो, ढिंढावली, कमालपुर, खुब्बापुर, सदरुदीननगर, सोरम-एक में छात्र-छात्राएं बिना शिक्षक के पढ़ रहे हैं।  उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 16 विद्यालयों में कोई शिक्षक नहीं है। चरथावल विकास खंड के अलीपुरा, बधाईखुर्द और गुनियाजुड्डी के जूनियर स्कूलों में बच्चों की शिक्षा राम भरोसे है।

बुढ़ाना के बड़कता, कुतुबपुर दताना, शिकारपुर तथा सरनावली गांव में टीचर नहीं है। पुरकाजी के भदौला, गोधना और हुसैनपुर में कक्षा छह से आठ तक बच्चों के लिए अध्यापक की कोई व्यवस्था नहीं है। मोरना के गादला, रसूलपुर तथा शुकतारी गांव में बच्चों का भविष्य अंधेरे में है। बघरा ब्लाक के छतैला और कुटबी में भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है। जानसठ के तुल्हेड़ी का जूनियर हाई स्कूल भी खाली पड़ा है।

जिले में 43 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें फिलहाल एक शिक्षक है। परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की यह तस्वीर बेसिक शिक्षा के दावों को आइना दिखा रही है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य भीम सिंह ने बताया कि अंतर जनपदीय स्थानांतरण के अंतर्गत जिले से दो बार बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले गैर जनपदों में हो गए हैं। इन्हीं कारणों से दिक्कतें आई हैं।  

सांसद  के गांव में भी नहीं शिक्षक 
मुजफ्फरनगर। सरकार का पढे़गी बेटियां, बढे़गी बेटियां का नारा भी खोखला साबित हुआ है। आश्चर्य की बात है कि पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान के खुद के गांव कुटबी के कन्या जूनियर हाईस्कूल में 35 छात्राएं हैं, लेकिन शिक्षक कोई नहीं है। जिला पंचायत सदस्य अंजलि मलिक एवं भाजपा नेता नितिन मलिक के गांव सरनावली के जूनियर स्कूल में 27 बच्चे हैं, जिन्हें अध्यापक नहीं मिला है।

रालोद के पूर्व विधायक राजपाल बालियान के गांव गढ़ी नौआबाद के प्राथमिक विद्यालयों में क्रमश: 44 तथा 84 बच्चे है, मगर शिक्षक नहीं है। बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद राजपाल सैनी और जिला पंचायत सदस्य अवनीश के गांव लुहसाना के 80 छात्र-छात्राओं को शिक्षक का इंतजार है। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याणदेव के जीर्णोद्धार से विकसित शुक्रताल की प्राइमरी पाठशाला 56 बच्चों को कोई शिक्षक नहीं मिला है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इलम सिंह गुर्जर के गांव तेजलहेडा के प्राथमिक विद्यालय में बच्चे 38 है, शिक्षक कोई नहीं है।  

खतौली और सदर में टीचर्स की भरमार 
मुजफ्फरनगर। राजनीतिक हस्तक्षेप और बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था को पंगु बना दिया है। विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से विद्यार्थियों को पठन पाठन के लिए शिक्षक नहीं मिलते। जिले में प्राथमिक के 72 तथा उच्च प्राथमिक 16 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं होने का किसी के पास जवाब नहीं है,

जबकि खतौली और सदर ऐसे ब्लाक हैं, जहां बच्चों की संख्या से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। हाइवे और मेन सड़कों पर स्थित स्कूलों में शिक्षकों का कोई अभाव नहीं है। मेरठ-गाजियाबाद में रह रहे शिक्षक खतौली विकास खंड में नियुक्ति चाहते हैं, जबकि रुड़की और हरिद्वार के निवासी शिक्षकों की प्राथमिकता पुरकाजी ब्लाक है। खतौली में केवल खानपुर तथा सदर में रई ऐसे गांव हैं, जहां अध्यापक नहीं है।  

हवा हवाई बना स्कूल चलो अभियान 
मुजफ्फरनगर। सरकार का स्कूल चलो अभियान जिले के कई गांवों में हवा हवाई साबित हुआ है। शाहपुर के काकड़ा गांव में कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 14 बच्चे हैं। मोरना के खरपौड में 15 और छछरौली के कन्या जूनियर हाईस्कूल में 21 विद्यार्थी हैं।

पुरकाजी चमरावाला में केवल 11 बच्चे हैं। चरथावल के अलीपुरा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में मात्र नौ शिक्षार्थी हैं, जबकि कायमपुर गांव में 15 बच्चे हैं। पुरकाजी के प्राइमरी स्कूलों भैसानी में 22, फखरपुर में दस, मारकपुर में 18, रामनगर में 16, शेरपुर में चार बच्चे हैं। जानसठ के आलमपुर में दस और तिलौरा में 13 विद्यार्थी हैं। बच्चों की संख्या बढाने में बेसिक शिक्षा विभाग की कलई खुल रही है।  


शिक्षकों की कमी की वजह से स्कूलों में अध्यापकों की स्थिति असंतुलित है। जिस कारण काफी संख्या में विद्यालय बंद है। अंतर जनपदीय तबादलों की प्रक्रिया में 119 शिक्षक जिले में आए हैं, जिन्हें उन्हीं विद्यालयों में भेजा जा रहा है, जहां या तो शिक्षक नहीं है तथा एकल है। समायोजन के शासनादेश के बाद परिषदीय स्कूलों में अध्यापकों की व्यवस्था को सुधारा जाएगा - दिनेश कुमार यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।  
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