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85 हजार पशुओं का टीकाकरण, 2790 पशुओं ने लंपी को हराया
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85 हजार का टीकाकरण, 2790 पशुओं ने लंपी को हराया
मुजफ्फरनगर। गायों में फैल रहे लंपी रोग की रोकथाम के प्रयास तेज हो गए हैं। अब तक जिले में 85200 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। 2790 पशुओं ने बीमारी को हराया, जबकि पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने 57 पशु बीमारी से ग्रस्त चिह्नित किए हैं।
प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि यह एक संक्रामक बीमारी है। रोग का फैलाव पशुओं में मक्खी, चिचड़ी और मच्छरों के काटने से होता है। एलएसडी बीमारी से प्रभावित गांवों को छोड़कर बुधवार को 31 गांव के पशुओं में एलएसडी बीमारी को रोकने के लिए जनपद में अब तक कुल 85200 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। बीमारी से प्रभावित पशुओं को बुखार होना, पूरे शरीर में जगह-जगह नोड्यूल/गांठों का उभरा हुआ दिखाई देना है। हालांकि बीमारी से ग्रसित पशुओं में मृत्यु दर अनुमानित 1 से 5 प्रतिशत है। बीमारी की रोकथाम के लिए बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। पशुओं को मक्खी, चिचड़ी और मच्छरों के काटने से बचाएं, पशुशाला की साफ-सफाई दैनिक रूप से करना तथा डिस्इंफेक्शन (जैसे-चूना आदि) का स्प्रे करें।
इस तरह नहीं फैलती बीमारी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश कुमार का कहना है कि पशु के शरीर की चमड़ी पर पाई जाने वाली गांठें मनुष्यों में नहीं आती हैं। यह रोग पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलता है। यह मनुष्यों का रोग नहीं है। रोग से ग्रस्त पशु के दूध को उबालकर काम में लिया जा सकता है। इस रोग से पशु के स्वस्थ होने की पूरी संभावना है।
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यहां करें संपर्क
जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि गोशालाओं और 475 ग्राम सभाओं में डिस्इंफेक्शन का स्प्रे कराया गया है। बीमारी की सूचना उपलब्ध कराने के लिए कलक्ट्रेट में स्थापित कंट्रोल रूम नं0 - 9897715888, 9897749888 पर संपर्क किया जा सकता है।
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मुजफ्फरनगर। गायों में फैल रहे लंपी रोग की रोकथाम के प्रयास तेज हो गए हैं। अब तक जिले में 85200 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। 2790 पशुओं ने बीमारी को हराया, जबकि पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने 57 पशु बीमारी से ग्रस्त चिह्नित किए हैं।
प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि यह एक संक्रामक बीमारी है। रोग का फैलाव पशुओं में मक्खी, चिचड़ी और मच्छरों के काटने से होता है। एलएसडी बीमारी से प्रभावित गांवों को छोड़कर बुधवार को 31 गांव के पशुओं में एलएसडी बीमारी को रोकने के लिए जनपद में अब तक कुल 85200 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। बीमारी से प्रभावित पशुओं को बुखार होना, पूरे शरीर में जगह-जगह नोड्यूल/गांठों का उभरा हुआ दिखाई देना है। हालांकि बीमारी से ग्रसित पशुओं में मृत्यु दर अनुमानित 1 से 5 प्रतिशत है। बीमारी की रोकथाम के लिए बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। पशुओं को मक्खी, चिचड़ी और मच्छरों के काटने से बचाएं, पशुशाला की साफ-सफाई दैनिक रूप से करना तथा डिस्इंफेक्शन (जैसे-चूना आदि) का स्प्रे करें।
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इस तरह नहीं फैलती बीमारी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश कुमार का कहना है कि पशु के शरीर की चमड़ी पर पाई जाने वाली गांठें मनुष्यों में नहीं आती हैं। यह रोग पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलता है। यह मनुष्यों का रोग नहीं है। रोग से ग्रस्त पशु के दूध को उबालकर काम में लिया जा सकता है। इस रोग से पशु के स्वस्थ होने की पूरी संभावना है।
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जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि गोशालाओं और 475 ग्राम सभाओं में डिस्इंफेक्शन का स्प्रे कराया गया है। बीमारी की सूचना उपलब्ध कराने के लिए कलक्ट्रेट में स्थापित कंट्रोल रूम नं0 - 9897715888, 9897749888 पर संपर्क किया जा सकता है।