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सेना के जवान की ब्रेन हेमरेज से मौत
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सैनिक की मौत से कोहराम मचा
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर) श्रीनगर के कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान सेना के जवान को ब्रेन हेमरेज होने से उसे चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। सेना के चिकित्सालय में उपचार के दौरान जवान की मौत हो गई। जवान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। जवान का शव गांव में आते ही अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेरठ से आए सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सलामी दी। बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। गमगीन माहौल में सैनिक का अंतिम संस्कार हुआ।
कोतवाली क्षेत्र के गांव कुरालसी निवासी ठा. सतीश कुमार (51) पुत्र ठा. हवलदार 4 मार्च 1988 को भारतीय सेना की सिग्नल कोर में भर्ती हुआ था। सतीश कुमार वर्तमान में श्रीनगर के कुपवाड़ा में मेजर सूबेदार के पद पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान अचानक 22 फरवरी को सतीश कुमार को ब्रेन हेमरेज हुआ। आनन फानन में उसके साथी सेना के जवानों ने उसे आर्मी हास्पिटल में भर्ती करवाया। तीन मार्च को आर्मी के हॉस्पिटल में सतीश कुमार की उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना की सूचना मिलते ही जवान के परिवार में कोहराम मच गया। जवान के पैतृक गांव कुरालसी में शोक छा गया। सोमवार को प्रात: जवान का शव गांव कुरालसी में आया तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेरठ से आए सेना के जवानों ने अपने जवान को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सलामी दी। जवान की अंतिम यात्रा में ग्रामीणों की भारी भीड़ रही। मेजर सूबेदार सतीश कुमार के बेटे विक्की उर्फ विजयराज (21) ने पिता को मुखाग्नि दी। गमगीन माहौल में जवान का अंतिम संस्कार हुआ।
बच्चों पर टूटा गम का पहाड़
बुढ़ाना। मेजर सूबेदार सतीश कुमार अपनी पीछे बेटे विजयराज उर्फ विक्की (21) व बेटी निशा रानी (23) को रोता बिलखता छोड़ गया। सतीश कुमार का बेटा व बेटी अपने पिता के साथ रहकर शिक्षा पूरी कर रहे थे। जवान की पत्नी करीब पांच वर्ष पहले अपने दोनों बच्चों को पिता के हवाले छोड़कर चल बसी थी। सूबेदार मेजर सतीश कुमार बेटा व बेटी का माता व पिता दोनों का फर्ज निभा रहा था। अचानक पिता का साया भी बच्चों के सिर से चला गया। जवान का बेटा विक्की व बेटी निशा रानी दोनों अपने आप को अनाथ महसूस कर रहे हैं। उन्हें इस बात का अहसास भी नही होगा की माता की तरह उनका पिता भी उन्हें बीच मझदार छोड़कर चला जाएगा।
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर) श्रीनगर के कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान सेना के जवान को ब्रेन हेमरेज होने से उसे चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। सेना के चिकित्सालय में उपचार के दौरान जवान की मौत हो गई। जवान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। जवान का शव गांव में आते ही अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेरठ से आए सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सलामी दी। बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। गमगीन माहौल में सैनिक का अंतिम संस्कार हुआ।
कोतवाली क्षेत्र के गांव कुरालसी निवासी ठा. सतीश कुमार (51) पुत्र ठा. हवलदार 4 मार्च 1988 को भारतीय सेना की सिग्नल कोर में भर्ती हुआ था। सतीश कुमार वर्तमान में श्रीनगर के कुपवाड़ा में मेजर सूबेदार के पद पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान अचानक 22 फरवरी को सतीश कुमार को ब्रेन हेमरेज हुआ। आनन फानन में उसके साथी सेना के जवानों ने उसे आर्मी हास्पिटल में भर्ती करवाया। तीन मार्च को आर्मी के हॉस्पिटल में सतीश कुमार की उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना की सूचना मिलते ही जवान के परिवार में कोहराम मच गया। जवान के पैतृक गांव कुरालसी में शोक छा गया। सोमवार को प्रात: जवान का शव गांव कुरालसी में आया तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेरठ से आए सेना के जवानों ने अपने जवान को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सलामी दी। जवान की अंतिम यात्रा में ग्रामीणों की भारी भीड़ रही। मेजर सूबेदार सतीश कुमार के बेटे विक्की उर्फ विजयराज (21) ने पिता को मुखाग्नि दी। गमगीन माहौल में जवान का अंतिम संस्कार हुआ।
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बच्चों पर टूटा गम का पहाड़
बुढ़ाना। मेजर सूबेदार सतीश कुमार अपनी पीछे बेटे विजयराज उर्फ विक्की (21) व बेटी निशा रानी (23) को रोता बिलखता छोड़ गया। सतीश कुमार का बेटा व बेटी अपने पिता के साथ रहकर शिक्षा पूरी कर रहे थे। जवान की पत्नी करीब पांच वर्ष पहले अपने दोनों बच्चों को पिता के हवाले छोड़कर चल बसी थी। सूबेदार मेजर सतीश कुमार बेटा व बेटी का माता व पिता दोनों का फर्ज निभा रहा था। अचानक पिता का साया भी बच्चों के सिर से चला गया। जवान का बेटा विक्की व बेटी निशा रानी दोनों अपने आप को अनाथ महसूस कर रहे हैं। उन्हें इस बात का अहसास भी नही होगा की माता की तरह उनका पिता भी उन्हें बीच मझदार छोड़कर चला जाएगा।
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