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एडीएम हरीशंचद्र ने जांच पर खड़े किए सवाल
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:48 AM IST
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एडीएम हरीशंचद्र ने जांच पर खड़े किए सवाल
मुजफ्फरनगर। शासन से निलंबित एडीएम हरीशचंद्र ने मेरठ के कमिश्नर और आईजी की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। शासन को इन दोनों अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट भेजी है। हरीशचंद्र ने कहा कि उनसे और उनके परिवार से पक्ष ही नहीं जाना गया है, ऐसे में सही तथ्य कैसे सामने आएगा।
नोएडा में कर्नल बीएस चौहान के साथ विवाद में चर्चाओं में आए एडीएम हरीशचंद्र को शासन ने निलंबित कर दिया था। एडीएम का कहना है कि इस प्रकरण में शासन ने मेरठ के आईजी और कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी थी। दोनों अधिकारियों ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट भेज भी दी। उनका कहना है कि यह समझ में नहीं आया है कि रिपोर्ट में क्या भेजा गया, क्योंकि उनके पक्ष को तो जाना ही नहीं गया। एक पक्ष से बात कर उन्हीं की सुनी गई। पीड़ित पक्ष से बात तक नहीं की गई। जब हमारा पक्ष सुना ही नहीं गया तो सच्चाई सामने कैसे आएगी। हरीशचंद्र का कहना है कि एक महिला मजबूरी में ही सामने आती है। उनकी पत्नी ने उस समय रिपोर्ट लिखवाई, जब पानी सर से गुजर गया। दो साल से वह उत्पीड़न सह रही थी। हम संघर्ष करके यहां तक पहुंचे हैं, यदि हमें भी न्याय नहीं मिलेगा तो आम आदमी का क्या होगा। घटनाओं को जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
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मुजफ्फरनगर। शासन से निलंबित एडीएम हरीशचंद्र ने मेरठ के कमिश्नर और आईजी की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। शासन को इन दोनों अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट भेजी है। हरीशचंद्र ने कहा कि उनसे और उनके परिवार से पक्ष ही नहीं जाना गया है, ऐसे में सही तथ्य कैसे सामने आएगा।
नोएडा में कर्नल बीएस चौहान के साथ विवाद में चर्चाओं में आए एडीएम हरीशचंद्र को शासन ने निलंबित कर दिया था। एडीएम का कहना है कि इस प्रकरण में शासन ने मेरठ के आईजी और कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी थी। दोनों अधिकारियों ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट भेज भी दी। उनका कहना है कि यह समझ में नहीं आया है कि रिपोर्ट में क्या भेजा गया, क्योंकि उनके पक्ष को तो जाना ही नहीं गया। एक पक्ष से बात कर उन्हीं की सुनी गई। पीड़ित पक्ष से बात तक नहीं की गई। जब हमारा पक्ष सुना ही नहीं गया तो सच्चाई सामने कैसे आएगी। हरीशचंद्र का कहना है कि एक महिला मजबूरी में ही सामने आती है। उनकी पत्नी ने उस समय रिपोर्ट लिखवाई, जब पानी सर से गुजर गया। दो साल से वह उत्पीड़न सह रही थी। हम संघर्ष करके यहां तक पहुंचे हैं, यदि हमें भी न्याय नहीं मिलेगा तो आम आदमी का क्या होगा। घटनाओं को जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
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