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मां के मंदिर की बाण गंगा से होते हैं उपचार
Updated Fri, 22 Sep 2017 12:32 AM IST
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बाण गंगा से होते हैं मरीजों उपचार
मुजफ्फरनगर। गांधी कॉलोनी स्थित सिद्धपीठ श्री मां वैष्णो देवी मंदिर की बाण गंगा के जल से अनेक असाध्य बीमारियों के उपचार होते हैं। नवरात्र में मंदिर में श्रद्धालुओं का पहले दिन से ही तांता लगना शुरू हो गया है। सुबह से शाम तक मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार टूटने का नाम नहीं लेती है।
इस मंदिर की स्थापना 1967 में की गई थी। तभी से मंदिर में अखंड ज्योति जल रही है, जो आज भी कायम है। मंदिर की मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने वाले को मां का आशीर्वाद अवश्य मिलता है। नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की आम दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रहती है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक मां का आशीर्वाद लेकर अपनी दिनचर्या प्रारंभ करते हैं। मंदिर में बाण गंगा का जल रोगियों के लिए अमृत के समान है। मामूली सा जल कई गंभीर बीमारियों का विनाश करने में महत्वपूर्ण माना जाता है। पुजारी यमुना प्रसाद बताते हैं कि यहां के जल से कैंसर की बीमारी के साथ अनेक शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। सच्चे मन से मन्नत मांगने वालों की मां वैष्णो देवी हर मुराद पूरा करती हैं। मंदिर के कपाट सुबह पांच बजे खोल दिए जाते हैं। दोपहर में एक घंटा बंद रहने के बाद फिर से श्रद्धालुओं का कतारबद्ध आगमन होता है, जो रात्रि तक चलता है।
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मुजफ्फरनगर। गांधी कॉलोनी स्थित सिद्धपीठ श्री मां वैष्णो देवी मंदिर की बाण गंगा के जल से अनेक असाध्य बीमारियों के उपचार होते हैं। नवरात्र में मंदिर में श्रद्धालुओं का पहले दिन से ही तांता लगना शुरू हो गया है। सुबह से शाम तक मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार टूटने का नाम नहीं लेती है।
इस मंदिर की स्थापना 1967 में की गई थी। तभी से मंदिर में अखंड ज्योति जल रही है, जो आज भी कायम है। मंदिर की मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने वाले को मां का आशीर्वाद अवश्य मिलता है। नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की आम दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रहती है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक मां का आशीर्वाद लेकर अपनी दिनचर्या प्रारंभ करते हैं। मंदिर में बाण गंगा का जल रोगियों के लिए अमृत के समान है। मामूली सा जल कई गंभीर बीमारियों का विनाश करने में महत्वपूर्ण माना जाता है। पुजारी यमुना प्रसाद बताते हैं कि यहां के जल से कैंसर की बीमारी के साथ अनेक शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। सच्चे मन से मन्नत मांगने वालों की मां वैष्णो देवी हर मुराद पूरा करती हैं। मंदिर के कपाट सुबह पांच बजे खोल दिए जाते हैं। दोपहर में एक घंटा बंद रहने के बाद फिर से श्रद्धालुओं का कतारबद्ध आगमन होता है, जो रात्रि तक चलता है।
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