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नेता जी के वोट का कवच बनेगा प्रशासन
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वीआईपी वोट की दिव्यांग की तर्ज पर टैगिंग
मुजफ्फरनगर। जिला प्रशासन लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से नेताजी का कहीं वोट न कट जाए इसे लेकर गंभीर हो गया है। जिला प्रशासन अब नेताजी के वोट के कवच के रूप में काम करेगा। भाजपा नेता अरविंद राज शर्मा और चेयरपर्सन का चुनाव लड़ीं उनकी पत्नी का वोट कटने के बाद अफसर हरकत में आ गए हैं। वोटर लिस्ट में जिस प्रकार दिव्यांग के नाम के सामने टैगिंग की गई है, इसी तरह वीआईपी के सामने भी टैगिंग कर दी गई है। तहसीलदार को वीआईपी की सूची अलग से दे दी गई है कि इनके नाम चेक करा लें कि सूची में है की नहीं। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि वीआईपी की प्रशासन ने अलग से लिस्ट तैयार की है। कंप्यूटर में दिव्यांग की तरह नाम के आगे टैगिंग कर दी गई है
जिले में नेताओं के वोट पर अब प्रशासन का पहरा रहेगा। वोट कटवाने के लिए कोई आवेदन न कर दे और धोखे से वोट न कट जाए, इसके लिए जिला प्रशासन ने इंतजाम कर लिए हैं। हाल में वोट जोड़ने और निरस्त करने के अभियान में आवेदन कर किसी ने चेयरपर्सन का चुनाव लड़ी सुधाराज शर्मा और उनके पति भाजपा नेता अरविंद राज शर्मा का वोट ही कटवा दिया। सूची में जब उन्होंने नाम देखा, तो वोट साफ मिला। इसके बाद डीएम को शिकायत हुई तो वोट दोबारा बनवाने के लिए उनका आवेदन कराया गया। इसी तरह का बखेड़ा किसी और नेता के साथ न हो इसके लिए जिला प्रशासन ने कदम उठाए हैं। जिला स्तर पर वीआईपी की एक लिस्ट तैयार की गई है। इस लिस्ट में 61 विशिष्ट लोग हैं। इसी सूची को तहसीलदार को दिया गया है। कहा गया है कि इन सभी के वोट चेक करा लें कि कहीं कट तो नहीं गया। इसी के साथ इन सबको कंप्यूटर पर टैगिंग कराने का काम शुरू कर दिया गया है। दिव्यांग की तरह अब वीआईपी की भी अलग पहचान रहेगी। यदि कोई वोट कटवाने के लिए आवेदन करता है तो सूची में नेता जी का नाम तुरंत सामने आ जाएगा।
61 लोगों को दिया वीआईपी का दर्जा
मुजफ्फरनगर। वीआईपी की श्रेणी में शामिल नेताओं में भाजपा सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक कपिलदेव अग्रवाल, कैराना सांसद तबस्सुम हसन, चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल, विधायक उमेश मलिक, प्रमोद ऊंटवाल, विजय कश्यप, नाहिद हसन, पूर्व विधायक मिथलेश पाल, दीपक कुमार, अनुराधा चौधरी, सुशीला अग्रवाल, अशोक कंसल, अनिल कुमार, उमा किरण, मुश्ताक अहमद, राव वारिस खां, योगराज सिंह, डॉ सुरेश संगल, नवाजिश आलम खां, पंकज मलिक शामिल हैं। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, राजपाल सैनी, अमीर आलम खान, सईदुज्जमा, कादिर राना, सोहनवीर बालियान, पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल, डॉ सुभाषचंद शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रमा नागर, तरसपाल मलिक, भाजपा नेता रूपेंद्र सैनी, अरविंद राज शर्मा, अर्पित मित्तल, संजय मित्तल, यशपाल पंवार, सतपाल पाल, डॉ पुरुषोत्तम, सपा नेता प्रमोद त्यागी, गौरव स्वरूप, राशिद सिद्दीकी, राकेश शर्मा, मुकेश चौधरी, अंसार आढ़ती, बसपा नेता रविंद्र गौतम, प्रेमचंद गौतम, कमल गौतम, जियाउर्रहमान, नसीम अहमद शामिल हैं। कांग्रेस नेता सुभाषचंद माहेश्वरी, सुधीर शर्मा, रंजन मित्तल, नानू मियां, हरेंद्र त्यागी, सलमान सईद, भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, प्रवक्ता राकेश टिकैत, बार संघ अध्यक्ष राजेश्वर त्यागी, पीस पार्टी अध्यक्ष नौशाद खान और मुशर्रत बेगम को वीआईपी की श्रेणी में रखा गया है।
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वीआईपी के वोट पर हमारी नजर
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि वीआईपी की प्रशासन ने अलग से लिस्ट तैयार की है। कंप्यूटर में दिव्यांग की तरह नाम के आगे टैगिंग कर दी गई है। बीएलओ को निर्देश दिए गए हैं कि अब केवल वोट जोड़ने के आवेदन ही लें। वोट केवल उन्हीं का कटेगा जिनकी मृत्यु हो गई है, या जो लड़की शादी होकर ससुराल चली गई है, इसके अलावा वोट नहीं कटेगा। चुनाव से पहले वोट कटवाने की मारामारी को खत्म किया जा रहा है।
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मुजफ्फरनगर। जिला प्रशासन लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से नेताजी का कहीं वोट न कट जाए इसे लेकर गंभीर हो गया है। जिला प्रशासन अब नेताजी के वोट के कवच के रूप में काम करेगा। भाजपा नेता अरविंद राज शर्मा और चेयरपर्सन का चुनाव लड़ीं उनकी पत्नी का वोट कटने के बाद अफसर हरकत में आ गए हैं। वोटर लिस्ट में जिस प्रकार दिव्यांग के नाम के सामने टैगिंग की गई है, इसी तरह वीआईपी के सामने भी टैगिंग कर दी गई है। तहसीलदार को वीआईपी की सूची अलग से दे दी गई है कि इनके नाम चेक करा लें कि सूची में है की नहीं। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि वीआईपी की प्रशासन ने अलग से लिस्ट तैयार की है। कंप्यूटर में दिव्यांग की तरह नाम के आगे टैगिंग कर दी गई है
जिले में नेताओं के वोट पर अब प्रशासन का पहरा रहेगा। वोट कटवाने के लिए कोई आवेदन न कर दे और धोखे से वोट न कट जाए, इसके लिए जिला प्रशासन ने इंतजाम कर लिए हैं। हाल में वोट जोड़ने और निरस्त करने के अभियान में आवेदन कर किसी ने चेयरपर्सन का चुनाव लड़ी सुधाराज शर्मा और उनके पति भाजपा नेता अरविंद राज शर्मा का वोट ही कटवा दिया। सूची में जब उन्होंने नाम देखा, तो वोट साफ मिला। इसके बाद डीएम को शिकायत हुई तो वोट दोबारा बनवाने के लिए उनका आवेदन कराया गया। इसी तरह का बखेड़ा किसी और नेता के साथ न हो इसके लिए जिला प्रशासन ने कदम उठाए हैं। जिला स्तर पर वीआईपी की एक लिस्ट तैयार की गई है। इस लिस्ट में 61 विशिष्ट लोग हैं। इसी सूची को तहसीलदार को दिया गया है। कहा गया है कि इन सभी के वोट चेक करा लें कि कहीं कट तो नहीं गया। इसी के साथ इन सबको कंप्यूटर पर टैगिंग कराने का काम शुरू कर दिया गया है। दिव्यांग की तरह अब वीआईपी की भी अलग पहचान रहेगी। यदि कोई वोट कटवाने के लिए आवेदन करता है तो सूची में नेता जी का नाम तुरंत सामने आ जाएगा।
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61 लोगों को दिया वीआईपी का दर्जा
मुजफ्फरनगर। वीआईपी की श्रेणी में शामिल नेताओं में भाजपा सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक कपिलदेव अग्रवाल, कैराना सांसद तबस्सुम हसन, चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल, विधायक उमेश मलिक, प्रमोद ऊंटवाल, विजय कश्यप, नाहिद हसन, पूर्व विधायक मिथलेश पाल, दीपक कुमार, अनुराधा चौधरी, सुशीला अग्रवाल, अशोक कंसल, अनिल कुमार, उमा किरण, मुश्ताक अहमद, राव वारिस खां, योगराज सिंह, डॉ सुरेश संगल, नवाजिश आलम खां, पंकज मलिक शामिल हैं। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, राजपाल सैनी, अमीर आलम खान, सईदुज्जमा, कादिर राना, सोहनवीर बालियान, पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल, डॉ सुभाषचंद शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रमा नागर, तरसपाल मलिक, भाजपा नेता रूपेंद्र सैनी, अरविंद राज शर्मा, अर्पित मित्तल, संजय मित्तल, यशपाल पंवार, सतपाल पाल, डॉ पुरुषोत्तम, सपा नेता प्रमोद त्यागी, गौरव स्वरूप, राशिद सिद्दीकी, राकेश शर्मा, मुकेश चौधरी, अंसार आढ़ती, बसपा नेता रविंद्र गौतम, प्रेमचंद गौतम, कमल गौतम, जियाउर्रहमान, नसीम अहमद शामिल हैं। कांग्रेस नेता सुभाषचंद माहेश्वरी, सुधीर शर्मा, रंजन मित्तल, नानू मियां, हरेंद्र त्यागी, सलमान सईद, भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, प्रवक्ता राकेश टिकैत, बार संघ अध्यक्ष राजेश्वर त्यागी, पीस पार्टी अध्यक्ष नौशाद खान और मुशर्रत बेगम को वीआईपी की श्रेणी में रखा गया है।
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वीआईपी के वोट पर हमारी नजर
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि वीआईपी की प्रशासन ने अलग से लिस्ट तैयार की है। कंप्यूटर में दिव्यांग की तरह नाम के आगे टैगिंग कर दी गई है। बीएलओ को निर्देश दिए गए हैं कि अब केवल वोट जोड़ने के आवेदन ही लें। वोट केवल उन्हीं का कटेगा जिनकी मृत्यु हो गई है, या जो लड़की शादी होकर ससुराल चली गई है, इसके अलावा वोट नहीं कटेगा। चुनाव से पहले वोट कटवाने की मारामारी को खत्म किया जा रहा है।