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सत्य आचरण से सशक्त बनेगा समाज: गुरुदत
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:13 AM IST
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मुजफ्फरनगर। महर्षि दयानंद सरस्वती के ऋषि बोधित्व दिवस पर आर्य समाज गांधी कालोनी में समाज को वैदिक संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सत्य आचरण से ही राष्ट्र सशक्त बनेगा।
गांधी कॉलोनी स्थित आर्य समाज में आयोजित तीन दिवसीय ऋषि बोधित्व समारोह में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद ने सच्चे शिव की खोज के लिए गृह त्याग दिया। ब्रह्मचर्य और योग साधना से उन्होंने जीवन को अद्धितीय बनाया। ऋषि जैसा दुर्लभ महान चिंतक विश्व में नहीं हुआ। अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग के विरुद्ध बिगुल फूंक कर महर्षि ने वेदों की चेतना जगाई। भारतीय सभ्यता, संस्कृति की रक्षा के लिए आर्य समाज से जुड़े। बेटा-बेटियों का चरित्र निर्माण होगा, परिवारों में उत्तम वातावरण बनेगा। आचरण को श्रेष्ठ बनाएं। वेद प्रचारक आयुषी शास्त्री ने कहा कि ऋषि दयानंद ने पुत्रियों को शिक्षा और वेदों के अध्ययन का हक दिलाया। उन्हीं की प्रेरणा से बेटियां यज्ञ की ब्रह्मा बनी हैं, मंत्र पाठ कर रही हैं। यज्ञ सृष्टि का आधार है। जीवन का श्रेष्ठ कर्म है, जिसमें प्राणिमात्र के कल्याण की शक्ति है। प्रात: यज्ञ में यज्ञमान अरुण अरोरा एवं चंद्रशेखर लूथरा रहे। मौके पर डॉ. महावीर सिंह राठी, इंद्रपाल शास्त्री, आचार्य दयाचंद, जय सिंह, चंद्रावती, ओमवती, कांता, देवेंद्र सिंह राणा, गजेंद्र राणा, रोशनलाल बत्रा आदि मौजूद रहे।
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गांधी कॉलोनी स्थित आर्य समाज में आयोजित तीन दिवसीय ऋषि बोधित्व समारोह में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद ने सच्चे शिव की खोज के लिए गृह त्याग दिया। ब्रह्मचर्य और योग साधना से उन्होंने जीवन को अद्धितीय बनाया। ऋषि जैसा दुर्लभ महान चिंतक विश्व में नहीं हुआ। अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग के विरुद्ध बिगुल फूंक कर महर्षि ने वेदों की चेतना जगाई। भारतीय सभ्यता, संस्कृति की रक्षा के लिए आर्य समाज से जुड़े। बेटा-बेटियों का चरित्र निर्माण होगा, परिवारों में उत्तम वातावरण बनेगा। आचरण को श्रेष्ठ बनाएं। वेद प्रचारक आयुषी शास्त्री ने कहा कि ऋषि दयानंद ने पुत्रियों को शिक्षा और वेदों के अध्ययन का हक दिलाया। उन्हीं की प्रेरणा से बेटियां यज्ञ की ब्रह्मा बनी हैं, मंत्र पाठ कर रही हैं। यज्ञ सृष्टि का आधार है। जीवन का श्रेष्ठ कर्म है, जिसमें प्राणिमात्र के कल्याण की शक्ति है। प्रात: यज्ञ में यज्ञमान अरुण अरोरा एवं चंद्रशेखर लूथरा रहे। मौके पर डॉ. महावीर सिंह राठी, इंद्रपाल शास्त्री, आचार्य दयाचंद, जय सिंह, चंद्रावती, ओमवती, कांता, देवेंद्र सिंह राणा, गजेंद्र राणा, रोशनलाल बत्रा आदि मौजूद रहे।
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