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चेहरा ढककर खूनी ट्रैक पर घूमता मिला जेई
Updated Tue, 22 Aug 2017 01:04 AM IST
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चेहरा ढककर खूनी ट्रैक पर घूमता मिला जेई
मुजफ्फरनगर। पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस रेल दुर्घटना में लापरवाही के मामले में रेलवे बोर्ड से निलंबित किया गया जेई प्रदीप कुमार कपड़े से मुंह छिपाकर घटनास्थल पर ही घूमता मिला। उसकी हर निगाह जांच के लिए आए अफसरों की गतिविधियों पर ठहरी थीं। दिल्ली डिवीजन के इंजीनियरों और रेलपथ सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के इर्द-गिर्द उसकी मौजूदगी रही। किसी को शक नहीं हुआ कि पटरी को बिना वेल्डिंग किए चिपकाकर भाग गया जेई मौके पर ही चहलकदमी कर रहा है।
खतौली रेलपथ के सेक्शन जूनियर इंजीनियर प्रदीप कुमार पर ट्रैक की सुरक्षा का जिम्मा था। हादसे से पहले क्रैक पाए गए रेल ट्रैक को वह गैंगमैनों के साथ ठीक कर रहे थे। 19 अगस्त को मेरठ कैंट से दौड़ती उत्कल एक्सप्रेस जैसे ही खतौली स्टेशन को क्रॉस कर आगे बढ़ी, 700 मीटर दूर काम कर रही रेलकर्मियों की टीम भाग खड़ी हुई। मौके पर वेल्डिंग मशीन, जनरेटर आदि मशीनें मौके पर ही रह गईं, जिस गेटमैन का ऑडियो सुर्खियां बना है, उसमें इसी जेई का जिक्र है। आरोप है कि बिना ब्लॉकिंग लिए जेई ने रेल पटरी का टुकड़ा कटवा दिया। वेल्डिंग कर पटरी को नहीं जोड़ा गया। शाम के समय दिल्ली से सहारनपुर के बीच कई एक्सप्रेस गाड़ियां गुजरती हैं, यह बात जेई और गैंगमैनों को मालूम थी। लापरवाही की हद यह थी कि न तो स्टेशन अधीक्षक को इत्तला थी, इसी वजह से कॉसन की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। रफ्तार से दौड़ी उत्कल पटरी पर चिपके लोहे के टुकड़े के निकलने से हवा में उछल गई। रेलवे बोर्ड ने प्रथमदृष्टया जांच में जान लिया कि चूक कहां हुई है। डीआरएम आरएन सिंह और जीएम आरके कुलश्रेष्ठ भी घटनास्थल को देख कुछ नहीं बोल पाए। आखिरकार बड़े अफसर छुट्टी पर भेजे गए और इंजीनियर्स को निलंबित किया गया, इनमें मुजफ्फरनगर रेलपथ के सीनियर सेक्शन इंजीनियर इंद्रजीत सिंह और खतौली जेई प्रदीप कुमार भी शामिल हैं। हाल ही में ट्रांसफर होकर खतौली आया जेई सहारनपुर का मूल निवासी है, जिसकी डेढ़ साल पहले ही रेलवे में नियुक्ति हुई है। सोमवार को रेलवे संरक्षा आयुक्त आरके पाठक को मामले की जांच के लिए खतौली आना था, हादसे के बाद हर मामले पर जेई की निगाहें रही। निलंबित जेई प्रदीप कुमार मुंह पर कपड़ा लपेटे हुए खतौली स्टेशन से घटनास्थल के बीच मंडराता रहा। दिल्ली डिवीजन के अन्य जेई, ट्रैकमैन और रेलवे कर्मियों से उसकी गुफ्तगू होती रही। भीड़ के बीच वह खुद के बारे में हो रही चर्चाओं को भी सुनता रहा। दिल्ली से घटना के 44 घंटे बाद स्पेशल ट्रेन से खतौली पहुंचे रेलवे कमिश्नर पाठक ने सबसे पहले स्थानीय अफसरों से निलंबित जेई प्रदीप कुमार के बारे में पूछा तो वह चेहरे से कपड़ा हटाकर सामने आ गया। आयुक्त के गर्म तेवर देख जेई प्रदीप कुमार वहां से रफूचक्कर हो गया।
रेलपथ विभाग को
ठहराया जिम्मेदार
मुजफ्फरनगर। रेलमंत्री सुरेश प्रभु के हादसे की जांच के आदेश के बाद रेलवे प्रशासन की पांच सदस्यीय टीम ने जो संयुक्त जांच रिपोर्ट सौंपी है, उसमें दुर्घटना के लिए रेलपथ विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। रविवार को रेलवे के अलग-अलग पांच विभागों की टीम ने जांच में पाया कि इंजन से पांच कोच सुरक्षित पटरी पर थे। सबसे पहले छठा कोच पटरी से उतरा था। अन्य आरक्षित बोगियां पटरी से बिखरकर एक-दूसरे पर चढ़ गई थी। जांच में पाया गया कि किलोमीटर नंबर 101/3 और 101/4 के बीच दाईं ओर रेड लाइन हेक्स ब्लेड काटी हुई थी, जिसमें गैप मिला। नटबोल्ट नहीं लगे थे। पांच कोच तेजी से निकल गए और अन्य कोच पटरी से उतर गए। संयुक्त रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने हादसे के लिए स्थाई पथ विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी है।
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मुजफ्फरनगर। पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस रेल दुर्घटना में लापरवाही के मामले में रेलवे बोर्ड से निलंबित किया गया जेई प्रदीप कुमार कपड़े से मुंह छिपाकर घटनास्थल पर ही घूमता मिला। उसकी हर निगाह जांच के लिए आए अफसरों की गतिविधियों पर ठहरी थीं। दिल्ली डिवीजन के इंजीनियरों और रेलपथ सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के इर्द-गिर्द उसकी मौजूदगी रही। किसी को शक नहीं हुआ कि पटरी को बिना वेल्डिंग किए चिपकाकर भाग गया जेई मौके पर ही चहलकदमी कर रहा है।
खतौली रेलपथ के सेक्शन जूनियर इंजीनियर प्रदीप कुमार पर ट्रैक की सुरक्षा का जिम्मा था। हादसे से पहले क्रैक पाए गए रेल ट्रैक को वह गैंगमैनों के साथ ठीक कर रहे थे। 19 अगस्त को मेरठ कैंट से दौड़ती उत्कल एक्सप्रेस जैसे ही खतौली स्टेशन को क्रॉस कर आगे बढ़ी, 700 मीटर दूर काम कर रही रेलकर्मियों की टीम भाग खड़ी हुई। मौके पर वेल्डिंग मशीन, जनरेटर आदि मशीनें मौके पर ही रह गईं, जिस गेटमैन का ऑडियो सुर्खियां बना है, उसमें इसी जेई का जिक्र है। आरोप है कि बिना ब्लॉकिंग लिए जेई ने रेल पटरी का टुकड़ा कटवा दिया। वेल्डिंग कर पटरी को नहीं जोड़ा गया। शाम के समय दिल्ली से सहारनपुर के बीच कई एक्सप्रेस गाड़ियां गुजरती हैं, यह बात जेई और गैंगमैनों को मालूम थी। लापरवाही की हद यह थी कि न तो स्टेशन अधीक्षक को इत्तला थी, इसी वजह से कॉसन की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। रफ्तार से दौड़ी उत्कल पटरी पर चिपके लोहे के टुकड़े के निकलने से हवा में उछल गई। रेलवे बोर्ड ने प्रथमदृष्टया जांच में जान लिया कि चूक कहां हुई है। डीआरएम आरएन सिंह और जीएम आरके कुलश्रेष्ठ भी घटनास्थल को देख कुछ नहीं बोल पाए। आखिरकार बड़े अफसर छुट्टी पर भेजे गए और इंजीनियर्स को निलंबित किया गया, इनमें मुजफ्फरनगर रेलपथ के सीनियर सेक्शन इंजीनियर इंद्रजीत सिंह और खतौली जेई प्रदीप कुमार भी शामिल हैं। हाल ही में ट्रांसफर होकर खतौली आया जेई सहारनपुर का मूल निवासी है, जिसकी डेढ़ साल पहले ही रेलवे में नियुक्ति हुई है। सोमवार को रेलवे संरक्षा आयुक्त आरके पाठक को मामले की जांच के लिए खतौली आना था, हादसे के बाद हर मामले पर जेई की निगाहें रही। निलंबित जेई प्रदीप कुमार मुंह पर कपड़ा लपेटे हुए खतौली स्टेशन से घटनास्थल के बीच मंडराता रहा। दिल्ली डिवीजन के अन्य जेई, ट्रैकमैन और रेलवे कर्मियों से उसकी गुफ्तगू होती रही। भीड़ के बीच वह खुद के बारे में हो रही चर्चाओं को भी सुनता रहा। दिल्ली से घटना के 44 घंटे बाद स्पेशल ट्रेन से खतौली पहुंचे रेलवे कमिश्नर पाठक ने सबसे पहले स्थानीय अफसरों से निलंबित जेई प्रदीप कुमार के बारे में पूछा तो वह चेहरे से कपड़ा हटाकर सामने आ गया। आयुक्त के गर्म तेवर देख जेई प्रदीप कुमार वहां से रफूचक्कर हो गया।
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रेलपथ विभाग को
ठहराया जिम्मेदार
मुजफ्फरनगर। रेलमंत्री सुरेश प्रभु के हादसे की जांच के आदेश के बाद रेलवे प्रशासन की पांच सदस्यीय टीम ने जो संयुक्त जांच रिपोर्ट सौंपी है, उसमें दुर्घटना के लिए रेलपथ विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। रविवार को रेलवे के अलग-अलग पांच विभागों की टीम ने जांच में पाया कि इंजन से पांच कोच सुरक्षित पटरी पर थे। सबसे पहले छठा कोच पटरी से उतरा था। अन्य आरक्षित बोगियां पटरी से बिखरकर एक-दूसरे पर चढ़ गई थी। जांच में पाया गया कि किलोमीटर नंबर 101/3 और 101/4 के बीच दाईं ओर रेड लाइन हेक्स ब्लेड काटी हुई थी, जिसमें गैप मिला। नटबोल्ट नहीं लगे थे। पांच कोच तेजी से निकल गए और अन्य कोच पटरी से उतर गए। संयुक्त रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने हादसे के लिए स्थाई पथ विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी है।
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