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ऐतिहासिक दूधली में आज लगेगा मेला
Updated Wed, 23 Aug 2017 12:52 AM IST
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दूधली में आज लगेगा मेला
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। दूधली गांव की ऐतिहासिक म्हाड़ी पर बुधवार को (आज) मेला सजेगा। सुबह ही म्हाड़ी के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। मेले में कई प्रांतों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र निशान और छड़ी चढ़ाते हैं। मंगलवार को थाना प्रभारी डीके त्यागी ने मेले की तैयारियों का जायजा लिया।
गांव में म्हाड़ी की मान्यता राजस्थान के बागड़ के बाद मानी जाती है। मान्यता है कि करीब साढ़े छह सौ साल पहले दूधली गांव के मजरे आलमगीरपुर निवासी रामकुमार और आदेश के वंशज को खुद जाहरवीर ने श्रद्धा से अभिभूत होकर पांच ईट प्रदान की थी, तभी गांव में म्हाड़ी स्थापित की गई। श्रद्धा और आस्था में बंधे हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड समेत कई प्रांतों से लोग मेले वाले दिन दूधली आते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से रिजर्व पुलिस बल के अलावा पीएसी को लगाया गया है। मेले का प्रमुख आकर्षण दंगल रहेगा। मेले में मिनी सर्कस, झूले, मौत का कुंआ एवं जादूगर के स्टाल लग गए हैं। प्रधान के पति रवींद्र सिंह पुंडीर और सोनू पुंडीर ने बताया कि ग्राम पंचायत और म्हाड़ी कमेटी ने मेले की तैयारी पूरी कर ली है।
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चरथावल (मुजफ्फरनगर)। दूधली गांव की ऐतिहासिक म्हाड़ी पर बुधवार को (आज) मेला सजेगा। सुबह ही म्हाड़ी के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। मेले में कई प्रांतों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र निशान और छड़ी चढ़ाते हैं। मंगलवार को थाना प्रभारी डीके त्यागी ने मेले की तैयारियों का जायजा लिया।
गांव में म्हाड़ी की मान्यता राजस्थान के बागड़ के बाद मानी जाती है। मान्यता है कि करीब साढ़े छह सौ साल पहले दूधली गांव के मजरे आलमगीरपुर निवासी रामकुमार और आदेश के वंशज को खुद जाहरवीर ने श्रद्धा से अभिभूत होकर पांच ईट प्रदान की थी, तभी गांव में म्हाड़ी स्थापित की गई। श्रद्धा और आस्था में बंधे हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड समेत कई प्रांतों से लोग मेले वाले दिन दूधली आते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से रिजर्व पुलिस बल के अलावा पीएसी को लगाया गया है। मेले का प्रमुख आकर्षण दंगल रहेगा। मेले में मिनी सर्कस, झूले, मौत का कुंआ एवं जादूगर के स्टाल लग गए हैं। प्रधान के पति रवींद्र सिंह पुंडीर और सोनू पुंडीर ने बताया कि ग्राम पंचायत और म्हाड़ी कमेटी ने मेले की तैयारी पूरी कर ली है।
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