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जिले के 29 गांवों में पल रही मच्छरों से बीमारी
Updated Fri, 21 Jul 2017 01:23 AM IST
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जिले के 29 गांवों में पल रही मच्छरों से बीमारियां
मुजफ्फरनगर। जनपद में 498 गांव हैं, जिनमें सर्वे कर मच्छरों के लार्वा और बीमारियों की रिपोर्ट तैयार की गई। इनमें 29 गांवों को स्वास्थ्य विभाग ने हाईरिस्क माना है। यहां मच्छरों से बीमारियां अधिक बढ़ने की आशंका जताई गई है। इन गांवों पर विभाग नजर रखने के लिए नई रणनीति बनाई है। वहीं, जनपद में फॉगिंग करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अकेले काम नहीं करेगा। विभाग नगर पालिका और पंचायत को अभियान का हिस्सा बनाएगा।
डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया आदि खतरनाक बीमारियों से बचाव के लिए जिला मलेरिया विभाग के कंधों पर फॉगिंग की अहम जिम्मेदारी रहती है। पिछले साल की स्टेटस रिपोर्ट का आंकलन कर इस बार हाउस होल्ड सर्वे किया गया है। गांव-गांव स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मच्छरों के लार्वा की जांच की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। जिले में सबसे अधिक मोरना, पुरकाजी खादर के क्षेत्र के गांव मच्छरों के प्रकोप में पाए गए हैं। इन क्षेत्रों के 29 गांवों को विभाग ने हाईरिस्क कैटेगिरी में रखा है। वहीं, शहर की पट्टी से लगे शाहबुद्दीनपुर, घनी आबादी वाले क्षेत्रों को भी हाईरिस्क माना गया है। यहां मच्छरों का लार्वा पनपने के साथ बीमारियां भी मिली हैं। इन गांवों पर विभाग की नजर अधिक पैनी है। उधर, स्वास्थ्य विभाग इस बार फॉगिंग का कार्य अकेले नहीं करेगा। मच्छरों के प्रकोप से निपटने के लिए जिला मलेरिया विभाग के साथ नगर पालिकाएं, पंचायत आदि भी बराबर की हिस्सेदार बनेंगी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ अलका सिंह ने बताया कि कांवड़ यात्रा के कारण फॉगिंग के साथ विभागीय कार्य रुक गए। सोमवार से गांवों में फागिंग और मच्छरों से बचाव, फैलने के कारण, बीमारियों आदि के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम किए जाएंगे।
60 गांवों में हो सका है छिड़काव
मुजफ्फरनगर। जिला मलेरिया विभाग ने टीम लगाकर जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव शुरू करा दिया। इस बीच में कांवड़ यात्रा प्रारंभ हो गई। जिसके चलते 60 गांवों में फॉगिंग का काम पूरा हो सका है। हालांकि 438 गांवों में फॉगिंग के लिए टीमों को तैयार किया गया है। 24 जुलाई से फॉगिंग के लिए टीमों को निकाला जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। जनपद में 498 गांव हैं, जिनमें सर्वे कर मच्छरों के लार्वा और बीमारियों की रिपोर्ट तैयार की गई। इनमें 29 गांवों को स्वास्थ्य विभाग ने हाईरिस्क माना है। यहां मच्छरों से बीमारियां अधिक बढ़ने की आशंका जताई गई है। इन गांवों पर विभाग नजर रखने के लिए नई रणनीति बनाई है। वहीं, जनपद में फॉगिंग करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अकेले काम नहीं करेगा। विभाग नगर पालिका और पंचायत को अभियान का हिस्सा बनाएगा।
डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया आदि खतरनाक बीमारियों से बचाव के लिए जिला मलेरिया विभाग के कंधों पर फॉगिंग की अहम जिम्मेदारी रहती है। पिछले साल की स्टेटस रिपोर्ट का आंकलन कर इस बार हाउस होल्ड सर्वे किया गया है। गांव-गांव स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मच्छरों के लार्वा की जांच की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। जिले में सबसे अधिक मोरना, पुरकाजी खादर के क्षेत्र के गांव मच्छरों के प्रकोप में पाए गए हैं। इन क्षेत्रों के 29 गांवों को विभाग ने हाईरिस्क कैटेगिरी में रखा है। वहीं, शहर की पट्टी से लगे शाहबुद्दीनपुर, घनी आबादी वाले क्षेत्रों को भी हाईरिस्क माना गया है। यहां मच्छरों का लार्वा पनपने के साथ बीमारियां भी मिली हैं। इन गांवों पर विभाग की नजर अधिक पैनी है। उधर, स्वास्थ्य विभाग इस बार फॉगिंग का कार्य अकेले नहीं करेगा। मच्छरों के प्रकोप से निपटने के लिए जिला मलेरिया विभाग के साथ नगर पालिकाएं, पंचायत आदि भी बराबर की हिस्सेदार बनेंगी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ अलका सिंह ने बताया कि कांवड़ यात्रा के कारण फॉगिंग के साथ विभागीय कार्य रुक गए। सोमवार से गांवों में फागिंग और मच्छरों से बचाव, फैलने के कारण, बीमारियों आदि के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम किए जाएंगे।
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60 गांवों में हो सका है छिड़काव
मुजफ्फरनगर। जिला मलेरिया विभाग ने टीम लगाकर जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव शुरू करा दिया। इस बीच में कांवड़ यात्रा प्रारंभ हो गई। जिसके चलते 60 गांवों में फॉगिंग का काम पूरा हो सका है। हालांकि 438 गांवों में फॉगिंग के लिए टीमों को तैयार किया गया है। 24 जुलाई से फॉगिंग के लिए टीमों को निकाला जाएगा।
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