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मुजफ्फरनगर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बैनामा, 466 करोड़ में बिकी तितावी शुगर मिल
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 28 Sep 2017 12:09 AM IST
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तितावी शुगर मिल।
- फोटो : अमर उजाला
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खुदरा बाजार में ब्रांड मवाना शुगर ग्रुप की तितावी चीनी मिल बुधवार को आईपीएल (इंडियन पोटाश लिमिटेड) ने विधिवत रूप से खरीद लिया। 10,500 टन प्रतिदिन की क्षमता वाली इस मिल का बैनामा कुल 466 करोड़ रुपये में हुआ है। सदर तहसील में हुए बैनामे में 22 करोड़ 81 लाख 30 हजार रुपये का स्टांप लगा है। इस दौरान दोनों ग्रुप के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। स्टांप की रकम आरटीजीएस और चेक के जरिये सरकारी खाते में जमा कराई गई है। जिले के इतिहास में अब तक का यह सबसे बड़ा बैनामा है।
तितावी शुगर मिल पर विधिवत रूप से आईपीएल का आधिपत्य हो गया है। इंडियन पोटाश सरकार के स्वामित्व वाली उर्वरक कंपनी है। यूपी शुगर कॉरपोरेशन से छोटी मिलें खरीदकर पिछले दस सालों में आईपीएल ने चीनी क्षेत्र में प्रवेश किया है। मवाना शुगर ग्रुप की तितावी यूनिट की पिछले कुछ सालों से खस्ताहाल में चल रही थी। किसानों के भुगतान के लिए सरकार ने भी मिल पर दबाव बनाया। मवाना ग्रुप ने तितावी मिल का खरीदार तलाशने के लिए वित्तीय सेवा फर्म जेएम फाइनेंशियल के साथ करार किया था।
गन्ना भुगतान नहीं होने पर किसान नाराज चल रहे थे। किसानों की मांग थी कि मिल तभी बिकने दी जाएगी, जब खरीदार उसे चलाएगा। पिछले दिनों आईपीएल ने पहल करते हुए यह डील 466 करोड़ में कर ली। आईपीएल ने मिल के कामगारों को लेकर श्रम विभाग के सभी नियमों का पालन करने की भी शर्त मानी है। 150 करोड़ रुपया किसानों का बकाया भी दे दिया गया है। मिल के स्वामित्व को लेकर काफी समय से दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे।
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बुधवार सुबह दस बजे दोनों ग्रुप के अधिकारी सदर तहसील के उपनिबंधक रविंद्र मेहता के कार्यालय पहुंचे और अपने कागजात प्रस्तुत किए। आईपीएल अधिकारियों ने 375 करोड़ में चीनी मिल खरीदने के अभिलेख दाखिल किए। उपनिबंधक ने सर्किल रेट अधिक होने और चीनी मिल परिसर में खड़े पेड़ों और मशीन आदि का टैक्स जोड़कर 466 करोड़ में रजिस्ट्री कराने के लिए कहा। दोनों ग्रुपों के अफसरों की आपस में बातचीत के बाद सहमति होने पर 466 करोड़ की खरीद के हिसाब से 22 करोड़ 81 लाख 30 हजार के स्टांप लगाए गए।
मवाना शुगर ग्रुप की ओर से डायरेक्टर धर्मपाल शर्मा और आईपीएल ग्रुप की ओर से मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पीएस गहलौत ने बैनामे के कागजों पर हस्ताक्षर किए। महज आधा घंटे में बैनामे की समस्त प्रक्रिया पूरी कर ली गई। मुजफ्फरनगर के इतिहास में अब से पहले इतनी बड़ा बैनामा पहले कभी नहीं हुआ। उप निबंधक रविंद्र मेहता ने बताया कि रजिस्ट्री का कार्य बहुत कम समय में निपटाया गया है। सरकार को इतना बड़ा राजस्व देने वालों का स्वागत भी किया गया। स्टांप का समस्त पैसा आरटीजीएस और चेक के माध्यम से सरकार के खाते में जमा कराया गया है।
10,500 टन प्रतिदिन की थी पेराई क्षमता
मुजफ्फरनगर। मिल की बिक्री की रकम में से 150 करोड़ रुपये गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के साथ ही शेष रकम मवाना के कर्ज भार को कम करने पर खर्च किए जाने की तैयारी है। मवाना ग्रुप के एक अधिकारी ने बताया कि इस डील से जहां आईपीएल को अपना दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं हमें इससे अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने और कर्ज भार को कम करने में सफलता मिलेगी।
खुदरा चीनी बाजार में चर्चित ब्रांड मवाना शुगर का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना संपन्न क्षेत्र की तीन चीनी मिलों पर स्वामित्व है। इन तीनों मिलों की पेराई क्षमता प्रतिदिन 29,500 टन गन्ने की है। तितावी 10,500 टन की क्षमता और 16 मेगावाट की खोई-आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता के साथ कंपनी की दूसरी सबसे बड़ी चीनी मिल है। तितावी का वित्त वर्ष 2016 में कंपनी के कुल 1485 करोड़ रुपये के राजस्व में लगभग 25 फीसदी का योगदान रहा है।
बैनामे से हुआ टारर्गेट पूरा
मुजफ्फरनगर। तितावी शुगर मिल की यह बड़ी डील होने का फायदा सरकार को भी हुआ है। एआईजी स्टांप एसडी सिंह ने बताया कि तितावी चीनी मिल का बैनामा होते ही मंडल और जिले को लेकर सरकार की ओर से दिया गया टारगेट पूरा हो गया है। सितंबर माह का लक्ष्य 15 करोड़ 48 लाख था। 26 सितंबर तक यह आठ करोड़ 75 लाख हो पाया था। बुधवार को तितावी की रजिस्ट्री होने के बाद जिले का लक्ष्य पूरा होने के साथ ही मंडल का टारगेट भी पूरा हो गया है। पूरे साल का टारगेट 195 करोड़ 90 लाख का है।
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तितावी शुगर मिल पर विधिवत रूप से आईपीएल का आधिपत्य हो गया है। इंडियन पोटाश सरकार के स्वामित्व वाली उर्वरक कंपनी है। यूपी शुगर कॉरपोरेशन से छोटी मिलें खरीदकर पिछले दस सालों में आईपीएल ने चीनी क्षेत्र में प्रवेश किया है। मवाना शुगर ग्रुप की तितावी यूनिट की पिछले कुछ सालों से खस्ताहाल में चल रही थी। किसानों के भुगतान के लिए सरकार ने भी मिल पर दबाव बनाया। मवाना ग्रुप ने तितावी मिल का खरीदार तलाशने के लिए वित्तीय सेवा फर्म जेएम फाइनेंशियल के साथ करार किया था।
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गन्ना भुगतान नहीं होने पर किसान नाराज चल रहे थे। किसानों की मांग थी कि मिल तभी बिकने दी जाएगी, जब खरीदार उसे चलाएगा। पिछले दिनों आईपीएल ने पहल करते हुए यह डील 466 करोड़ में कर ली। आईपीएल ने मिल के कामगारों को लेकर श्रम विभाग के सभी नियमों का पालन करने की भी शर्त मानी है। 150 करोड़ रुपया किसानों का बकाया भी दे दिया गया है। मिल के स्वामित्व को लेकर काफी समय से दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे।
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बुधवार सुबह दस बजे दोनों ग्रुप के अधिकारी सदर तहसील के उपनिबंधक रविंद्र मेहता के कार्यालय पहुंचे और अपने कागजात प्रस्तुत किए। आईपीएल अधिकारियों ने 375 करोड़ में चीनी मिल खरीदने के अभिलेख दाखिल किए। उपनिबंधक ने सर्किल रेट अधिक होने और चीनी मिल परिसर में खड़े पेड़ों और मशीन आदि का टैक्स जोड़कर 466 करोड़ में रजिस्ट्री कराने के लिए कहा। दोनों ग्रुपों के अफसरों की आपस में बातचीत के बाद सहमति होने पर 466 करोड़ की खरीद के हिसाब से 22 करोड़ 81 लाख 30 हजार के स्टांप लगाए गए।
मवाना शुगर ग्रुप की ओर से डायरेक्टर धर्मपाल शर्मा और आईपीएल ग्रुप की ओर से मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पीएस गहलौत ने बैनामे के कागजों पर हस्ताक्षर किए। महज आधा घंटे में बैनामे की समस्त प्रक्रिया पूरी कर ली गई। मुजफ्फरनगर के इतिहास में अब से पहले इतनी बड़ा बैनामा पहले कभी नहीं हुआ। उप निबंधक रविंद्र मेहता ने बताया कि रजिस्ट्री का कार्य बहुत कम समय में निपटाया गया है। सरकार को इतना बड़ा राजस्व देने वालों का स्वागत भी किया गया। स्टांप का समस्त पैसा आरटीजीएस और चेक के माध्यम से सरकार के खाते में जमा कराया गया है।
10,500 टन प्रतिदिन की थी पेराई क्षमता
मुजफ्फरनगर। मिल की बिक्री की रकम में से 150 करोड़ रुपये गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के साथ ही शेष रकम मवाना के कर्ज भार को कम करने पर खर्च किए जाने की तैयारी है। मवाना ग्रुप के एक अधिकारी ने बताया कि इस डील से जहां आईपीएल को अपना दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं हमें इससे अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने और कर्ज भार को कम करने में सफलता मिलेगी।
खुदरा चीनी बाजार में चर्चित ब्रांड मवाना शुगर का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना संपन्न क्षेत्र की तीन चीनी मिलों पर स्वामित्व है। इन तीनों मिलों की पेराई क्षमता प्रतिदिन 29,500 टन गन्ने की है। तितावी 10,500 टन की क्षमता और 16 मेगावाट की खोई-आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता के साथ कंपनी की दूसरी सबसे बड़ी चीनी मिल है। तितावी का वित्त वर्ष 2016 में कंपनी के कुल 1485 करोड़ रुपये के राजस्व में लगभग 25 फीसदी का योगदान रहा है।
बैनामे से हुआ टारर्गेट पूरा
मुजफ्फरनगर। तितावी शुगर मिल की यह बड़ी डील होने का फायदा सरकार को भी हुआ है। एआईजी स्टांप एसडी सिंह ने बताया कि तितावी चीनी मिल का बैनामा होते ही मंडल और जिले को लेकर सरकार की ओर से दिया गया टारगेट पूरा हो गया है। सितंबर माह का लक्ष्य 15 करोड़ 48 लाख था। 26 सितंबर तक यह आठ करोड़ 75 लाख हो पाया था। बुधवार को तितावी की रजिस्ट्री होने के बाद जिले का लक्ष्य पूरा होने के साथ ही मंडल का टारगेट भी पूरा हो गया है। पूरे साल का टारगेट 195 करोड़ 90 लाख का है।