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14,000 से ज्यादा लड़कियों में खून की कमी
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:37 AM IST
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14,000 से ज्यादा लड़कियों में खून की कमी
मुजफ्फरनगर।
बेटियों को एनीमिया ने जकड़ लिया है। जिले में बड़ी संख्या में लड़कियों के भीतर खून की कमी मिली है। लड़कियों के खून में आयरन का स्तर कम मिलने से वह एनीमिया की शिकार हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने करीब 987 आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का सर्वे किया है, जिसमें करीब 28,000 से अधिक लड़कियों का मेडिकल चेकअप किया गया है। इनमें से करीब 14,000 लड़कियों में औसत से कम खून पाया गया है।
खून में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखी जा रही है। आयरन की कमी से खून में लाल रक्त कोशिकाएं प्रभावित हो रही हैं हीमोग्लोबिन ही फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाता है। एनीमिया बड़ी बीमारी नहीं है, लेकिन अनदेखा करने पर जान का खतरा भी है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने नौ ब्लॉकों में एनीमिया के खतरे को लेकर बच्चों, लड़कियों और महिलाओं को लेकर सर्वे कराया है। नवंबर और दिसंबर माह में विभागीय अफसरों की टीम ने करीब 987 आंगनबाड़ी और प्राथमिक स्कूलों में सर्वे किया है, जिसमें 28,933 लड़कियों में खून की जांच की गई। जांच के बाद जो तथ्य सामने आए, वह काफी चौंकाने वाले हैं। बेटियां एनीमिया बीमारी की गिरफ्त में सांस ले रही हैं। जांच में 14,957 लड़कियां एनीमिया से ग्रस्त मिली है। इसको लेकर विभाग की चिंता बढऩे के साथ अभिभावकों में खलबली मच गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने एनीमिया से निपटने के लिए पहल शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक इलाज मुकम्मल नहीं है। हीमोग्लोबिन, आयरन का स्तर बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है।
बिगड़ सकता है बोनमैरो तक
मुजफ्फरनगर। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि एनीमिया की बीमारी खून में तीन चीजों को कम हो जाने से बढ़ती है। आयरन, फॉलिग एसिड और बिटामिन बी-12 के कम होने से एनीमिया पैदा होता है। इससे खून में आरबीसी (रेड ब्लड सेल) प्रभावित होती है। अधिक बीमारी बढऩे पर बोनमैरो (खून बनाने की रीढ़) तक बिगड़ जाती है। इससे व्यक्ति की जान पर खतरा बढ़ता है।
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विभाग का दावा, हो रहा सुधार
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एनीमिया से निपटने के लिए काम हो रहा है। जिले में एनीमिया से ग्रस्त मिली लड़कियों का उपचार किया गया है। जिसके चलते 7566 लड़कियों में औसत स्टेज तक खून बढ़ सका है। इसके अलावा भी कई अन्य प्रकार से लड़कियों की देखभाल के लिए अभिभावकों को जागरुक किया गया है।
------------
-शरीर में थकान
-नाखून पीले पडऩा
-उठने बैठने और खड़े होने में चक्कर आना
-आंखों में पीलापन
-काम करने का मन न करना
-लेटकर उठने के बाद आंखों के सामने अंधेरा छाना
-शरीर में तापमान की कमी
-त्वचा में पीलापन
-दिल की असामान्य और तेज धड़कन
-सांस लेने मे तकलीफ
-सीने में दर्द
-तलवों और हथेलियों में ठंडापन
-लगातार रहने वाला सिर मे दर्द
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ऐसे करें बचाव:
खाने-पीने का विशेष ख्याल रखें और मौसम फलों के साथ जूस का सेवन करें। खून को बढ़ाने वाले पोषक तत्वों का अधिक प्रयोग किया जाए। हरी सब्जियां खाएं और दिनभर में खूब पानी पिएं।
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बोले अधिकारी...
लड़कियों में खून की जांच की गई है। कई स्तर पर लड़कियों में खून की कमी पाई गई है। एनीमिया से बचाव के लिए जागरूक करने के साथ दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं, ताकि किशोरियों, महिलाओं और बच्चों को इससे बचाया जा सके।
-डॉ पीएस मिश्रा, सीएमओ मुजफ्फरनगर।
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मुजफ्फरनगर।
बेटियों को एनीमिया ने जकड़ लिया है। जिले में बड़ी संख्या में लड़कियों के भीतर खून की कमी मिली है। लड़कियों के खून में आयरन का स्तर कम मिलने से वह एनीमिया की शिकार हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने करीब 987 आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का सर्वे किया है, जिसमें करीब 28,000 से अधिक लड़कियों का मेडिकल चेकअप किया गया है। इनमें से करीब 14,000 लड़कियों में औसत से कम खून पाया गया है।
खून में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखी जा रही है। आयरन की कमी से खून में लाल रक्त कोशिकाएं प्रभावित हो रही हैं हीमोग्लोबिन ही फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाता है। एनीमिया बड़ी बीमारी नहीं है, लेकिन अनदेखा करने पर जान का खतरा भी है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने नौ ब्लॉकों में एनीमिया के खतरे को लेकर बच्चों, लड़कियों और महिलाओं को लेकर सर्वे कराया है। नवंबर और दिसंबर माह में विभागीय अफसरों की टीम ने करीब 987 आंगनबाड़ी और प्राथमिक स्कूलों में सर्वे किया है, जिसमें 28,933 लड़कियों में खून की जांच की गई। जांच के बाद जो तथ्य सामने आए, वह काफी चौंकाने वाले हैं। बेटियां एनीमिया बीमारी की गिरफ्त में सांस ले रही हैं। जांच में 14,957 लड़कियां एनीमिया से ग्रस्त मिली है। इसको लेकर विभाग की चिंता बढऩे के साथ अभिभावकों में खलबली मच गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने एनीमिया से निपटने के लिए पहल शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक इलाज मुकम्मल नहीं है। हीमोग्लोबिन, आयरन का स्तर बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है।
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बिगड़ सकता है बोनमैरो तक
मुजफ्फरनगर। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि एनीमिया की बीमारी खून में तीन चीजों को कम हो जाने से बढ़ती है। आयरन, फॉलिग एसिड और बिटामिन बी-12 के कम होने से एनीमिया पैदा होता है। इससे खून में आरबीसी (रेड ब्लड सेल) प्रभावित होती है। अधिक बीमारी बढऩे पर बोनमैरो (खून बनाने की रीढ़) तक बिगड़ जाती है। इससे व्यक्ति की जान पर खतरा बढ़ता है।
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विभाग का दावा, हो रहा सुधार
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एनीमिया से निपटने के लिए काम हो रहा है। जिले में एनीमिया से ग्रस्त मिली लड़कियों का उपचार किया गया है। जिसके चलते 7566 लड़कियों में औसत स्टेज तक खून बढ़ सका है। इसके अलावा भी कई अन्य प्रकार से लड़कियों की देखभाल के लिए अभिभावकों को जागरुक किया गया है।
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-शरीर में थकान
-नाखून पीले पडऩा
-उठने बैठने और खड़े होने में चक्कर आना
-आंखों में पीलापन
-काम करने का मन न करना
-लेटकर उठने के बाद आंखों के सामने अंधेरा छाना
-शरीर में तापमान की कमी
-त्वचा में पीलापन
-दिल की असामान्य और तेज धड़कन
-सांस लेने मे तकलीफ
-सीने में दर्द
-तलवों और हथेलियों में ठंडापन
-लगातार रहने वाला सिर मे दर्द
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ऐसे करें बचाव:
खाने-पीने का विशेष ख्याल रखें और मौसम फलों के साथ जूस का सेवन करें। खून को बढ़ाने वाले पोषक तत्वों का अधिक प्रयोग किया जाए। हरी सब्जियां खाएं और दिनभर में खूब पानी पिएं।
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बोले अधिकारी...
लड़कियों में खून की जांच की गई है। कई स्तर पर लड़कियों में खून की कमी पाई गई है। एनीमिया से बचाव के लिए जागरूक करने के साथ दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं, ताकि किशोरियों, महिलाओं और बच्चों को इससे बचाया जा सके।
-डॉ पीएस मिश्रा, सीएमओ मुजफ्फरनगर।