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शिक्षक की अनोखी पहल ने दी युवाओं को नई उर्जा
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:24 AM IST
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शिक्षक की अनोखी पहल ने दी युवाओं को नई ऊर्जा
मोरना (मुजफ्फरनगर)। गांव के साधारण किसान परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्ति ने अपनी प्रतिभा के कौशल के बल पर सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनके भविष्य को कामयाब बना दिया है। स्कूल के ग्राउंड में तीन दर्जन से अधिक युवक प्रशिक्षण प्राप्त कर सरकारी संस्थानों में जॉब पाकर गांव का नाम रोशन कर चुके हैं।
मुख्यालय से 29 किलोमीटर दूर ब्लाक पुरकाजी के गांव बसेड़ा में साधारण किसान ब्रजपाल देशवाल के परिवार में 1977 में जन्मे धर्मेंद्र देशवाल ने देश भक्ति से ओतप्रोत होकर ग्रामीण बच्चों की प्रतिभाओं को प्रशिक्षण देकर कामयाबी की मुस्कान बिखेर दी है। धर्मेंद्र हाल में सहायक अध्यापक के पद पर ब्लाक बुढ़ाना के गांव बिराल में तैनात है। धर्मेंद्र ने गांव में सन 1904 को स्थापित प्राइमरी विद्यालय नंबर एक में परिश्रम कर सन 1999 में खेल का मैदान का रूप दिया। इसी दौरान धर्मेंद्र ने गांव कूकड़ा निवासी मामा बीडीओ विक्रम सिंह राठी के सहयोग से एमसीएजी और बीटीसी की शिक्षा प्राप्त की। मामा और जनता जनार्दन इंटर कालेज बसेड़ा के अध्यापक रविंद्र सिंह की प्ररेणा देश व समाज सेवा के मजबूत इरादे से कदम आगे की ओर बढ़ा दिए।
एनसीसी में सी ग्रेड में बी सर्टिफिकेट हासिल किया। जीवन में कुछ कर गुजरने की चाहत के जुनून ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। गांव के बच्चों के जीवन को शिखर तक ले जाने के लिए अभ्यास कराना शुरू कर दिया। इसी बीच सन 2005 को पुरकाजी ब्लाक के गांव मल्लकपुर में शिक्षा मित्र के पद पर चयन हो गए। कबड्डी के खेल में युवाओं को अपने गांव का नाम जिले में चमकाने की मन में ठान ली, जिससे युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर शिक्षा संबंधी सलाह प्रदान कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने में सहयोग दिया। धर्मेंद्र प्रतिदिन सवेरे प्रात: चार बजे गांव के बच्चों को प्रशिक्षण देकर अपने घर से 16 किलोमीटर दूरी पर सेवा देने साइकिल से आते थे। अभिभावक अपने बच्चों को प्रशिक्षण दिलाने स्कूल के ग्राउंड में सुबह शाम को आने लगे। कठोर प्रशिक्षण नियमित अभ्यास की इस मुहिम ने दर्जनों युवाओं को आर्मी में भर्ती करा दिया।
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इसी बीच 31 जुलाई 2014 को धर्मेंद्र को बुढ़ाना ब्लाक के गंाव बिराल में प्राइमरी विद्यालय नंबर दो में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती मिली, लेकिन कबड्डी के लिए रोजाना आने जाने में बाइक द्वारा तीन घंटे का सफर करते हैं। शाम को तय शुदा समय पर 10 से 16 साल की आयु के बच्चों को कबड्डी का प्रशिक्षण देते हैं। हाल ही में गांव के 47 बच्चे वंश (11), निपुल (10), आदित्य (13), निखिल (12), आर्य (14), लवी (16), विपिन (16), विशाल (16), अर्जुन (16), रणजीत (15), अक्षय. रचित, सागर, हिमांशु, नितिन, निशांत, बबलू, अर्जुन, दीपक, आशू आदि सुबह अभ्यास करने में जुटे हुए हैं। शनिवार व रविवार आदि सहित छुट्टियों के दिनों में युवा खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण का अभ्यास कराया जाता है।
कठिन प्रशिक्षण ने युवाओं के कैरियर को दी मंजिल
गांव के स्कूल परिसर में प्रशिक्षण ने स्पोर्ट्स कोटे के द्वारा अनुत पुत्र चंद्रपाल जम्मू आर्मी, हिमांशु पुत्र देवेंद्र एसएसबी दिल्ली, सचिन पुत्र राकेश बाड़मेर राजस्थान आर्मी, संदीप पुत्र रविंद्र बंगलूरू आर्मी, विनित पुत्र भूपेंद्र जम्मू आर्मी, अंकुर पुत्र शिवकुमार सोसाइटी कोआपरेटिव बसेड़ा, हिमांशु पुत्र इंद्रपाल द्रास सेक्टर कारगिल आर्मी, आकाश रानू पुत्र इंद्रपाल सीआईएसफ पानीपत हेड कांस्टेबिल, मोनू पुत्र नरेंद्र सिकिम्म आर्मी, विकेंद्र पुत्र शिवकुमार बीजी रुड़की, राहुल पुत्र धनपाल. क्लर्क सिंचाई विभाग मुजफ्फरनगर, सुमित पुत्र हरेंद्र पठानकोट आर्मी, सुमित पुत्र प्रेम सिंह उत्तराखंड पुलिस और सुमित पुत्र मोहकम का आरपीएफ मुंबई में सरकारी सेवा के लिए तैनाती मिली हुई है।
द्रोणाचार्य पुरस्कार देने की मांग
ग्राम प्रधान मैफरीन प्रवीन, जिला पंचायत सदस्य छोटी बेगम, ब्लाक प्रमुख टिंकू त्यागी, जोरावर सिंह, तिलकराम, सुबोध, धर्मवीर सिंह, आचार्य नरेंद्र भगत, पूर्व चेयरमैन कैप्टन ज्ञानेंद्र, राजेश सहरावत, डा. वीरपाल निर्वाल, जिला कुश्ती संघ सचिव अमित राठी, सदर ब्लाक प्रमुख अमित पंवार, जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल तोमर, विधायक अवतार सिंह भड़ाना, संासद कुंवर भारतेंद्र, नजर सिंह, हरीश राठी, प्रधान संगठन अध्यक्ष चंद्रवीर राठी आदि ने खेल मंत्रालय से अध्यापक को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाने की मांग की है।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। गांव के साधारण किसान परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्ति ने अपनी प्रतिभा के कौशल के बल पर सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनके भविष्य को कामयाब बना दिया है। स्कूल के ग्राउंड में तीन दर्जन से अधिक युवक प्रशिक्षण प्राप्त कर सरकारी संस्थानों में जॉब पाकर गांव का नाम रोशन कर चुके हैं।
मुख्यालय से 29 किलोमीटर दूर ब्लाक पुरकाजी के गांव बसेड़ा में साधारण किसान ब्रजपाल देशवाल के परिवार में 1977 में जन्मे धर्मेंद्र देशवाल ने देश भक्ति से ओतप्रोत होकर ग्रामीण बच्चों की प्रतिभाओं को प्रशिक्षण देकर कामयाबी की मुस्कान बिखेर दी है। धर्मेंद्र हाल में सहायक अध्यापक के पद पर ब्लाक बुढ़ाना के गांव बिराल में तैनात है। धर्मेंद्र ने गांव में सन 1904 को स्थापित प्राइमरी विद्यालय नंबर एक में परिश्रम कर सन 1999 में खेल का मैदान का रूप दिया। इसी दौरान धर्मेंद्र ने गांव कूकड़ा निवासी मामा बीडीओ विक्रम सिंह राठी के सहयोग से एमसीएजी और बीटीसी की शिक्षा प्राप्त की। मामा और जनता जनार्दन इंटर कालेज बसेड़ा के अध्यापक रविंद्र सिंह की प्ररेणा देश व समाज सेवा के मजबूत इरादे से कदम आगे की ओर बढ़ा दिए।
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एनसीसी में सी ग्रेड में बी सर्टिफिकेट हासिल किया। जीवन में कुछ कर गुजरने की चाहत के जुनून ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। गांव के बच्चों के जीवन को शिखर तक ले जाने के लिए अभ्यास कराना शुरू कर दिया। इसी बीच सन 2005 को पुरकाजी ब्लाक के गांव मल्लकपुर में शिक्षा मित्र के पद पर चयन हो गए। कबड्डी के खेल में युवाओं को अपने गांव का नाम जिले में चमकाने की मन में ठान ली, जिससे युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर शिक्षा संबंधी सलाह प्रदान कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने में सहयोग दिया। धर्मेंद्र प्रतिदिन सवेरे प्रात: चार बजे गांव के बच्चों को प्रशिक्षण देकर अपने घर से 16 किलोमीटर दूरी पर सेवा देने साइकिल से आते थे। अभिभावक अपने बच्चों को प्रशिक्षण दिलाने स्कूल के ग्राउंड में सुबह शाम को आने लगे। कठोर प्रशिक्षण नियमित अभ्यास की इस मुहिम ने दर्जनों युवाओं को आर्मी में भर्ती करा दिया।
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इसी बीच 31 जुलाई 2014 को धर्मेंद्र को बुढ़ाना ब्लाक के गंाव बिराल में प्राइमरी विद्यालय नंबर दो में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती मिली, लेकिन कबड्डी के लिए रोजाना आने जाने में बाइक द्वारा तीन घंटे का सफर करते हैं। शाम को तय शुदा समय पर 10 से 16 साल की आयु के बच्चों को कबड्डी का प्रशिक्षण देते हैं। हाल ही में गांव के 47 बच्चे वंश (11), निपुल (10), आदित्य (13), निखिल (12), आर्य (14), लवी (16), विपिन (16), विशाल (16), अर्जुन (16), रणजीत (15), अक्षय. रचित, सागर, हिमांशु, नितिन, निशांत, बबलू, अर्जुन, दीपक, आशू आदि सुबह अभ्यास करने में जुटे हुए हैं। शनिवार व रविवार आदि सहित छुट्टियों के दिनों में युवा खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण का अभ्यास कराया जाता है।
कठिन प्रशिक्षण ने युवाओं के कैरियर को दी मंजिल
गांव के स्कूल परिसर में प्रशिक्षण ने स्पोर्ट्स कोटे के द्वारा अनुत पुत्र चंद्रपाल जम्मू आर्मी, हिमांशु पुत्र देवेंद्र एसएसबी दिल्ली, सचिन पुत्र राकेश बाड़मेर राजस्थान आर्मी, संदीप पुत्र रविंद्र बंगलूरू आर्मी, विनित पुत्र भूपेंद्र जम्मू आर्मी, अंकुर पुत्र शिवकुमार सोसाइटी कोआपरेटिव बसेड़ा, हिमांशु पुत्र इंद्रपाल द्रास सेक्टर कारगिल आर्मी, आकाश रानू पुत्र इंद्रपाल सीआईएसफ पानीपत हेड कांस्टेबिल, मोनू पुत्र नरेंद्र सिकिम्म आर्मी, विकेंद्र पुत्र शिवकुमार बीजी रुड़की, राहुल पुत्र धनपाल. क्लर्क सिंचाई विभाग मुजफ्फरनगर, सुमित पुत्र हरेंद्र पठानकोट आर्मी, सुमित पुत्र प्रेम सिंह उत्तराखंड पुलिस और सुमित पुत्र मोहकम का आरपीएफ मुंबई में सरकारी सेवा के लिए तैनाती मिली हुई है।
द्रोणाचार्य पुरस्कार देने की मांग
ग्राम प्रधान मैफरीन प्रवीन, जिला पंचायत सदस्य छोटी बेगम, ब्लाक प्रमुख टिंकू त्यागी, जोरावर सिंह, तिलकराम, सुबोध, धर्मवीर सिंह, आचार्य नरेंद्र भगत, पूर्व चेयरमैन कैप्टन ज्ञानेंद्र, राजेश सहरावत, डा. वीरपाल निर्वाल, जिला कुश्ती संघ सचिव अमित राठी, सदर ब्लाक प्रमुख अमित पंवार, जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल तोमर, विधायक अवतार सिंह भड़ाना, संासद कुंवर भारतेंद्र, नजर सिंह, हरीश राठी, प्रधान संगठन अध्यक्ष चंद्रवीर राठी आदि ने खेल मंत्रालय से अध्यापक को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाने की मांग की है।
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