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राज्य कर्मचारियों का कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:48 AM IST
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कर्मचारियों का कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े विभागों के कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली के साथ ही अन्य मांगों का 11 सूत्री मांगपत्र मुख्यमंत्री को भेजा।
कलक्ट्रेट परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राज्य कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर सहमति होने के बावजूद सरकार इस संबंध में शासनादेश अब तक लागू नहीं कर पाई है। पुरानी पेंशन व्यवस्था मूल रूप से बहाल किए जाने की मांग के साथ ही प्रदेश सरकार पर 50 वर्ष की आयु पार कर लेने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों में पारदर्शिता नहीं अपनाए जाने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि न तो प्रदेश सरकार अब तक कैशलेस सुविधा लागू कर पाई है और न ही अब तक हॉस्पिटलों की घोषणा की जा सकी है। इसके अलावा, वेतन विसंगतियों को दूर करने और संविदा आउटसोर्सिंग के रूप में काम कर रहे कार्मिकों को निश्चित अवधि के बाद राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने के साथ ही सभी विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर नई भर्ती किए जाने की मांग की गई। जिलाध्यक्ष रविंद्र नागर की अध्यक्षता व मंत्री कुलदीप शर्मा के संचालन में आयोजित धरने पर उपाध्यक्ष आनंद तिवारी, शशिकला तोमर, इंजीनियर जयलाल शर्मा, प्रदीप कुमार, उमा चौधरी, प्रविता शर्मा, भूपेंद्र, राकेश शर्मा, उपेंद्र बालियान, मदनपाल वर्मा, सुधीर कुमार, मांगेराम, अशोक शर्मा, पितांबर सैनी, शैलेंद्र कुमार, इंजीनियर कृष्णकांत सैनी व पीयूष राणा आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े विभागों के कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली के साथ ही अन्य मांगों का 11 सूत्री मांगपत्र मुख्यमंत्री को भेजा।
कलक्ट्रेट परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राज्य कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर सहमति होने के बावजूद सरकार इस संबंध में शासनादेश अब तक लागू नहीं कर पाई है। पुरानी पेंशन व्यवस्था मूल रूप से बहाल किए जाने की मांग के साथ ही प्रदेश सरकार पर 50 वर्ष की आयु पार कर लेने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों में पारदर्शिता नहीं अपनाए जाने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि न तो प्रदेश सरकार अब तक कैशलेस सुविधा लागू कर पाई है और न ही अब तक हॉस्पिटलों की घोषणा की जा सकी है। इसके अलावा, वेतन विसंगतियों को दूर करने और संविदा आउटसोर्सिंग के रूप में काम कर रहे कार्मिकों को निश्चित अवधि के बाद राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने के साथ ही सभी विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर नई भर्ती किए जाने की मांग की गई। जिलाध्यक्ष रविंद्र नागर की अध्यक्षता व मंत्री कुलदीप शर्मा के संचालन में आयोजित धरने पर उपाध्यक्ष आनंद तिवारी, शशिकला तोमर, इंजीनियर जयलाल शर्मा, प्रदीप कुमार, उमा चौधरी, प्रविता शर्मा, भूपेंद्र, राकेश शर्मा, उपेंद्र बालियान, मदनपाल वर्मा, सुधीर कुमार, मांगेराम, अशोक शर्मा, पितांबर सैनी, शैलेंद्र कुमार, इंजीनियर कृष्णकांत सैनी व पीयूष राणा आदि मौजूद रहे।
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