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खुसूसी दुआ के बाद सालाना उर्स का समापन
Updated Mon, 22 Jan 2018 12:21 AM IST
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मोरना। हजरत ख्वाजा सूफी मोहम्मद हसन शाह सरकार के 60वें उर्स का समापन रविवार शाम दुआ के उपरांत हो गया।
मोरना क्षेत्र के गांव बिहारगढ़ में स्थित खानकाह-ए खुशहालिया चिल्ला शरीफ पर आयोजित दो दिवसीय वार्षिक उर्स का समापन हो गया। रविवार सुबह जिक्रे इलाही के बाद दूरदराज से आए सूफी हजरात व साधु व संतों ने तकरीर की। इस मौके पर दरगाह हजरत ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर गददीनशीं सूफी फखरुद्दीन ने कहा कि जिक्रे इलाही से रुह पाकिजा हो जाती है। हजरत ख्वाजा खुशहाल मियां साहब का फैज अकीदतमंदों को हमेशा मिलता रहेगा। संत स्वामी अवधेशानंद महाराज, स्वामी कृपालदास महाराज ने कहा कि संत और सूफी परंपरा भारत की सरजमीं पर प्राचीन समय से है। विश्व शांति और मानवता का संदेश हमेशा ही संतों और सूफियों ने दिया है। संसार के कष्टों को झेलकर दूसरों के लिए दुआ और कृपा प्रदान की है। कार्यक्रम के दौरान नातिया मुशायरा व कव्वालियों का आयोजन हुआ। लंगर तकसीम में हजारों अकीदतमंदों ने भोजन ग्रहण किया। व्यवस्था में सूफी ताजीम इलाही, सूफी दिलनवाज खान, सूफी शुजाअत खान, सूफी मंसूर मियां, सूफी अनवर मियां आदि मौजूद रहे।
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मोरना क्षेत्र के गांव बिहारगढ़ में स्थित खानकाह-ए खुशहालिया चिल्ला शरीफ पर आयोजित दो दिवसीय वार्षिक उर्स का समापन हो गया। रविवार सुबह जिक्रे इलाही के बाद दूरदराज से आए सूफी हजरात व साधु व संतों ने तकरीर की। इस मौके पर दरगाह हजरत ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर गददीनशीं सूफी फखरुद्दीन ने कहा कि जिक्रे इलाही से रुह पाकिजा हो जाती है। हजरत ख्वाजा खुशहाल मियां साहब का फैज अकीदतमंदों को हमेशा मिलता रहेगा। संत स्वामी अवधेशानंद महाराज, स्वामी कृपालदास महाराज ने कहा कि संत और सूफी परंपरा भारत की सरजमीं पर प्राचीन समय से है। विश्व शांति और मानवता का संदेश हमेशा ही संतों और सूफियों ने दिया है। संसार के कष्टों को झेलकर दूसरों के लिए दुआ और कृपा प्रदान की है। कार्यक्रम के दौरान नातिया मुशायरा व कव्वालियों का आयोजन हुआ। लंगर तकसीम में हजारों अकीदतमंदों ने भोजन ग्रहण किया। व्यवस्था में सूफी ताजीम इलाही, सूफी दिलनवाज खान, सूफी शुजाअत खान, सूफी मंसूर मियां, सूफी अनवर मियां आदि मौजूद रहे।