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किसानों को हक की आवाज उठाने की दी ताकत

Tue, 15 May 2018 12:24 AM IST
Updated Tue, 15 May 2018 12:24 AM IST
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किसानों को हक की आवाज उठाने की दी ताकत
किसानों को हक की आवाज उठाने की दी ताकत
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मुजफ्फरनगर।
संघर्ष के योद्धा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों को हक की आवाज उठाने की बेमिसाल ताकत दी। खतों की मेढ़ को लांघ कर किसानों ने टिकैत की अगुवाई में सत्ता के सिंहासनों को हिला दिया। ढाई दशक के लंबे संघर्ष में कई मर्तबा उनके अंदाज, बयानों और आंदोलनों के तरीकों पर सवाल उठे, मगर चौधरी टिकैत ने कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। कोई लालच और लिप्सा उन्हें डिगा नहीं पाई। सातवीं पुण्यतिथि पर भाकियू संस्थापक की स्मृतियां याद आती है।
देश में बड़े किसान आंदोलनों ने चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को अन्नदाताओं का महानायक बना दिया था। बिजली की बढ़ी दरों के खिलाफ वर्ष 1987 में शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर आंदोलन कर रहे किसानों पर फायरिंग और लाठीचार्ज किया गया, जिसमें दो किसानों जयपाल सिंह और अकबर अली की मौत हो गई। इस घटना के बाद चौधरी टिकैत ने किसानों के हकों की लड़ाई के लिए जीवन समर्पित कर दिया। सिसौली किसानों की उम्मीदों का केंद्र बन गया। गांव-गांव भारतीय किसान यूनियन के संगठन तैयार हो गए। बुजुर्ग से लेकर युवा किसान तक टिकैत की एक आवाज पर जुटने लगे। किसानों की एकजुटता का ऐसा असर प्रदेश और केंद्र की सरकारों ने पहले कभी नहीं देखा था। मेरठ कमिश्नरी पर वर्ष 1988 में टिकैत के घेराव और प्रदर्शन की ताकत देख किसान राजनीति से जुड़े नेताओं को पंचायत के मंच पर आना पड़ा। अलीगढ़ के खैर में पुलिस अत्याचार के खिलाफ उन्होंने सत्याग्रह का एलान किया तो तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी को उनकी मांगे माननी पड़ी। भोपा में नईमा अपहरणकांड को लेकर टिकैत के आंदोलन ने उन्हें राष्ट्रीय सुर्खियां दी। वर्ष 1989 में दिल्ली के वोट क्लब पर टिकैत के नेतृत्व में भाकियू की महापंचायत ने केंद्र की कांग्रेस सरकार को झकझोर दिया। बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ टिकैत के मंच पर आने को लालायित होने लगे। सत्ता का मोहपाश और पद की लालसा बाबा टिकैत को कभी अपने इरादों से डिगा नहीं पाई। कृषि से जुड़े किसी अनुदान को उन्होंने स्वीकार नहीं किया। सिसौली में प्रधानमंत्री से लेकर सीएम तक आए, मगर उन्होंने केवल किसानों के हक और उनके समस्याओं की बात रखी। आंदोलन के दौरान वह कई बार जेल गए, पुलिस की लाठियां खाई, सड़कों पर खुले आसमान के नीचे संघर्ष किया। अलबेले टिकैत ने कभी अपना गंवई अंदाज नहीं बदला। देश और विदेश में किसानों के मंच पर गांव की सादगी का मान बढ़ाया। विवादों से भी नाता रहा, लेकिन उनके उसूल और इरादे नहीं बदले। भेदभाव से मुक्त चौधरी टिकैत के नि:स्वार्थ संघर्ष ने उन्हें महात्मा टिकैत बना दिया।
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नईमा को दिलाया इंसाफ
मुजफ्फरनगर। भोपा के सीकरी गांव की नईमा की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में नईमा को इंसाफ दिलाने को 68 दिन तक भोपा गंग नहर पर आंदोलन चला और किसानों ने सूबे की जेलें भर दी। इस मुद्दे पर वीतराग स्वामी कल्याणदेव, तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हुकुम सिंह और चौधरी टिकैत के बीच बघरा में 15 मांगों पर सहमति बनी। उसके बाद सीएम एनडी तिवारी ने ऊर्जा मंत्री नरेंद्र सिंह को भोपा भेजा और आंदोलन खत्म हुआ। इन किसानों के ट्रैक्टर पुलिस प्रशासन ने गंग नहर में फेंक दिए थे, उन्हें सरकार ने मुआवजा दिया। नईमा की मजार भोपा गंग नहर पर बनी है।
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तत्कालीन सीएम को पिलाया करवे से पानी
मुजफ्फरनगर। भाकियू संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के जीवन ने बड़े राजनीतिज्ञों को प्रभावित किया। बिना लाग-लपेट के किसानों के अधिकारों की बात कहते थे। कई किस्से ऐसे मशहूर हुए जो आज भी सुने जाते हैं। 11 अगस्त 1987 को सिसौली आए तत्कालीन सीएम वीर बहादुर सिंह की बातें उन्हें नहीं भाई। वीर बहादुर सिंह को प्यास लगी, तो टिकैत ने उन्हें करवे में पानी पिलाया। वोट क्लब के धरने पर किसान नेता शरद जोशी से उनकी अनबन हुई, तो भाकियू ने आंदोलन का खुद मोर्चा संभाल लिया। वर्ष 1990 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल ने टिकैत के बुलावे पर सिसौली में चौधरी चरण सिंह का प्रतिमा का अनावरण किया था। पीएम रहते चंद्रशेखर, एचडी देवेगौडा भी सिसौली आए।
बयानों को लेकर विवादों में रहे टिकैत
मुजफ्फरनगर। चौधरी टिकैत के बयान भी सुर्खियां बनी। हालांकि भाकियू अराजनैतिक संगठन रहा, मगर राजनीति ने टिकैत को भी कई बार मोहपाश में फंसाया। वर्ष 1991 प्रदेश में आए चुनाव में राम के नाम पर वोट देने का टिकैत का बयान चुनावी चर्चा में रहा। रालोद से मिल कर भाकियू ने राष्ट्रीय किसान कामगार पार्टी बना कर विधानसभा चुनाव लड़ा। टिकैत ने पैनी की ठोड़ पर वोट लेने का एलान कर दिया। बिजनौर में हुई किसान सभा में चौधरी अजित सिंह की मौजूदगी में कहे गए टिकैत के शब्दों ने बवाल खड़ा कर दिया। तत्कालीन बसपा सरकार ने उनकी गिरफ्तारी के लिए सिसौली को घेर लिया था।
सातवीं पुण्यतिथि आज, जुटेगें किसान
अमर उजाला ब्यूरो
भौराकलां। किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की सातवीं पुण्यतिथि मंगलवार को सिसौली के किसान भवन में मनाई जाएगी। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह सुबह 11 बजे स्मृति दिवस कार्यक्रम में टिकैत को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

भाकियू के संस्थापक चौधरी टिकैत की पुण्यतिथि पर किसान, ग्रामीण और राजनीतिज्ञ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। उनके स्मृति दिवस को जल, नदी एवं पर्यावरण बचाओ संकल्प दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। छह अक्तूबर 1935 को सिसौली में जन्में महेंद्र सिंह टिकैत के पिता चौधरी चौहल सिंह का निधन तब हो गया, जब टिकैत सिर्फ आठ साल के थे। छोटी उम्र में ही उन्हें बालियान खाप की पगड़ी का जिम्मा दे दिया गया। कठिन हालातों में भी उन्होंने अपना जज्बा नहीं खोया। किसानों की समस्याओं के लिए भाकियू को गठन किया। 15 मई 2011 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बड़े पुत्र चौधरी नरेश टिकैत वर्तमान में बालियान खाप के मुखिया और भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। कृषक समृद्धि आयोग के सदस्य धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि किसान भवन पर सुबह आठ बजे वैदिक मंत्रों से यज्ञ होगा। 11 बजे श्रद्धांजलि सभा होगी, जिसमें राजनीतिक पार्टियों के कई नेता, किसान संगठनों के पदाधिकारी, समाजसेवी भाग लेंगे।
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