{"_id":"5ac916bd4f1c1bf0618b62eb","slug":"21523127997-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उर्स में श्रद्धालुओं के साथ साधु संत शामिल हुए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उर्स में श्रद्धालुओं के साथ साधु संत शामिल हुए
Updated Sun, 08 Apr 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जायरीनों ने चिल्लागाह पर चादरपोशी की
मोरना। बिहारगढ़ स्थित चिल्लागाह पर आयोजित चार दिवसीय उर्स के तीसरे दिन कुल शरीफ में हजारों जायरीनों ने भाग लिया। रविवार को गुस्ल की रस्म के उपरांत उर्स का विधिवत समापन हो जाएगा। जायरीनों ने चिल्लागाह पर पहुंचकर चादरपोशी की।
अलहाज हजरत ख्व्वाजा सूफी मोहम्मद खुशहाल के प्रथम उर्स के मौके पर चार दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विदेशों सहित अनेक राज्यों तथा क्षेत्रीय व दूरदराज से आए जायरीनों ने चिल्लागाह पर चादरपोशी की। शनिवार की सुबह जिके्र इलाही के उपरांत दरुद ए पाक व नातिया कलाम पेश किया। श्रद्धालुओं ने सज्जादा नर्शी हजरत जव्वाद अहमद शाह खुशहाली व ख्वाजा पीर हजरत अंसार हुसैन से आशीर्वाद प्राप्त किया। रस्में कुल के दौरान बड़ी संख्या में साधु संतों ने भी भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से महामंडलेश्वर, स्वामी गोपालाचार्य व स्वामी कृपालदास महाराज ने विचार प्रकट किए। महफिल कव्वाली में गुलाम हुसैन, जावेद, अब्बास कलियर शरीफ की कव्वाली प्रस्तुत कर सबको झूमने को मजबूर कर दिया। रविवार की सुबह गुस्ल शरीफ के बाद उर्स का विधिवत समापन हो जाएगा। कार्यक्रम की व्यवस्था बनाने में खादिम शुजाहत हुसैन, ताजीम इलाही, सूफी दिलनवाज खान उपस्थित रहे। उर्स में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा प्रबंध रहा।
विज्ञापन
मोरना। बिहारगढ़ स्थित चिल्लागाह पर आयोजित चार दिवसीय उर्स के तीसरे दिन कुल शरीफ में हजारों जायरीनों ने भाग लिया। रविवार को गुस्ल की रस्म के उपरांत उर्स का विधिवत समापन हो जाएगा। जायरीनों ने चिल्लागाह पर पहुंचकर चादरपोशी की।
अलहाज हजरत ख्व्वाजा सूफी मोहम्मद खुशहाल के प्रथम उर्स के मौके पर चार दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विदेशों सहित अनेक राज्यों तथा क्षेत्रीय व दूरदराज से आए जायरीनों ने चिल्लागाह पर चादरपोशी की। शनिवार की सुबह जिके्र इलाही के उपरांत दरुद ए पाक व नातिया कलाम पेश किया। श्रद्धालुओं ने सज्जादा नर्शी हजरत जव्वाद अहमद शाह खुशहाली व ख्वाजा पीर हजरत अंसार हुसैन से आशीर्वाद प्राप्त किया। रस्में कुल के दौरान बड़ी संख्या में साधु संतों ने भी भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से महामंडलेश्वर, स्वामी गोपालाचार्य व स्वामी कृपालदास महाराज ने विचार प्रकट किए। महफिल कव्वाली में गुलाम हुसैन, जावेद, अब्बास कलियर शरीफ की कव्वाली प्रस्तुत कर सबको झूमने को मजबूर कर दिया। रविवार की सुबह गुस्ल शरीफ के बाद उर्स का विधिवत समापन हो जाएगा। कार्यक्रम की व्यवस्था बनाने में खादिम शुजाहत हुसैन, ताजीम इलाही, सूफी दिलनवाज खान उपस्थित रहे। उर्स में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा प्रबंध रहा।
विज्ञापन