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कम नहीं हो रहा प्रदूषण का स्तर
Updated Sun, 09 Dec 2018 11:58 PM IST
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कम नहीं हो रहा प्रदूषण का स्तर
मुजफ्फरनगर। जिले में प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। धूल और धुएं के कारण पर्यावरण की स्थिति खराब हो रही है। सुबह को कोहरे के कारण स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। रविवार को भी जनपद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 364 रहा। यह बहुत खराब स्थिति है।
सर्दियां शुरू होते ही वायु प्रदूषण भी बढ़ने लगता है। वायु प्रदूषण के मामले में जिले की हालत दिल्ली और एनसीआर के अन्य जनपदों की तरह बहुत खराब है। वायु की गुणवत्ता का सूचकांक बहुत खराब स्थिति दर्शा रहा है। सुबह को कोहरा आने के कारण प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है। हालांकि दोपहर में हवा चलने से इसमें थोड़ी कमी आती है, लेकिन शाम होते ही प्रदूषण फिर बढ़ने लगता है। बीते कई दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 325 से नीचे नहीं गया। 300 से 400 तक की स्थिति बहुत खराब मानी जाती है, जबकि 400 से ऊपर की स्थिति को घातक माना जाता है। जिले में प्रदूषण की स्थिति के लिए उद्योगों से निकलने वाले धुएं के अलावा टूटी पड़ी सड़कों और निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल, कूड़ा जलाना माना जाता है। इस पर नियंत्रण नहीं होने से स्थिति सुधारने का नाम नहीं ले रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय का कहना है कि सुबह कोहरा अधिक होने के कारण प्रदूषण और ज्यादा हो जाता है। दिन में हवा चलने से स्थिति में सुधार होता है।
छह दिनों का वायु गुणवत्ता सूचकांक
दिनांक एक्यूआई
चार दिसंबर 373
पांच दिसंबर 384
छह दिसंबर 366
सात दिसंबर 342
आठ दिसंबर 326
नौ दिसंबर 364
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मुजफ्फरनगर। जिले में प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। धूल और धुएं के कारण पर्यावरण की स्थिति खराब हो रही है। सुबह को कोहरे के कारण स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। रविवार को भी जनपद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 364 रहा। यह बहुत खराब स्थिति है।
सर्दियां शुरू होते ही वायु प्रदूषण भी बढ़ने लगता है। वायु प्रदूषण के मामले में जिले की हालत दिल्ली और एनसीआर के अन्य जनपदों की तरह बहुत खराब है। वायु की गुणवत्ता का सूचकांक बहुत खराब स्थिति दर्शा रहा है। सुबह को कोहरा आने के कारण प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है। हालांकि दोपहर में हवा चलने से इसमें थोड़ी कमी आती है, लेकिन शाम होते ही प्रदूषण फिर बढ़ने लगता है। बीते कई दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 325 से नीचे नहीं गया। 300 से 400 तक की स्थिति बहुत खराब मानी जाती है, जबकि 400 से ऊपर की स्थिति को घातक माना जाता है। जिले में प्रदूषण की स्थिति के लिए उद्योगों से निकलने वाले धुएं के अलावा टूटी पड़ी सड़कों और निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल, कूड़ा जलाना माना जाता है। इस पर नियंत्रण नहीं होने से स्थिति सुधारने का नाम नहीं ले रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय का कहना है कि सुबह कोहरा अधिक होने के कारण प्रदूषण और ज्यादा हो जाता है। दिन में हवा चलने से स्थिति में सुधार होता है।
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छह दिनों का वायु गुणवत्ता सूचकांक
दिनांक एक्यूआई
चार दिसंबर 373
पांच दिसंबर 384
छह दिसंबर 366
सात दिसंबर 342
आठ दिसंबर 326
नौ दिसंबर 364