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बिन पोथी पढ़ रहा देश का भविष्य
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मुजफ्फरनगर। परिषदीय स्कूलों में बिना पोथी के ही देश का भविष्य लिखा जा रहा है। शैक्षिक सत्र शुरू हुए एक माह बीत गया, मगर स्कूलों तक किताबें नहीं पहुंची हैं। 30 अप्रैल तक हर हाल में ब्लॉक क्षेत्रों में किताबें पहुंचाने के आदेश थे, लेकिन जिले को आपूर्ति ही नहीं मिली। अभी तक मात्र 27 प्रतिशत ही किताबों का वितरण हो सका है।
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित 881 प्राथमिक और 382 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें करीब 45 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। सीबीएसई की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों में ही नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया, लेकिन एक माह बीतने के बावजूद स्कूलों तक सरकारी किताबें नहीं पहुंची। कक्षा एक से आठवीं तक किताबों के करीब 87 शीर्षक हैं। इनमें से कुछ का ही वितरण हो सका है। डीएम अजय शंकर पांडेय ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर 30 अप्रैल तक ब्लॉकों पर किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन पर अमल नहीं हो सका। जिले को किताबों की आपूर्ति मिली ही नहीं तो ब्लॉक स्तर पर पहुंचने का सवाल ही नहीं। मंगलवार तक मात्र तीन लाख 72 हजार 808 किताबों का वितरण हो सका है, जबकि डिमांड 13 लाख 74 हजार 735 की है। अभी भी स्कूलों में दस लाख एक हजार 927 किताबों की जरूरत है।
एक मई के बाद 60 हजार किताबें आईं
एक मई के बाद जिले को लगभग 60 हजार किताबों की आपूर्ति की गई है जबकि डिमांड करीब दस लाख किताबों की थी। यह भी अभी स्कूलों में नहीं पहुंच सकी हैं। सोमवार से इन किताबों को स्कूलों में आपूर्ति करने का काम शुरू होगा।
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प्रकाशकों को पत्र लिखा गया है। किताबों की आपूर्ति नहीं होने के कारण वितरण नहीं हो सका। जल्द ही किताबें जिले में पहुंचने की संभावना है। - योगेश शर्मा, बीएसए।
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जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित 881 प्राथमिक और 382 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें करीब 45 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। सीबीएसई की तर्ज पर परिषदीय स्कूलों में ही नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया, लेकिन एक माह बीतने के बावजूद स्कूलों तक सरकारी किताबें नहीं पहुंची। कक्षा एक से आठवीं तक किताबों के करीब 87 शीर्षक हैं। इनमें से कुछ का ही वितरण हो सका है। डीएम अजय शंकर पांडेय ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर 30 अप्रैल तक ब्लॉकों पर किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन पर अमल नहीं हो सका। जिले को किताबों की आपूर्ति मिली ही नहीं तो ब्लॉक स्तर पर पहुंचने का सवाल ही नहीं। मंगलवार तक मात्र तीन लाख 72 हजार 808 किताबों का वितरण हो सका है, जबकि डिमांड 13 लाख 74 हजार 735 की है। अभी भी स्कूलों में दस लाख एक हजार 927 किताबों की जरूरत है।
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एक मई के बाद 60 हजार किताबें आईं
एक मई के बाद जिले को लगभग 60 हजार किताबों की आपूर्ति की गई है जबकि डिमांड करीब दस लाख किताबों की थी। यह भी अभी स्कूलों में नहीं पहुंच सकी हैं। सोमवार से इन किताबों को स्कूलों में आपूर्ति करने का काम शुरू होगा।
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प्रकाशकों को पत्र लिखा गया है। किताबों की आपूर्ति नहीं होने के कारण वितरण नहीं हो सका। जल्द ही किताबें जिले में पहुंचने की संभावना है। - योगेश शर्मा, बीएसए।