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नेतृत्व विहीन था दलितों का आंदोलन
Updated Tue, 03 Apr 2018 01:16 AM IST
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रेलवे ट्रैक के पत्थरों को हथियार बनाया
मुजफ्फरनगर। सबसे अधिक भीड़ रेलवे ट्रैक पर थी। यहां रेल रोकी गई थी। इसी स्थान से नई मंडी कोतवाली भी चंद कदमों की दूरी पर है। हिंसा भड़की तो ट्रैक पर बेटे आंदोलनकारी उपद्रवी बन गई। उन्होंने रेलवे ट्रैक के पत्थरों का ही हथियार बना लिया। यहां से उपद्रवियों ने कई बार सीधे नई मंडी कोतवाली और पुलिस पर जमकर पथराव कर पुलिस को दूर तक दौड़ाया।
मकानों में भी तोड़फोड़ की
मुजफ्फरनगर। हिंसा भड़कने पर उपद्रवियों ने नई मंडी कोतवाली के सामने मकानों में भी जमकर तोड़फोड़ की। कोतवाली परिसर और सामने वाहनों में आग लगाने के बाद उपद्रवियों ने आसपास के मकानों में तोड़फोड़ कर दी। मकानों के शीशे तोड़ दिए। बाहर रखे गमले आदि सामान उठा कर फेंक दिए। उपद्रवियों के इस तांडव को देख परिजनों में दहशत फैल गई। पुलिस आई तो खौफजदा परिजन अपने मकानों को छोड़ कर चले गए। इस इलाके में मीका नगर, जैन विहार कालोनी, कंवलवाला बाग, रेलवे रोड आदि में भी दहशत फैली रही। परिजन घरों में दुबक गए। खिड़की दरवाजे बंद कर ताले डाल लिए। कालोनियों के मुख्य गेट का दरवाजे बंद कर लिए गए। हिंसा स्थल के निकट ही मौजूद डीआईओएस कार्यालय के कर्मचारियों में दहशत फैल गई।
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मुजफ्फरनगर। सबसे अधिक भीड़ रेलवे ट्रैक पर थी। यहां रेल रोकी गई थी। इसी स्थान से नई मंडी कोतवाली भी चंद कदमों की दूरी पर है। हिंसा भड़की तो ट्रैक पर बेटे आंदोलनकारी उपद्रवी बन गई। उन्होंने रेलवे ट्रैक के पत्थरों का ही हथियार बना लिया। यहां से उपद्रवियों ने कई बार सीधे नई मंडी कोतवाली और पुलिस पर जमकर पथराव कर पुलिस को दूर तक दौड़ाया।
मकानों में भी तोड़फोड़ की
मुजफ्फरनगर। हिंसा भड़कने पर उपद्रवियों ने नई मंडी कोतवाली के सामने मकानों में भी जमकर तोड़फोड़ की। कोतवाली परिसर और सामने वाहनों में आग लगाने के बाद उपद्रवियों ने आसपास के मकानों में तोड़फोड़ कर दी। मकानों के शीशे तोड़ दिए। बाहर रखे गमले आदि सामान उठा कर फेंक दिए। उपद्रवियों के इस तांडव को देख परिजनों में दहशत फैल गई। पुलिस आई तो खौफजदा परिजन अपने मकानों को छोड़ कर चले गए। इस इलाके में मीका नगर, जैन विहार कालोनी, कंवलवाला बाग, रेलवे रोड आदि में भी दहशत फैली रही। परिजन घरों में दुबक गए। खिड़की दरवाजे बंद कर ताले डाल लिए। कालोनियों के मुख्य गेट का दरवाजे बंद कर लिए गए। हिंसा स्थल के निकट ही मौजूद डीआईओएस कार्यालय के कर्मचारियों में दहशत फैल गई।
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