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जिले में बाल विवाह करने वाले होंगे दंडित
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मुजफ्फरनगर। डीएम अजय शंकर पांडेय ने कहा कि जिले में किसी भी स्थिति में बाल विवाह नहीं होने दिए जाएंगे। बाल विवाह करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
विकास भवन सभागार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत एक गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें डीएम ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत करना होगा। 181 महिला हैल्पलाइन का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किया जाए। सभी थानाध्यक्ष भी इसे लेकर पूरी तरह सचेत रहें। सूचना पर बाल विवाह को तुरंत रोक दें। सीएमओ से बालिका की आयु का मेडिकल कराया जाए। संबंधित एसडीएम भी ऐसी सूचना पर सतर्क रहें। विवाह के लिए लड़के की आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 से कम नहीं होनी चाहिए। यदि लड़के-लड़की की आयु इससे कम है तो वह बाल विवाह की श्रेणी में आएगा। ऐसी रूढ़िवादी परंपरा है कि अक्षय तृतीया के अवसर पर ही इस तरह के विवाह होते हैं। अक्षय तृतीया की तिथि सात मई को है। बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है जिसके शारीरिक एवं मानसिक रूप से गंभीर दुष्प्रभाव होते है। बाल विवाह कराने वाले मंडप, बैंक्वेट हाल, फोटोग्राफर, पंडित, मौलवी आदि भी दोषी की श्रेणी में आएंगे। सीडीओ अर्चना वर्मा ने भी इस संबंध में जानकारी दी। गोष्ठी में समाजसेवी बीना शर्मा ने बाल विवाह से बालिका के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया। जिला प्रोबेशन अधिकारी मीनू सिंह, बीएसए योगेश कुमार शर्मा, कमलेश वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह, जिला बाल संरक्षण इकाई का समस्त स्टाफ, महिला शक्ति केन्द्र स्टाफ, आशा ज्योति केन्द्र एवं 181 हैल्पलाइन स्टाफ के साथ विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से आए व्यक्ति आदि मौजूद रहे।
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विकास भवन सभागार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत एक गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें डीएम ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत करना होगा। 181 महिला हैल्पलाइन का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किया जाए। सभी थानाध्यक्ष भी इसे लेकर पूरी तरह सचेत रहें। सूचना पर बाल विवाह को तुरंत रोक दें। सीएमओ से बालिका की आयु का मेडिकल कराया जाए। संबंधित एसडीएम भी ऐसी सूचना पर सतर्क रहें। विवाह के लिए लड़के की आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 से कम नहीं होनी चाहिए। यदि लड़के-लड़की की आयु इससे कम है तो वह बाल विवाह की श्रेणी में आएगा। ऐसी रूढ़िवादी परंपरा है कि अक्षय तृतीया के अवसर पर ही इस तरह के विवाह होते हैं। अक्षय तृतीया की तिथि सात मई को है। बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है जिसके शारीरिक एवं मानसिक रूप से गंभीर दुष्प्रभाव होते है। बाल विवाह कराने वाले मंडप, बैंक्वेट हाल, फोटोग्राफर, पंडित, मौलवी आदि भी दोषी की श्रेणी में आएंगे। सीडीओ अर्चना वर्मा ने भी इस संबंध में जानकारी दी। गोष्ठी में समाजसेवी बीना शर्मा ने बाल विवाह से बालिका के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया। जिला प्रोबेशन अधिकारी मीनू सिंह, बीएसए योगेश कुमार शर्मा, कमलेश वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह, जिला बाल संरक्षण इकाई का समस्त स्टाफ, महिला शक्ति केन्द्र स्टाफ, आशा ज्योति केन्द्र एवं 181 हैल्पलाइन स्टाफ के साथ विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से आए व्यक्ति आदि मौजूद रहे।
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