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कार्ता एशियाड में कबड्डी का मिलेगा गोल्ड:संजीव
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:33 AM IST
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जकार्ता एशियाड में कबड्डी में गोल्ड की आस
मुजफ्फरनगर। एशियाई खेलों में कबड्डी में भारतीय टीम अभी तक अजेय है। सात बार स्वर्ण पदक देश की झोली में आ चुका है। जकार्ता एशियाड में भी भारतीय खिलाड़ी अपना दबदबा कायम रखेंगे। कबड्डी टीम के प्रदर्शन को लेकर बेफिक्र पूर्व कप्तान संजीव कुमार ने ये बात कही है। उनकी निगाहें में पाकिस्तान और ईरान से कड़ी चुनौती मिलेगी।
पुरुष कबड्डी को वर्ष 1990 में बीजिंग एशियाड में पहली बार शामिल किया गया, तब से अभी तक लगातार सोने का तमगा भारत ने जीता है। भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान संजीव कुमार ने बैंकाक और बुसान एशियाई खेलों में देश को गोल्ड दिलाया था। जकार्ता में प्रारंभ हुए एशियन गेम्स में कबड्डी में भारत की स्वर्ण पदक की दावेदारी सबसे मजबूत है। अर्जुन अवार्डी संजीव बताते हैं कि कबड्डी ही ऐसा खेल है, जिसमें भारत का एशियाड में वर्चस्व रहा है। अजय ठाकुर के नेतृत्व में पूरी टीम का फाइनल जीतने का लक्ष्य है। ईरान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, दक्षिणी कोरिया से कड़ी चुनौती मिलेगी। दुबई में कबड्डी मास्टर्स टूर्नामेंट जीतने के बाद से भारतीय टीम का हौसला बढ़ा हुआ है। ऐसे में प्रतिद्वंद्वी टीमों की हर चुनौती का भारतीय खिलाड़ी बेहतर तरीके से सामना करेंगे। वर्ष 1998 में बैंकाक एशियाड की सुनहरी यादें उनके जेहन में बसी है। फाइनल में पाक के विरुद्ध जीत से जो खुशी मिली थी, वो बयान नहीं की जा सकती। चार साल बाद बुसान एशियाई खेलों में बांग्लादेश को हरा कर स्वर्ण पदक जीता था। उस वक्त टीम के कप्तान रहे राममेहर सिंह जकार्ता गई टीम के कोच हैं। उनके अनुभव का भारत को फायदा मिलेगा। वह मानते हैं कि भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत उसके डिफेंडर खिलाड़ी है, जो विपक्षी टीम को मौका ही नहीं देते। अनुभवी ऑल राउंडर मोहित छिल्लर, प्रदीप नरवाल, बिजनौर के राहुल चौधरी, मोनू, संदीप नरवाल, दीपक हुड्डा आदि से शानदार प्रदर्शन की उम्मीदें है। संजीव कहते हैं कि कबड्डी अब ग्लैमर से जुड़ गया है। हमारे दौर में ऐसा नहीं था। प्रो-कबड्डी लीग की नीलामी में खिलाड़ी डेढ़ करोड़ तक की कीमत पा रहे हैं। पैसा आने से कबड्डी में बदलाव आ गया है और खिलाड़ियों की सोच भी प्रोफेशनल हो गई है। अच्छी खुराक और बेहतर उपचार मिलने लगा है। युवा कबड्डी में उम्दा भविष्य ढूंढने लगे है।
मुंडभर की मिट्टी में सीखी कबड्डी
मुजफ्फरनगर। सिसौली क्षेत्र के गांव मुंडभर निवासी किसान मांगेराम बालियान के पुत्र संजीव कुमार ने कबड्डी में ऊंचाईयां हासिल की है। वर्ष 1997 में उन्होंने राष्ट्रीय खेलों और फेडरेशन कप में आगाज किया। उनकी कप्तानी में भारत ने इस्लामाबाद में वर्ष 2004 में आयोजित सेफ खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उसी साल मुंबई में हुए पहले कबड्डी वर्ल्ड कप में देश ने गोल्ड हासिल किया था। फिलहाल वे गाजियाबाद में रेलवे में मुख्य टिकट निरीक्षक हैं। हाल ही में सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल रामनाईक ने उन्हें लखनऊ में सम्मानित किया था।
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मुजफ्फरनगर। एशियाई खेलों में कबड्डी में भारतीय टीम अभी तक अजेय है। सात बार स्वर्ण पदक देश की झोली में आ चुका है। जकार्ता एशियाड में भी भारतीय खिलाड़ी अपना दबदबा कायम रखेंगे। कबड्डी टीम के प्रदर्शन को लेकर बेफिक्र पूर्व कप्तान संजीव कुमार ने ये बात कही है। उनकी निगाहें में पाकिस्तान और ईरान से कड़ी चुनौती मिलेगी।
पुरुष कबड्डी को वर्ष 1990 में बीजिंग एशियाड में पहली बार शामिल किया गया, तब से अभी तक लगातार सोने का तमगा भारत ने जीता है। भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान संजीव कुमार ने बैंकाक और बुसान एशियाई खेलों में देश को गोल्ड दिलाया था। जकार्ता में प्रारंभ हुए एशियन गेम्स में कबड्डी में भारत की स्वर्ण पदक की दावेदारी सबसे मजबूत है। अर्जुन अवार्डी संजीव बताते हैं कि कबड्डी ही ऐसा खेल है, जिसमें भारत का एशियाड में वर्चस्व रहा है। अजय ठाकुर के नेतृत्व में पूरी टीम का फाइनल जीतने का लक्ष्य है। ईरान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, दक्षिणी कोरिया से कड़ी चुनौती मिलेगी। दुबई में कबड्डी मास्टर्स टूर्नामेंट जीतने के बाद से भारतीय टीम का हौसला बढ़ा हुआ है। ऐसे में प्रतिद्वंद्वी टीमों की हर चुनौती का भारतीय खिलाड़ी बेहतर तरीके से सामना करेंगे। वर्ष 1998 में बैंकाक एशियाड की सुनहरी यादें उनके जेहन में बसी है। फाइनल में पाक के विरुद्ध जीत से जो खुशी मिली थी, वो बयान नहीं की जा सकती। चार साल बाद बुसान एशियाई खेलों में बांग्लादेश को हरा कर स्वर्ण पदक जीता था। उस वक्त टीम के कप्तान रहे राममेहर सिंह जकार्ता गई टीम के कोच हैं। उनके अनुभव का भारत को फायदा मिलेगा। वह मानते हैं कि भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत उसके डिफेंडर खिलाड़ी है, जो विपक्षी टीम को मौका ही नहीं देते। अनुभवी ऑल राउंडर मोहित छिल्लर, प्रदीप नरवाल, बिजनौर के राहुल चौधरी, मोनू, संदीप नरवाल, दीपक हुड्डा आदि से शानदार प्रदर्शन की उम्मीदें है। संजीव कहते हैं कि कबड्डी अब ग्लैमर से जुड़ गया है। हमारे दौर में ऐसा नहीं था। प्रो-कबड्डी लीग की नीलामी में खिलाड़ी डेढ़ करोड़ तक की कीमत पा रहे हैं। पैसा आने से कबड्डी में बदलाव आ गया है और खिलाड़ियों की सोच भी प्रोफेशनल हो गई है। अच्छी खुराक और बेहतर उपचार मिलने लगा है। युवा कबड्डी में उम्दा भविष्य ढूंढने लगे है।
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मुंडभर की मिट्टी में सीखी कबड्डी
मुजफ्फरनगर। सिसौली क्षेत्र के गांव मुंडभर निवासी किसान मांगेराम बालियान के पुत्र संजीव कुमार ने कबड्डी में ऊंचाईयां हासिल की है। वर्ष 1997 में उन्होंने राष्ट्रीय खेलों और फेडरेशन कप में आगाज किया। उनकी कप्तानी में भारत ने इस्लामाबाद में वर्ष 2004 में आयोजित सेफ खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उसी साल मुंबई में हुए पहले कबड्डी वर्ल्ड कप में देश ने गोल्ड हासिल किया था। फिलहाल वे गाजियाबाद में रेलवे में मुख्य टिकट निरीक्षक हैं। हाल ही में सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल रामनाईक ने उन्हें लखनऊ में सम्मानित किया था।
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