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घाटा सहना मंजूर पर लगाम नहीं लगाएंगे

Sun, 21 Jan 2018 12:53 AM IST
Updated Sun, 21 Jan 2018 12:53 AM IST
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घाटा सहना मंजूर पर लगाम नहीं लगाएंगे
मुजफ्फरनगर।
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जिले में फर्जी रोडवेज बसों का संचालन खूब हो रहा है। इन बसों के कारण डिपो को रोजाना तीन लाख रुपये तक की चपत लग रही है। फर्जी बसों की धरपकड़ के लिए एआरटीओ, पुलिस और ट्रैफिक यातायात के पास कोई मजबूत प्लान नहीं है। इसी का लाभ उठाकर डग्गामार संचालक मौज कर रहे हैं।
परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और प्रबंधक निदेशक पी गुरु प्रसाद कई मर्तबा डग्गामारी को लेकर एतराज जता चुके हैं। जिले में यूं तो करीब 700 से अधिक वाहन डग्गामारी में शामिल पाए गए हैं, लेकिन इनमें कुछ बसों का रंग-रूप एकदम रोडवेज बस जैसा है। प्राइवेट बस संचालकों ने अपनी बसों पर यूपीआरटीसी के बजाय यूपीटीजीसी आदि अंकित करा रखा है, जबकि कलर भी लाल और नीला है, जिसके चलते बस सीधे तौर पर यात्री परिहवन की समझते हैं। जिसमें सवार होने पर इनकी हकीकत का पता चलता है। यह बस जिले में मकड़जाल की तरह फैली है, जो हर रूट पर चलती है। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला नहीं है। एआरटीओ, यातायात के साथ पुलिस ने जान-बूझकर आंखें मूंदी हुई हैं।
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एक माह में करोड़ की चपत
मुजफ्फरनगर। इन फर्जी रोडवेज बसों के संचालन से रोजाना परिवहन निगम को तीन से पांच लाख रुपये की चपत लग रही है, जबकि एक माह में करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान डिपो को इन समानांतर बसों के कारण उठाना पड़ रहा है। कई बार कार्रवाई के लिए लिखा गया, लेकिन एआरटीओ विभाग इस पर सही कार्रवाई नहीं कर सका है।
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इन रूट पर चल रही फर्जी बस
मुजफ्फरनगर। रोडवेज जैसी फर्जी बस रुड़की-सहारनपुर मार्ग, शामली रोड, मेरठ रोड, चरथावल रोड, भोपा-जानसठ रोड और बिजनौर मार्ग पर संचालित हो रही हैं। प्राइवेट बस संचालक अफसरों की आंखों में धूल झोंककर सुबह से लेकर रात तक बस दौड़ा रहे हैं।
सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता निगम
एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि परिवहन निगम इन फर्जी बसों पर सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता है। सर्वे करने के बाद सूची और डिटेल एआरटीओ के सुपुर्द की जाती है। इन बसों पर कार्रवाई के लिए एआरटीओ, ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी है। जांच कराई जा रही है, फिर से सूची बनाकर मुख्यालय को भेजी जाएगी।

लगातार अभियान चला रहा विभाग
एआरटीओ प्रवर्तन सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि फर्जी रोडवेज बसों के साथ डग्गामार वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान बस संचालन रूट से बस हटा लेते हैं। दो-तीन बाद फिर शुरू कर देते हैं। इस बार बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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