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मेले में घट रही महिला श्रद्धालुओं की तादाद
Updated Thu, 02 Nov 2017 01:26 AM IST
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मेले में घट रही महिला श्रद्धालुओं की तादाद
भोपा (मुजफ्फरनगर)। कुछ नशेड़ियों और हुड़दंगियों की वजह से शुक्रताल गंगा स्नान मेले में महिला श्रद्धालुओं की संख्या लगातार घटती जा रही है। यही कारण है कि शुक्रताल तीर्थनगरी की धर्मशालाओं और आश्रमों के दरवाजे भी मुख्य स्नान पर्व से पूर्व ही बंद कर दिए जाते हैं। पुलिस चेकिंग करती है, इसके बावजूद नशेड़ियों का प्रवेश मेले में नहीं रुक पाता है।
शुकदेव मुनी की तपोस्थली शुक्रताल देशभर में जानी जाती है। यहां हजारों वर्ष पूर्व शुकदेव मुनी ने राजा परीक्षित को वटवृक्ष के नीचे बैठकर कथा का अमृतपान कराया था। शुकदेव आश्रम में आज भी वह वटवृक्ष हजारों साल पुरानी गाथा का वर्णन करता है। हनुमद्धाम, गणेशधाम, शिवधाम, दुर्गाधाम, शुकदेव आश्रम, दंडी आश्रम, महेश्वराश्रम में दर्शनों के लिए श्रद्धालु दूरदराज से यहां पहुंचते हैं। तीन सदी के युगदृष्टा शिक्षाऋषि स्वामी कल्याण देव जैसे महान संतों के अथक प्रयासों से यह तीर्थनगरी ख्याती प्राप्त कर चुकी है। तीर्थनगरी शुक्रताल में एक वर्ष में कार्तिक गंगा स्नान मेला, गंगा दशहरा मेले का आयोजन होता है। कुछ वर्षों पूर्व गंगा स्नान मेले में पुरुषों की अपेक्षा महिला भक्तों की संख्या अधिक रहती थी, लेकिन कुछ नशेड़ियों, हुड़दंगियों की वजह से महिला श्रद्धालुओं की संख्या हो गई है। यही कारण है कि मुख्य स्नान से पहले ही अधिकांश धर्मशालाओं और आश्रमों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। गंगा स्नान मेले की गरिमा और आस्था को बचाए रखने के लिए मेला प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
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भोपा (मुजफ्फरनगर)। कुछ नशेड़ियों और हुड़दंगियों की वजह से शुक्रताल गंगा स्नान मेले में महिला श्रद्धालुओं की संख्या लगातार घटती जा रही है। यही कारण है कि शुक्रताल तीर्थनगरी की धर्मशालाओं और आश्रमों के दरवाजे भी मुख्य स्नान पर्व से पूर्व ही बंद कर दिए जाते हैं। पुलिस चेकिंग करती है, इसके बावजूद नशेड़ियों का प्रवेश मेले में नहीं रुक पाता है।
शुकदेव मुनी की तपोस्थली शुक्रताल देशभर में जानी जाती है। यहां हजारों वर्ष पूर्व शुकदेव मुनी ने राजा परीक्षित को वटवृक्ष के नीचे बैठकर कथा का अमृतपान कराया था। शुकदेव आश्रम में आज भी वह वटवृक्ष हजारों साल पुरानी गाथा का वर्णन करता है। हनुमद्धाम, गणेशधाम, शिवधाम, दुर्गाधाम, शुकदेव आश्रम, दंडी आश्रम, महेश्वराश्रम में दर्शनों के लिए श्रद्धालु दूरदराज से यहां पहुंचते हैं। तीन सदी के युगदृष्टा शिक्षाऋषि स्वामी कल्याण देव जैसे महान संतों के अथक प्रयासों से यह तीर्थनगरी ख्याती प्राप्त कर चुकी है। तीर्थनगरी शुक्रताल में एक वर्ष में कार्तिक गंगा स्नान मेला, गंगा दशहरा मेले का आयोजन होता है। कुछ वर्षों पूर्व गंगा स्नान मेले में पुरुषों की अपेक्षा महिला भक्तों की संख्या अधिक रहती थी, लेकिन कुछ नशेड़ियों, हुड़दंगियों की वजह से महिला श्रद्धालुओं की संख्या हो गई है। यही कारण है कि मुख्य स्नान से पहले ही अधिकांश धर्मशालाओं और आश्रमों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। गंगा स्नान मेले की गरिमा और आस्था को बचाए रखने के लिए मेला प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
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