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बोले स्वाती ओमानंद, अधीरता के बंधन से छूटना ही मोक्ष है
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मोरना। शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम में ब्रह्मलीन शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव महाराज की 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर समाधि मंदिर में साप्ताहिक भागवत कथा शुभारंभ करते हुए पीठाधिश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि लोकहित का ज्ञान यज्ञ भागवत है, सत्य ही भागवत का संपूर्ण रहस्य है। भागवत मोक्ष प्रदाता है, मोक्ष को जीवन के परम उद्देश्य के रूप में स्वीकार किया गया है। शरीर और मन की अधीरता के बंधन से छूटना ही मोक्ष है। मोक्ष का अधिकारी वही है, जो पूर्ण रूप से निस्वार्थ भाव से सेवा में तल्लीन रहता हो।
स्वामी कल्याण देव के विषय में उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने संत परंपरा के गौरव थे। वह प्रमार्थ की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। उनका पवित्र और वंदनीय जीवन संपूर्ण मानव जाति के लिए एक वरदान एवं प्ररेणा का स्रोत है। चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी अमूल्य सेवाएं तथा मनुष्य कल्याण के लिए शुकतीर्थ जैसे पवित्रतीर्थ स्थल का जीर्णोद्वार कर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। इस अवसर पर भागवत कथा व्यास अचल शास्त्री का तिलक कर, माल्यार्पण करते हुए भागवत पोथी का पूजन किया। कथा के शुभारंभ पर स्वामी भरतदेव महाराज, गिरीश उतप्रेती, शैलेश चोरसिया, आचार्य आशीष माधव, सुमन कृष्ण शास्त्री, प्रदीप, ठाकुर, विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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स्वामी कल्याण देव के विषय में उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने संत परंपरा के गौरव थे। वह प्रमार्थ की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। उनका पवित्र और वंदनीय जीवन संपूर्ण मानव जाति के लिए एक वरदान एवं प्ररेणा का स्रोत है। चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी अमूल्य सेवाएं तथा मनुष्य कल्याण के लिए शुकतीर्थ जैसे पवित्रतीर्थ स्थल का जीर्णोद्वार कर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। इस अवसर पर भागवत कथा व्यास अचल शास्त्री का तिलक कर, माल्यार्पण करते हुए भागवत पोथी का पूजन किया। कथा के शुभारंभ पर स्वामी भरतदेव महाराज, गिरीश उतप्रेती, शैलेश चोरसिया, आचार्य आशीष माधव, सुमन कृष्ण शास्त्री, प्रदीप, ठाकुर, विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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