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जंजीर, छुर्रियों, तलवारों से दिल दहलाने वाला मातम
Updated Sat, 22 Sep 2018 12:10 AM IST
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कर्बला में ताजिये दफनाए गए, मातम किया
मुजफ्फरनगर।
हजरत इमाम हुसैन और उनके जानशीनों की याद में शिया सोगवारों ने खूनी मातम कर खिराजे अकीदत पेश की। जंजीर, छुरियों, तलवारों से शिया सोगवारों ने मातम किया। देर रात काली नदी पर करबला में ताजिये दफनाए गए।
शहर में एक मोहर्रम से चली आ रही मजलिसों और जुलूसों का सिलसिला खत्म हो गया। सुबह नौ बजे काली नदी स्थित मेला घाट नमाजगाह पर रोजे आशूरा आमाल और नमाज मौलाना अफसर अली ने अदा कराई। इस मौके पर इंतजार जैदी ने कहा कि हजरत इनाम हुसैन जिनको इराक के करबला नामक शहर पर सीरिया के शासक यजीद ने अत्यंत बर्बरता के साथ इमामे हुसैन और उनके जानशीनों और रिश्तेदारों को शहीद कर दिया था। इमामे हुसैन के छह माह के बेटे हजरत अली असगर, 18 वर्षीय हजरत अली अकबर, भाई हजरत अब्बास, भतीजे हजरत कासिम और अजीत रिश्तदारों सहित 72 साथियों को हजारों यजीदी सैनिकों ने तीन दिन तक भूखा प्यासा रखने के बाद बड़ी बेदर्दी के साथ नमाज पढ़ते वक्त शहीद कर दिया। हजरत इमाम हुसैन की कब्र पर जो भवन बना है उसी भवन के आकार का एक छोटा सा भवन कागज और बांस की तिल्लियों से बनाकर शिया सोगवार इमाम हुसैन को याद करते हैं। इसी को ताजिया कहते हैं। इमाम बारगाह मल्हूपुरा, लद्दावाला अंजुमने खादिमे हुसैन सुन्नत वल जमात के नोहाखान, सलीम अहमद, वसीम साबर, रफीक खैरी, जावेद सोनू, मेहराज वारसी, नोहाख्वानी कर रहे थे। नियाजुपुरा, मिमलाना के मातमी जुलूस मोतीमहल के मुख्य जुलूस में शामिल हुए। यहां से शहर की सभी मातमी अंजूमनों ने नोहाख्वानी करते हुए हनुमान चौक पर जंजीरों, छुर्रियों और तलवारों से दिल दहला देने वाला मातम किया। मातम को देखने वाले लोग भी खामोश हो गए। नोहाख्वानी असकरी, शादाब खां, साहबे आलम, शाजम, सोनू, शबी हैदर, लारेब आदि नदी रोड से होते हुए काली नदी पार स्थित करबला के मुतवल्ली हैदर मेहंदी, मास्टर सादिक की देखरेख में ताजिये सुपुर्द ए खाक किए गए। रात में शामे गरीबा यतीमों की रात एक मशाल जुलूस मोतीमहल इमामबाड़ा यादगारे हुसैनी पहुंचा। यहीं पर शामे गरीबा की मजलिस अदा की गई। मातमी जुलूसों को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।
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मुजफ्फरनगर।
हजरत इमाम हुसैन और उनके जानशीनों की याद में शिया सोगवारों ने खूनी मातम कर खिराजे अकीदत पेश की। जंजीर, छुरियों, तलवारों से शिया सोगवारों ने मातम किया। देर रात काली नदी पर करबला में ताजिये दफनाए गए।
शहर में एक मोहर्रम से चली आ रही मजलिसों और जुलूसों का सिलसिला खत्म हो गया। सुबह नौ बजे काली नदी स्थित मेला घाट नमाजगाह पर रोजे आशूरा आमाल और नमाज मौलाना अफसर अली ने अदा कराई। इस मौके पर इंतजार जैदी ने कहा कि हजरत इनाम हुसैन जिनको इराक के करबला नामक शहर पर सीरिया के शासक यजीद ने अत्यंत बर्बरता के साथ इमामे हुसैन और उनके जानशीनों और रिश्तेदारों को शहीद कर दिया था। इमामे हुसैन के छह माह के बेटे हजरत अली असगर, 18 वर्षीय हजरत अली अकबर, भाई हजरत अब्बास, भतीजे हजरत कासिम और अजीत रिश्तदारों सहित 72 साथियों को हजारों यजीदी सैनिकों ने तीन दिन तक भूखा प्यासा रखने के बाद बड़ी बेदर्दी के साथ नमाज पढ़ते वक्त शहीद कर दिया। हजरत इमाम हुसैन की कब्र पर जो भवन बना है उसी भवन के आकार का एक छोटा सा भवन कागज और बांस की तिल्लियों से बनाकर शिया सोगवार इमाम हुसैन को याद करते हैं। इसी को ताजिया कहते हैं। इमाम बारगाह मल्हूपुरा, लद्दावाला अंजुमने खादिमे हुसैन सुन्नत वल जमात के नोहाखान, सलीम अहमद, वसीम साबर, रफीक खैरी, जावेद सोनू, मेहराज वारसी, नोहाख्वानी कर रहे थे। नियाजुपुरा, मिमलाना के मातमी जुलूस मोतीमहल के मुख्य जुलूस में शामिल हुए। यहां से शहर की सभी मातमी अंजूमनों ने नोहाख्वानी करते हुए हनुमान चौक पर जंजीरों, छुर्रियों और तलवारों से दिल दहला देने वाला मातम किया। मातम को देखने वाले लोग भी खामोश हो गए। नोहाख्वानी असकरी, शादाब खां, साहबे आलम, शाजम, सोनू, शबी हैदर, लारेब आदि नदी रोड से होते हुए काली नदी पार स्थित करबला के मुतवल्ली हैदर मेहंदी, मास्टर सादिक की देखरेख में ताजिये सुपुर्द ए खाक किए गए। रात में शामे गरीबा यतीमों की रात एक मशाल जुलूस मोतीमहल इमामबाड़ा यादगारे हुसैनी पहुंचा। यहीं पर शामे गरीबा की मजलिस अदा की गई। मातमी जुलूसों को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।
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