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प्रभु भक्ति में निष्काम भाव जरुरी
Updated Mon, 18 Dec 2017 12:26 AM IST
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प्रभु भक्ति में निष्काम भाव जरूरी
श्रीमद्भागवत कथा का समापन
(फोटो समाचार)
अमर उजाला ब्यूरो
मीरापुर। बालाजी धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर कथा व्यास पंडित खेमचंद कौशिक ने कृष्ण-सुदामा मित्रता सुनाकर उपस्थित जनसमूह को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से याद करने पर भगवान स्वयं मदद करने के लिये तैयार रहते हैं।
श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर कथाव्यास खेमचंद कौशिक ने अमृतवर्षा करते हुए कहा कि भगवान श्रद्धा व भाव के भूखे होते हैं। निष्काम भाव से याद करने पर भगवान स्वयं दौडे़ चले आते हैं। उन्होंने सुदामा चरित्र का सुंदर संगीतमय वर्णन करते हुए कहा कि गरीब ब्राह्मण सुदामा द्वारा भगवान कृष्ण को याद करने पर उन्होंने स्वयं आकर अपने बालसखा को उसके चरण पखार कर सम्मान दिया था। उन्होंने इस प्रकरण के माध्यम से बताया कि मित्रता का आधार स्वार्थ नहीं होना चाहिए। कथाव्यास ने गंगास्नान के महत्व को बताते हुए कहा कि गंगा स्नान करके आने वाले व्यक्ति के दर्शन करने से भी कल्याण होता है। इस अवसर पर पुष्पों से होली खेली गई। आयोजकों ने कथा में सहयोग करने वाले सभी कार्यकर्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। महाराज श्री ने समापन सबोधन में आशीर्वाद की महिमा को बताकर मानव कल्याण की कामना की। कथा व्यवस्था में मंदिर महंत राजपाल सुकरालिया, जगमोहन, सचिन पाल, विनोद कुमार, गजेंद्र प्रजापति, पंकज संगल, वासुदेव शर्मा, पंकज गोयल, मनोज वाजपेयी, मोहित कुमार, बिजेन्द्र डागा आदि सक्रिय रहे।
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श्रीमद्भागवत कथा का समापन
(फोटो समाचार)
अमर उजाला ब्यूरो
मीरापुर। बालाजी धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर कथा व्यास पंडित खेमचंद कौशिक ने कृष्ण-सुदामा मित्रता सुनाकर उपस्थित जनसमूह को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से याद करने पर भगवान स्वयं मदद करने के लिये तैयार रहते हैं।
श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर कथाव्यास खेमचंद कौशिक ने अमृतवर्षा करते हुए कहा कि भगवान श्रद्धा व भाव के भूखे होते हैं। निष्काम भाव से याद करने पर भगवान स्वयं दौडे़ चले आते हैं। उन्होंने सुदामा चरित्र का सुंदर संगीतमय वर्णन करते हुए कहा कि गरीब ब्राह्मण सुदामा द्वारा भगवान कृष्ण को याद करने पर उन्होंने स्वयं आकर अपने बालसखा को उसके चरण पखार कर सम्मान दिया था। उन्होंने इस प्रकरण के माध्यम से बताया कि मित्रता का आधार स्वार्थ नहीं होना चाहिए। कथाव्यास ने गंगास्नान के महत्व को बताते हुए कहा कि गंगा स्नान करके आने वाले व्यक्ति के दर्शन करने से भी कल्याण होता है। इस अवसर पर पुष्पों से होली खेली गई। आयोजकों ने कथा में सहयोग करने वाले सभी कार्यकर्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। महाराज श्री ने समापन सबोधन में आशीर्वाद की महिमा को बताकर मानव कल्याण की कामना की। कथा व्यवस्था में मंदिर महंत राजपाल सुकरालिया, जगमोहन, सचिन पाल, विनोद कुमार, गजेंद्र प्रजापति, पंकज संगल, वासुदेव शर्मा, पंकज गोयल, मनोज वाजपेयी, मोहित कुमार, बिजेन्द्र डागा आदि सक्रिय रहे।
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