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सनातन धर्म की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से ही होगा अभ्युदय
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:36 AM IST
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धर्म के आधार पर होती है राष्ट्र की पहचान
मुजफ्फरनगर। सनातन धर्म की राष्ट्रीय स्तर पर विधिक प्रतिष्ठा होने से ही भारत राष्ट्र का उत्कर्ष होगा। हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक एवं संत डॉ चारुदत्त पिंगले ने कहा कि देश को विधिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करना शासन का कर्तव्य है।
नई मंडी स्थित भागवंती सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के सभागार में हिंदू जनजागृति समिति और विद्या मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत हिंदू राष्ट्र है। बहुसंख्यक लोगों के धर्म के आधार पर ही राष्ट्र की पहचान होती है। डॉक्टर पिंगले ने कहा कि विधिक रुप से बहुसंख्यकों का धर्म ही राष्ट्रीयता का आधार हो, यही विश्वव्यापी स्थिति है और भारत में भी यह होना चाहिए । इतिहासकार एवं समाज वैज्ञानिक प्रोफेसर रामेश्वर मिश्र पंकज ने कहा कि यूरोप का हर राष्ट्र ईसाईयत के किसी न किसी पंथ का अधिकृत वैधानिक संरक्षक है । प्रत्येक मुस्लिम देश इस्लाम का अधिकारिक संरक्षक है और प्रत्येक बौद्ध देश बौद्ध धर्म का अधिकृत वैधानिक संरक्षक है। अत: भारत के शासन का कर्तव्य है कि वह सनातन धर्म को संरक्षण दे तथा यहां की शिक्षा और न्याय व्यवस्था में सनातन धर्म की परंपराओं का ही आधार लेकर उसकी रूपरेखा निश्चित करें । पंकज ने सुझाव दिया कि इसका एक सरल मार्ग है कि भारत के वर्तमान संविधान में भाग 4 अनुच्छेद 38 में एक उपबंध जोड़ दिया जाए कि भारत का राज्य भारत के बहुसंख्यकों के धर्म को भी वैसा ही संरक्षण देगा ,जैसा वह अल्पसंख्यकों के मजहबों को देता है। संचालन महामृत्युंजय मिशन संयोजक संजीव शर्मा ने किया। डॉक्टर प्रीति चौधरी ने आभार जताया। प्राचार्या डॉ सुनीता गौड़ ने सभी का स्वागत किया। संगोष्ठी को आयुर्वेद तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति के चेयरमैन डॉ सुभाषचंद्र शर्मा, जयपाल सिंह और डॉ एमके तनेजा ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी में सुधीर गर्ग, अन्नू अग्रवाल, नीरू शर्मा, आदित्य आर्य, शैलजा सिंह, रागनी गर्ग, अरुणा गर्ग, अस्मिता शर्मा आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। सनातन धर्म की राष्ट्रीय स्तर पर विधिक प्रतिष्ठा होने से ही भारत राष्ट्र का उत्कर्ष होगा। हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक एवं संत डॉ चारुदत्त पिंगले ने कहा कि देश को विधिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करना शासन का कर्तव्य है।
नई मंडी स्थित भागवंती सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के सभागार में हिंदू जनजागृति समिति और विद्या मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत हिंदू राष्ट्र है। बहुसंख्यक लोगों के धर्म के आधार पर ही राष्ट्र की पहचान होती है। डॉक्टर पिंगले ने कहा कि विधिक रुप से बहुसंख्यकों का धर्म ही राष्ट्रीयता का आधार हो, यही विश्वव्यापी स्थिति है और भारत में भी यह होना चाहिए । इतिहासकार एवं समाज वैज्ञानिक प्रोफेसर रामेश्वर मिश्र पंकज ने कहा कि यूरोप का हर राष्ट्र ईसाईयत के किसी न किसी पंथ का अधिकृत वैधानिक संरक्षक है । प्रत्येक मुस्लिम देश इस्लाम का अधिकारिक संरक्षक है और प्रत्येक बौद्ध देश बौद्ध धर्म का अधिकृत वैधानिक संरक्षक है। अत: भारत के शासन का कर्तव्य है कि वह सनातन धर्म को संरक्षण दे तथा यहां की शिक्षा और न्याय व्यवस्था में सनातन धर्म की परंपराओं का ही आधार लेकर उसकी रूपरेखा निश्चित करें । पंकज ने सुझाव दिया कि इसका एक सरल मार्ग है कि भारत के वर्तमान संविधान में भाग 4 अनुच्छेद 38 में एक उपबंध जोड़ दिया जाए कि भारत का राज्य भारत के बहुसंख्यकों के धर्म को भी वैसा ही संरक्षण देगा ,जैसा वह अल्पसंख्यकों के मजहबों को देता है। संचालन महामृत्युंजय मिशन संयोजक संजीव शर्मा ने किया। डॉक्टर प्रीति चौधरी ने आभार जताया। प्राचार्या डॉ सुनीता गौड़ ने सभी का स्वागत किया। संगोष्ठी को आयुर्वेद तथा यूनानी चिकित्सा पद्धति के चेयरमैन डॉ सुभाषचंद्र शर्मा, जयपाल सिंह और डॉ एमके तनेजा ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी में सुधीर गर्ग, अन्नू अग्रवाल, नीरू शर्मा, आदित्य आर्य, शैलजा सिंह, रागनी गर्ग, अरुणा गर्ग, अस्मिता शर्मा आदि मौजूद रहे।
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