{"_id":"5ac3c9594f1c1bd6618b5494","slug":"161522780505-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल में आधी अधूरी तैयारी के साथ सत्र शुरु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल में आधी अधूरी तैयारी के साथ सत्र शुरु
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भोपा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय माडल स्कूल सिकंदरपुर का आधी अधूरी तैयारी के साथ सत्र 2018 शुरू किया गया। इस स्कूल में केवल एक अध्यापक व एक बाबू की तैनात की गई है। इतना ही नहीं चहारदीवारी तक नहीं है तथा बिजली, पानी व फर्नीचर की सुविधा से भी दूर है।
मोरना विकास खंड के गांव सिकंदरपुर में 2011 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय माडल स्कूल का शिलान्यास हुआ था, जिसके निर्माण में करोड़ों रुपये का बजट पारित किया गया। 2018-19 का शिक्षा सत्र दो अप्रैल को प्रारंभ हो गया। प्रधान मेनपाल, चेयरमैन राजीव कुमार, योगेश, शिवा, दिलबाहर अंसारी, प्रधान इरफान उर्फ ऐप्पी आदि ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में जहां पूरी तरह से गंदगी फैली हुई है, वहीं अभी तक स्कूल में पानी, बिजली, फर्नीचर का अभाव है। यहां तक कि चहारदीवारी भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की समस्त जरूरतों को शीघ्र पूरा करना चाहिए, ताकि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को किसी भी समस्या का सामना ना करना पड़े और करोड़ों रुपए की लागत से बने इस स्कूल का संचालन सही तरीके से हो। यहां स्टॉफ की बात करें तो यहां केवल एक बाबू व एक अध्यापक की तैनाती की गई है। वो भी संबद्ध किए गए हैं। पहले दिन एक भी बच्चे का एडमिशन नहीं हो सका था।
विज्ञापन
मोरना विकास खंड के गांव सिकंदरपुर में 2011 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय माडल स्कूल का शिलान्यास हुआ था, जिसके निर्माण में करोड़ों रुपये का बजट पारित किया गया। 2018-19 का शिक्षा सत्र दो अप्रैल को प्रारंभ हो गया। प्रधान मेनपाल, चेयरमैन राजीव कुमार, योगेश, शिवा, दिलबाहर अंसारी, प्रधान इरफान उर्फ ऐप्पी आदि ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में जहां पूरी तरह से गंदगी फैली हुई है, वहीं अभी तक स्कूल में पानी, बिजली, फर्नीचर का अभाव है। यहां तक कि चहारदीवारी भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की समस्त जरूरतों को शीघ्र पूरा करना चाहिए, ताकि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को किसी भी समस्या का सामना ना करना पड़े और करोड़ों रुपए की लागत से बने इस स्कूल का संचालन सही तरीके से हो। यहां स्टॉफ की बात करें तो यहां केवल एक बाबू व एक अध्यापक की तैनाती की गई है। वो भी संबद्ध किए गए हैं। पहले दिन एक भी बच्चे का एडमिशन नहीं हो सका था।
विज्ञापन