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देश के पास मानव कल्याण के लिए खजाना: ओमानंद
Updated Fri, 23 Feb 2018 12:12 AM IST
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देश के पास मानव कल्याण के लिए खजाना: ओमानंद
मोरना। शुक्रताल में शुकदेव आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी ओमानंद जी महाराज कहा कि भारत के पास मानव जाति के कल्याण लिए आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाशपुंज व खजाना है, इसलिए पूरी दुनियां के देशों के लोग यहां आत्म शांति, भागवत कथा का श्रवण, आध्यात्मिक ज्ञान तथा योग साधना के लिए देश आते हैं।
उन्होंने कहा कि भागवत भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति एवं दैवीय संस्कृति के चिंतन की पोषक तथा अमूल्य निधि है। भागवत जीवन को प्राणबान बनाती है। भागवत सत्य का मार्ग दर्शन कर मानव को संबल प्रदान करती है। जीवन में अलौकिक ज्ञान की अलख जगाकर मुश्किलों को आसान करती है। आत्मकल्याण के जितने भी साधन हैं, उनमें भागवत कथा सत्संग, सर्वोत्तम, सरल, सुविधाजनक और सब से ज्यादा फलदायी है। परम शांति, जीवन मुक्ति तथा प्रभु की भक्ति प्राप्त कर लेना ही जीवन का मूलभूत लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए प्रभु भजन साथ ही भगवान पर भरोसा आवश्यक है। प्रभु पर विश्वास की शक्ति भागवत कथा श्रवण से मिलती है। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा प्रत्येक परिस्थितियों में भजन करने में कठिनाइयां हो सकती है, जैसे शारीरिक कमजोरी, वृद्धावस्था, बीमारी आदि के कारण। हालांकि हर परिस्थिति में प्रभु का विश्वास किया जा सकता है। भक्ति की भव्यता को समझने की शक्ति भागवत से मिलती है। इस अवसर पर नेपाल के महेंद्र नगर से पधारें कथा व्यास आचार्य हरि प्रपन्नाचार्य जी को सम्मानित कर दीप प्रज्जवलन स्वामी ओमानन्द जी ने किया। आचार्य रामानुजाचार्य देवराज, शुकतीर्थ के स्वामी विष्णु रामानुजाचार्य, धरणी धर आचार्य, टंकप्रसाद जोशी, मंजू भंडारी, माधवी पौडेल, शारंड शास्त्री, सिद्धराज भटट, गोदा देवी, सुमन कृष्ण शास्त्री, हर्षमणी, राजू आदि का सहयोग रहा।
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मोरना। शुक्रताल में शुकदेव आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी ओमानंद जी महाराज कहा कि भारत के पास मानव जाति के कल्याण लिए आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाशपुंज व खजाना है, इसलिए पूरी दुनियां के देशों के लोग यहां आत्म शांति, भागवत कथा का श्रवण, आध्यात्मिक ज्ञान तथा योग साधना के लिए देश आते हैं।
उन्होंने कहा कि भागवत भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति एवं दैवीय संस्कृति के चिंतन की पोषक तथा अमूल्य निधि है। भागवत जीवन को प्राणबान बनाती है। भागवत सत्य का मार्ग दर्शन कर मानव को संबल प्रदान करती है। जीवन में अलौकिक ज्ञान की अलख जगाकर मुश्किलों को आसान करती है। आत्मकल्याण के जितने भी साधन हैं, उनमें भागवत कथा सत्संग, सर्वोत्तम, सरल, सुविधाजनक और सब से ज्यादा फलदायी है। परम शांति, जीवन मुक्ति तथा प्रभु की भक्ति प्राप्त कर लेना ही जीवन का मूलभूत लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए प्रभु भजन साथ ही भगवान पर भरोसा आवश्यक है। प्रभु पर विश्वास की शक्ति भागवत कथा श्रवण से मिलती है। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा प्रत्येक परिस्थितियों में भजन करने में कठिनाइयां हो सकती है, जैसे शारीरिक कमजोरी, वृद्धावस्था, बीमारी आदि के कारण। हालांकि हर परिस्थिति में प्रभु का विश्वास किया जा सकता है। भक्ति की भव्यता को समझने की शक्ति भागवत से मिलती है। इस अवसर पर नेपाल के महेंद्र नगर से पधारें कथा व्यास आचार्य हरि प्रपन्नाचार्य जी को सम्मानित कर दीप प्रज्जवलन स्वामी ओमानन्द जी ने किया। आचार्य रामानुजाचार्य देवराज, शुकतीर्थ के स्वामी विष्णु रामानुजाचार्य, धरणी धर आचार्य, टंकप्रसाद जोशी, मंजू भंडारी, माधवी पौडेल, शारंड शास्त्री, सिद्धराज भटट, गोदा देवी, सुमन कृष्ण शास्त्री, हर्षमणी, राजू आदि का सहयोग रहा।
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