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गुप्त नवरात्रों के कार्यक्रम का समापन
Updated Mon, 29 Jan 2018 12:02 AM IST
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मोरना। शुक्रताल स्थित माता पूर्णा गिरि आदि शक्ति पीठ आश्रम में गुप्त नवरात्रों के कार्यक्रम का हवन, पूजा-अर्चना और भजन कीर्तन के साथ समापन हो गया। इस मौके पर आयोजित भंडारे का प्रसाद साधु संतों के बीच वितरित किया गया और उन्हें दान दक्षिणा भी दी गई।
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर गोपालाचार्य ने कहा कि जीव संसार में आनंद को खोजता है। संसार में सुख और दुख को भोगता है। संयोग-वियोग का महादुख है, जिसके साथ रहने की इच्छा आपको है। वह आपसे दूर हो जाता है, जिसके साथ आपको रहने इच्छा नहीं है, आपको उसके साथ रहना पड़ता है। जिसका संयोग सुख देता है, उसका वियोग दुख भी देता है। जीव का ईश्वर के साथ नित्य संयोग है, जो जीव एक बार भगवान को मिलता है, उसको भगवान का कभी वियोग नहीं होता है। प्रभु के पास जाने के दो मार्ग हैं। ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग। ज्ञान मार्ग में ज्ञानी पुरुष सबका त्याग कर देते हैं। इस मौके पर स्वामी कृपालदास महाराज ने हरी नाम का संकीर्तन कराते हुए मंत्रोचारण के बीच विशेष पूजा अर्चना संपन्न कराई। इस मौके पर डा. राकेश, सरला देवी, महेंद्री देवी, सोनम, कोमल, ममता सुरेशो, सरोज शर्मा, बिजेंद्री, सुरेश, अमित राठी, मोहित, मंयक, रजत आदि उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम में महामंडलेश्वर गोपालाचार्य ने कहा कि जीव संसार में आनंद को खोजता है। संसार में सुख और दुख को भोगता है। संयोग-वियोग का महादुख है, जिसके साथ रहने की इच्छा आपको है। वह आपसे दूर हो जाता है, जिसके साथ आपको रहने इच्छा नहीं है, आपको उसके साथ रहना पड़ता है। जिसका संयोग सुख देता है, उसका वियोग दुख भी देता है। जीव का ईश्वर के साथ नित्य संयोग है, जो जीव एक बार भगवान को मिलता है, उसको भगवान का कभी वियोग नहीं होता है। प्रभु के पास जाने के दो मार्ग हैं। ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग। ज्ञान मार्ग में ज्ञानी पुरुष सबका त्याग कर देते हैं। इस मौके पर स्वामी कृपालदास महाराज ने हरी नाम का संकीर्तन कराते हुए मंत्रोचारण के बीच विशेष पूजा अर्चना संपन्न कराई। इस मौके पर डा. राकेश, सरला देवी, महेंद्री देवी, सोनम, कोमल, ममता सुरेशो, सरोज शर्मा, बिजेंद्री, सुरेश, अमित राठी, मोहित, मंयक, रजत आदि उपस्थित रहे।
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