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बारिश नहीं होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

Sun, 30 Jun 2019 12:16 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jun 2019 12:16 AM IST
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बारिश नहीं होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
बारिश नहीं होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
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मुजफ्फरनगर। मानसून में हो रही देरी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। जून का पूरा महीना सूूखा बीत गया। बारिश नहीं होने से फसलों को नुकसान होने लगा है। कुछ दिन से चल रही पछुवा हवा बारिश की उम्मीद पर पानी फेर रही है। भीषण गर्मी में बारिश का इंतजार करते हुए लोग बिलबिला उठे हैं।
सामान्य तौर पर 15 जून से बरसात का आगाज मान लिया जाता है। हर साल जून माह में दो-तीन अच्छी बारिश हो जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। जून का पूरा माह सूखा चला गया। एक दिन मामूली बूंदाबांदी जरूर हुई थी, लेकिन वह भी रिकार्ड में आने लायक नहीं थी। बारिश नहीं होने से फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। हालांकि जिले में सिंचाई के भरपूर साधन हैं। बिजली भी अच्छी आ रही है। नलकूप और रजबहों से फसलों की सिंचाई हो रही है, लेकिन बारिश के बिना फसलें एकदम मुरझा जाती हैं। लंबी होती जा रही गर्मी के कारण गन्ने में रोग लगने की संभावना बढ़ गई है। क्योंकि नलकूप या रजबहों से केवल जड़ों की सिंचाई होती हैं। पत्तियों पर कीट एवं रोग साफ नहीं होते। यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो फसलों की उत्पादकता पर बुरा असर पड़ेगा। उधर, जिले में कुछ स्थानों पर धान की रोपाई भी शुरू हो गई है। बिना बारिश के धान की फसल को भी नुकसान होगा। ग्राम पीनना के किसान परमेंद्र सिंह, सिखेड़ा निवासी राजपाल एवं आसाराम का कहना है कि कुछ दिन पहले तक पुरवा की हवा चल रही थी। इससे मानसून जल्द आने की उम्मीद थी, लेकिन तीन दिन से पछुवा हवा बह रही है। जब तक पश्चिमी हवा चलेगी, बारिश होने की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि किसान परेशान हैं। हालात सूखे जैसे नजर आ रहे हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं, उनकी फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
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जून के आखिरी दिनों में होती रही है बारिश
इस बार जून सूखा बीत गया, लेकिन पिछले वर्ष जून के आखिरी दिनों में अच्छी बारिश हुई थी। जून 2018 में 54.13 मिमी. बारिश रिकार्ड की गई थी। एक, छह, नौ, 17, 18, 27, 28 और 29 जून को बारिश हुई थी। जून 2017 में भी जून माह में लगभग 80 मिमी. बारिश हुई थी। सात, आठ, 26, 28, 29 और 30 जून 2017 को पानी बरसा था।
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बढ़ रहे तापमान में जनजीवन अस्त-व्यस्त
गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। न्यूनतम और अधिकतम तापमान नजदीक आ गए हैं। इससे भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 40.4 तथा न्यूनतम 27 डिग्री रिकार्ड किया गया। दोपहर भर तेज धूप और लू के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाते। गर्मी के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चे डायरिया का शिकार हो रहें तथा बड़े लू की चपेट में आ रहे हैं। एक माह से अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ी हुई है।

रात में बिजली की कटौती असहनीय
मुजफ्फरनगर। विद्युत निगम इन दिनों रात में बिजली की एक से लेकर तीन घंटे तक की कटौती कर रहा है। शुक्रवार रात को भी शहर के गांधी कालोनी, उत्तरी सिविल, आनंद विहार, संतोष विहार आदि इलाकों में रात 11 बजे से डेढ़ बजे तक बिजली की कटौती की गई। हालांकि विद्युत निगम के एक्सईएन अवनीश कुमार का कहना है कि भीषण गर्मी में ट्रांसफार्मर भभक रहे, उनके फुंकने का खतरा बन रहा है, इसलिए कुछ समय के लिए रोस्टिंग कर उन्हें ठंडा किया जाता है।


प्राकृतिक सिंचाई फसलों के लिए बेहद लाभदायक होती है। बारिश से फसलों के अनेक रोग और कीट दूर हो जाते हैं। बारिश के पानी में अनेक लवण घुले होते हैं, जो कि फसल को लाभ देते हैं और फसलों की उत्पादकता एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- पवन कुमार विश्वकर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।
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